-भाकियू अराजनैतिक ने मंडलायुक्त कार्यालय पर किया धरना-प्रदर्शन, सौंपा ज्ञापन

अयोध्या। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के आह्वान पर मंगलवार को प्रदेशव्यापी कार्यक्रम के अंतर्गत मंडलायुक्त कार्यालय के समक्ष विशाल किसान पंचायत एवं धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। पंचायत में बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए और प्रदेश सरकार के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री जी को संबोधित 16 सूत्रीय मांगपत्र मंडल प्रशासन को सौंपने का निर्णय लिया गया।
किसानों ने कहा कि प्रदेश का अन्नदाता बढ़ती कृषि लागत, गन्ने का लाभकारी मूल्य न मिलने, धान खरीद में अव्यवस्था, एग्रीस्टैक, किसान रजिस्ट्री एवं डिजिटल क्रॉप सर्वे की तकनीकी खामियों, फसल क्षति, खाद-बीज की समस्या, भूमि अभिलेखों की त्रुटियों, आवारा पशुओं, बिजली, सिंचाई तथा फसल बीमा जैसी अनेक गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। इन समस्याओं के समाधान के लिए सरकार को तत्काल प्रभावी कदम उठाने चाहिए। काफी देर तक संबंधित अधिकारी किसानों की पंचायत में वार्ता के लिए नहीं पहुंचे।
इससे किसानों में भारी आक्रोश फैल गया और उन्होंने मंडलायुक्त कार्यालय के मुख्य द्वार पर शांतिपूर्ण ढंग से गेट जाम कर अपना विरोध दर्ज कराया। किसानों के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए अपर आयुक्त अजय कांत सैनी मौके पर पहुंचे और किसान नेताओं से वार्ता कर उनका ज्ञापन प्राप्त किया। उन्होंने किसानों की मांगों को शासन तक प्राथमिकता के आधार पर पहुंचाने तथा उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद किसानों ने अपना आंदोलन शांतिपूर्वक समाप्त किया।
धरना-प्रदर्शन एवं किसान पंचायत का नेतृत्व प्रदेश उपाध्यक्ष देवनारायनसिंह, वरिष्ठ प्रदेश सचिव डॉ. रामजन्म वर्मा तथा जिला अध्यक्ष अरविंद यादव ने किया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से अमेठी जिला अध्यक्ष चुन्नू सिंह, सुल्तानपुर प्रतिनिधि कामराज दुबे, प्रदेश सचिव जगतपाल सिंह, मंडल महासचिव जिलाजीत वर्मा, संगठन मंत्री दीपचंद, जिला अर्जुन मौर्यातहसील अध्यक्ष बीकापुर विनोद कुमार निर्मला देवी श्याम काली शांति मौरिया रामनयन वर्मा जिला उपाध्यक्ष अमरनाथ, बीकापुर प्रभारी रामजीतपांडे, ब्लॉक अध्यक्ष तारुन राजाराम मीडिया प्रभारी राजू पांडेवर्मा, महिला जिला अध्यक्ष सविता मौर्य सहित सैकड़ों किसान उपस्थित रहे। किसान नेताओं ने कहा कि यदि सरकार शीघ्र किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं करती है तो भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) प्रदेशभर में आंदोलन को और व्यापक रूप देगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन एवं प्रशासन की होगी।