-सीजेएम ने विवेचक की अन्तिम रिपोर्ट को निरस्त कर दिया अग्रिम विवेचना का आदेश
अयोध्या। कैंट थाना क्षेत्र से अशोक कुमार वर्मा के अपहरण व हत्या के बहुचर्चित मामले में विवेचक की अन्तिम रिर्पोट को न्यायालय में भारी झटका लगा है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुधांशु शेखर उपाध्याय ने विवेचक की अन्तिम रिपोर्ट के विरूद्ध प्रस्तुत वादी पक्ष से दायर प्रोटेस्ट पिटीशन पर सुनवाई किया इसके पश्चात विवेचक की अन्तिम रिपोर्ट को खारिज कर दिया साथ ही थाना कैंट को प्रकरण में अग्रिम विवेचना करने का आदेश देते हुए आख्या नियमानुसार न्यायालय में प्रस्तुत करने को कहा है।
यह मामला कैंट थाना क्षेत्र का वर्ष 2023 का है। इसके पहले वादी अभय वर्मा के अधिवक्ता अजय वर्मा ने विवेचक की ओर से दायर अन्तिम रिपोर्ट के विरूद्ध प्रोटेस्ट पिटीशन प्रस्तुत कर बहस किया। तर्क दिया कि आरोपित प्रदीप वर्मा व राजेन्द्र वर्मा के बयानों में समय को लेकर काफी विरोधाभाष है। स्वतंत्रत गवाह राम बहोर वर्मा, राजकुमार वर्मा व बलदेव वर्मा के बयानों में भी समय व स्थान पर उपस्थित के सम्बंध में किये गये कथन में भी काफी विरोधाभाष है। विवेचक ने रटारटाया बयान अंकित कर दिया है।
मृतक के मोबाइल पर मंशाराम की 22 बार आउटगोइंग व इनकमिक काल का होना पाया गया है परन्तु विवेचक ने उक्त के संबंध में कोई काल डिटेल नहीं दिया और न ही घटना स्थल के संबंध मंे कोई सीसीटीवी आदि का अवलोकन किया है। विवेचक ने सरसरी तौर पर विवेचना करेके अन्तिम रिपोर्ट प्रस्तुत की गयी है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने न्यायालय में विवेचक की ओर से दायर अन्तिम रिपोर्ट के अवलोकन तथा केस डायरी के परिशीलन से विवेचना का त्रुटिपूर्ण होना पाया जाता है। अन्तिम रिपोर्ट निरस्त किये जाने योग्य है तथा मामले में अग्रिम विवेचना कराया जाना विधि की मंशा के अनुरूप होगा।
अभियोजन पक्ष के अनुसार जनपद के गोसाईगंज थाना क्षेत्र अन्तर्गत चैडारी बन्दनपुर गांव निवासी अभय वर्मा के चाचा अशोक कुमार वर्मा की पुरानी रंजिश को लेकर 23 जून 2023 को सुबह लगभग 8 बजे गांव के ही प्रदीप वर्मा पुत्र जगदीश व राजेन्द्र वर्मा के अलावां अन्य सहयोगी ने अशोक वर्मा को अगवा कर हत्या कर दी गयी थी। इसका मुकदमा दर्ज करने के लिए थाना कैंट में तहरीर दी गयी। मुकदमा दर्ज न होने पर अभय वर्मा ने एसएसपी को प्रार्थना पत्र देकर मुकदमा दर्ज कराया था। यह मुकदमा थाना कैंट में अपराध संख्या 244/23 अन्तर्गत धाना 364, 302, 504, 506 भादवि के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। जिसमें विवेचक ने नामजद आरोपियों को क्लीन चिट देते हुए अन्तिम रिपोर्ट को न्यायालय में प्रस्तुत किया था।