वाल्मीकि के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को आत्मसात करने की जरूरत

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महर्षि वाल्मीकि जयंती पर हुआ व्याख्यान

फैजाबाद। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा दिनांक 24 अक्टूबर, 2018 को ”महर्षि वाल्मीकि जयंती“ पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। व्याख्यान में मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलसचिव आर0सी0 अवस्थी रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता अधिष्ठाता छात्र-कल्याण प्रो0 आशुतोष सिन्हा ने की। व्याख्यान में वाल्मीकि के चरित्र तथा उनके द्वारा रचित रामायण पर प्रकाश डालते हुए मुख्य अतिथि कुलसचिव आर0सी0 अवस्थी ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि का नाम उनके कठिन तप के कारण पड़ा था। उनके द्वारा लिखी गई रामायण में प्रेम, तप, त्याग का बड़ा ही सुन्दर ढंग से चरित्र-चित्रण किया है। उन्होंने प्रत्येक मनुष्य के लिए सद्भावना का मार्ग प्रशस्त किया है।
माइका्रेबायोलाॅजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो0 राजीव गौड़ ने कहा कि आज वाल्मीकि के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को आत्मसात् करने की जरूरत है। वाल्मीकि जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बायोकमेस्ट्री विभाग की प्रो0 नीलम पाठक ने कहा कि वाल्मीकि जी सदैव हम सभी के लिए स्मरणीय रहेंगे। प्रो0 फारूख जमाल ने महर्षि वाल्मीकि के कृति के उद्धरण का उल्लेख करते हुए कहा कि मानव को मानव की सहायता के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा इनकी कृति समाज के लिए उपायदेयता है। अन्य वक्ताओं में डाॅ0 जन्मेजय तिवारी, डाॅ0 अलका श्रीवास्तव, डाॅ0 सविता द्विवेदी, डाॅ0 पल्लवी सोनी, रीमा सिंह, सत्येन्द्र प्रताप सिंह एवं रामरतन ने महर्षि वाल्मीकि के जीवन एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अधिष्ठात छात्र-कल्याण प्रो0 आशुतोष सिन्हा ने महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण की एक उत्कृष्टतम कालजयी रचना एवं प्रासंगिकता का चित्रण करते हुए कहा कि उनके जीवन से हम सभी को प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। प्रो0 सिन्हा ने विद्यार्थियों से अपेक्षा की है कि उनके द्वारा रचित रामायण का अध्ययन जरूर करे। कार्यक्रम के शुभारम्भ में महर्षि वाल्मीकि के चित्र पर मुख्य अतिथि कुलसचिव आर0सी0 अवस्थी एवं अध्यक्षता कर रहे प्रो0 आशुतोष सिन्हा द्वारा माल्यापर्ण किया गया। कार्यक्रम का संचालन समाज कार्य विभाग के शिक्षक डाॅ0 विनय कुमार मिश्र द्वारा किया गया।

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