-आत्ममुग्ध व्यक्तित्व करता है क्राइम गैंग का नेतृत्व, रिवॉर्ड हार्मोन कराता है कुकृत्य पुनरावृत्ति
अयोध्या। व्यक्ति या समूह द्वारा देखरेख की जिम्मेदारी निहित धन या संपत्ति की चोरी या गबन का मनोगतिकीय परिप्रेक्ष्य होता है। विभिन्न शोधों के अनुसार नार्सिसिस्टिक पर्सनालिटी डिसऑर्डर या आत्ममुग्धत व्यक्ति के लोगों में संगठित आर्थित अपराध करने की संभावना प्रबल होती है। नार्सिसिस्ट या आत्ममुग्ध वर्ग में प्रथम है ग्रैंडिओस नार्सिसिस्ट यानि ऐसे लोग दम्भी व अहंकारी होते है।
दूसरा है विक्टिम नार्सिसिस्ट यानि ऐसे लोग खुद को दीन हीन दिखाकर शातिर कारनामे करते हैं। तीसरा है मलिग्नेंट नार्सिसिस्ट यानि ऐसे लोग क्रूर व संवेदनहीन तरीके से अपराधिक कृत्य को अंजाम देते हैं तथा इन्हें साइकोपैथ भी कहा जाता है। चौथा वर्ग है कम्युनल नार्सिसिस्ट का जो बाहर से कम्युनिटी या समाज का हितैषी पर अंदर से समाजरोधी कृत्य में लिप्त होता है।
मनोरसायनों का भी है रोल :
जिला चिकित्सालय के मनोविश्लेषक डा. आलोक मनदर्शन के अनुसार ब्रेन में रिवार्ड हार्मोन डोपामिन, मूड स्टेबलाइज़र हार्मोन सेरोटोनिन,लव हार्मोन ऑक्सीटोसिन व स्ट्रेस-बस्टर हार्मोन इन्डॉर्फिन होता है जो मेन्टल हेल्थ व स्वस्थ व्यक्तित्व के लिये जिम्मेदार है। परिपक्व व्यक्तित्व के लोगों को नेक व सकारात्मक उपलब्धियों से रिवॉर्ड हार्मोन डोपामिन आत्म संतुष्टि व प्रसन्नता देता है,
वहीं आत्ममुग्ध या नार्सिसिस्ट लोगों में अपराधिक व अनैतिक कृत्यों से यह हार्मोन विजयी होने जैसी खुशी प्रदान करता है जिससे कुकृत्यों की बारंबारता से ये आशक्त रहते हैं तथा लालच व कपट की मनोवृत्ति से चलायमान होने के कारण इनमें आत्मग्लानि या भयाबोध का अभाव तथा खुद को निर्दोष साबित करने की कला भरपूर होती है। कमजोर आंतरिक नियंत्रण प्रणाली, निगरानी की कमी या धन तक पहुंच इनके लिये गबन का आदर्श अवसर पैदा कर सकता है।