-दस वर्ष से अधिक पुराने एवं 5 से 10 वर्ष तक लंबित वादों के साथ प्रचलित वादों के निस्तारण पर विशेष जोर
अयोध्या। जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी की अध्यक्षता में चकबंदी कार्यों की मासिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में अपर जिलाधिकारी (एल0ओ0)/उप संचालक चकबंदी इन्द्राकान्त द्विवेदी, बन्दोबस्त अधिकारी चकबंदी मनोज कुमार सिंह सहित जनपद के समस्त चकबंदी अधिकारी, सहायक चकबंदी अधिकारी एवं चकबंदीकर्ताओं ने प्रतिभाग किया।
बैठक में जिलाधिकारी ने चकबंदी न्यायालयों में लंबित वादों की विस्तृत समीक्षा करते हुए 10 वर्ष से अधिक पुराने एवं 5 से 10 वर्ष तक लंबित वादों के साथ-साथ वर्तमान में प्रचलन में चल रहे वादों के निस्तारण पर विशेष बल दिया। उन्होंने निर्देशित किया कि 5 वर्ष से अधिक पुराने वादों के निस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाते हुए दिन-प्रतिदिन की तारीख नियत कर प्रभावी सुनवाई एवं त्वरित निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
जिलाधिकारी ने 3 वर्ष से अधिक समय से लंबित वादों के संबंध में निर्देश दिए कि सप्ताह में कम से कम दो दिन की तिथि नियत करते हुए इन वादों का शीघ्र निस्तारण कराया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि लंबित वादों के निस्तारण में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही प्रचलित वादों का भी समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि नए वाद अनावश्यक रूप से लंबित न हों।
बन्दोबस्त अधिकारी चकबंदी द्वारा अवगत कराया गया कि चकबंदी प्रक्रिया के अंतर्गत विचाराधीन ग्राम महांवा, जो लगभग 36 वर्ष पुराना ग्राम है, के अभिलेख तैयार किए जा रहे हैं। इसी प्रकार ग्राम जमदरा के अभिलेख तैयार किए जा रहे हैं। दोनों ग्रामों में माह सितम्बर के अंत तक धारा-52 के प्रकाशन की कार्यवाही पूर्ण किए जाने की जानकारी दी गई।
जिलाधिकारी ने चकबंदी प्रक्रियाधीन ग्रामों में प्राप्त होने वाली शिकायतों के निस्तारण को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए पारदर्शी, निष्पक्ष एवं गुणवत्तापूर्ण तरीके से शिकायतों का समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि चकबंदी प्रक्रिया से संबंधित कार्यों में आमजन के हितों का विशेष ध्यान रखा जाए तथा सभी कार्य निर्धारित मानकों एवं समयसीमा के अनुरूप पूर्ण किए जाएं।