राज्यपाल ने कहा-संस्कारयुक्त शिक्षा से ही विकसित भारत का निर्माण, युवाओं को नशे से दूर रहने का आह्वान, दीक्षांत समारोह में 104 मेधावी विद्यार्थियों को 120 स्वर्ण पदक, 1.66 लाख उपाधियां डिजिलॉकर में समावेशित
अयोध्या। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में बुधवार को डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या का 31वां दीक्षांत समारोह भव्यता के साथ सम्पन्न हुआ। दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति ने 104 मेधावी छात्र-छात्राओं को 120 स्वर्ण पदक प्रदान किए। इसके साथ ही उन्होंने स्नातक एवं परास्नातक की 1,66,055 उपाधियों एवं अंकपत्रों को डिजिलॉकर में समावेशित किया। इस अवसर पर कुलाधिपति ने विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ संस्कार, नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व को जीवन का आधार बनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने का केंद्र नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, विचारों के परिष्कार और राष्ट्र के भविष्य के निर्माण का महत्वपूर्ण केंद्र है।

दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कुलाधिपति ने विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ संस्कार, स्वाभिमान और सामाजिक जिम्मेदारी का संकल्प लेने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश गंगा, यमुना और सरस्वती की पावन भूमि है। यह भगवान श्रीराम, शिव और श्रीकृष्ण की आराधना एवं आध्यात्मिक चेतना की भूमि है। अयोध्या मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की नगरी है और यहां से शिक्षा प्राप्त कर निकलने वाले विद्यार्थियों का दायित्व है कि वे अपने गौरवशाली अतीत को स्मरण करते हुए उज्ज्वल भविष्य के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ें। राज्यपाल ने कहा कि डॉ. राममनोहर लोहिया ने आध्यात्मिक एवं धार्मिक चेतना के साथ स्वाभिमान और भारतीय अस्मिता को महत्व दिया। उन्होंने धर्म को धर्मांतरण से अलग बताते हुए भारतीय संस्कृति और परंपरा के मूल तत्वों को समझने की आवश्यकता पर बल दिया। कुलाधिपति ने कहा कि व्यक्ति ईश्वर को माने अथवा न माने, लेकिन भारतीय समाज की एकता और अखंडता के महत्व से इनकार नहीं कर सकता। विद्यार्थियों को शिक्षा प्राप्त करने के बाद यह विचार करना चाहिए कि वे कौन-से संस्कार लेकर समाज और राष्ट्र के निर्माण में योगदान देंगे। उन्होंने दीक्षांत समारोह में उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनकी सफलता में शिक्षकों और अभिभावकों का महत्वपूर्ण योगदान है। माता-पिता और गुरुजनों के विश्वास एवं सतत प्रयासों ने विद्यार्थियों को इस मुकाम तक पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि दीक्षांत केवल उपाधि प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने का अवसर भी है।

राज्यपाल ने विश्वविद्यालय द्वारा 1,66,055 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि इनमें लगभग 60 प्रतिशत छात्र और 40 प्रतिशत छात्राएं हैं। समारोह में 120 स्वर्ण पदक प्रदान किए गए, जिनमें 86 पदक छात्राओं ने अर्जित किए, जो कुल पदकों का लगभग 72 प्रतिशत है। उन्होंने इसे बदलते भारत की तस्वीर बताते हुए कहा कि बेटियां शिक्षा को अधिक अनुशासित और गंभीरता से ग्रहण कर रही हैं। उन्होंने महिला शिक्षा और सशक्तिकरण को देश की प्रगति का महत्वपूर्ण आधार बताया। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी श्री संजय श्रीनेत के अनुभव का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि पारदर्शी और निष्पक्ष कार्यप्रणाली युवाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि भारत विश्व की सबसे बड़ी युवा आबादी वाले देशों में अग्रणी है और युवा शक्ति विकसित भारत के निर्माण की सबसे बड़ी आधारशिला है।
विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की चर्चा करते हुए राज्यपाल ने कहा कि डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। विश्वविद्यालय ने एनआईआरएफ इंजीनियरिंग श्रेणी में देश में 138वां और उत्तर प्रदेश में 18वां स्थान प्राप्त किया है। विश्वविद्यालय के खिलाड़ियों ने विभिन्न राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में 304 पदक अर्जित किए हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के स्टार्टअप इंडिया और स्किल इंडिया जैसे अभियानों का उद्देश्य युवाओं को रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाला बनाना है। राज्यपाल ने भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 तक भारत की 615 पुरातन वस्तुएं विदेशों से वापस लाई जा चुकी हैं। प्रत्येक प्रतिमा और पुरातन वस्तु केवल एक कलाकृति नहीं, बल्कि देश की विरासत और पहचान का प्रतीक है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी संस्कृति और विरासत को समझने तथा उसे आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
उन्होंने युवाओं को नशे से दूर रहने की अपील करते हुए कहा कि नशा व्यक्ति से उसका भविष्य छीन लेता है। प्रधानमंत्री के नशामुक्ति अभियान का उद्देश्य युवा शक्ति को नशे से दूर रखना है। उन्होंने कहा कि यदि कोई एक युवा भी नशे की गिरफ्त में जाने से बचता है तो यह समाज के लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने युवाओं से अपने आसपास के लोगों को भी नशे से बचाने के लिए जागरूक करने का आह्वान किया। राज्यपाल ने पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधन हमें विरासत में नहीं मिले हैं कि हम उन्हें मनमाने ढंग से नष्ट करें। प्लास्टिक पर्यावरण के लिए गंभीर चुनौती है, इसलिए इसके विरुद्ध व्यापक जनभागीदारी आवश्यक है। उन्होंने युवाओं से पर्यावरण संरक्षण को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। महिला सशक्तिकरण पर बोलते हुए राज्यपाल ने कहा कि सशक्त नारी ही सशक्त भविष्य का निर्माण कर सकती है। उन्होंने बेटियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने छात्राओं के स्वास्थ्य परीक्षण और पोषण संबंधी जागरूकता की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने अपने सामाजिक अनुभवों का उल्लेख करते हुए बताया कि भूकंप के बाद उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों के गांवों का दौरा किया और महिलाओं की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के उद्देश्य से संस्था के माध्यम से कार्य शुरू किया। इस प्रयास से लगभग 80 हजार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिली और संस्था के माध्यम से करोड़ों रुपये का कारोबार संभव हुआ। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत की कल्पना तभी साकार होगी जब गांवों की महिलाएं और युवा आर्थिक रूप से सशक्त होंगे।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय प्रशासन से छात्रावासों और विद्यार्थियों की सुविधाओं पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने छात्रावासों में गैस के स्थान पर लकड़ी से भोजन पकाए जाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर को और अधिक सुंदर, स्वच्छ एवं सुविधायुक्त बनाने तथा निर्माणाधीन नए पुस्तकालय भवन का कार्य गुणवत्तापूर्वक पूरा कराने पर जोर दिया। उन्होंने मेधावी छात्राओं के लिए जिला स्तर पर छात्रावास की व्यवस्था किए जाने की भी बात कही। राज्यपाल ने कहा कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन और संबंधित संस्थाएं उनके द्वारा बताए गए बिंदुओं पर गंभीरता से कार्य करती हैं तो उन्हें अत्यंत प्रसन्नता होगी। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा, संस्कार, स्वाभिमान, पर्यावरण संरक्षण, नशामुक्ति और राष्ट्र निर्माण को अपने जीवन का संकल्प बनाने का आह्वान किया।
डिग्री के साथ चरित्र और संवेदना को जीवन का आधार बनाएं युवाः संजय श्रीनेत

अवध विश्वविद्यालय के 31 वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग, प्रयागराज के अध्यक्ष श्री संजय श्रीनेत ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल उपाधि प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि उत्तरदायित्वपूर्ण जीवन के शुभारंभ का पर्व है। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे ज्ञान के साथ चरित्र, सफलता के साथ विनम्रता और तकनीकी दक्षता के साथ मानवीय संवेदना को अपने जीवन का आधार बनाएं। उन्होंने कहा कि डिग्री योग्यता का प्रमाण हो सकती है, लेकिन चरित्र ही व्यक्ति की विश्वसनीयता और महानता का आधार बनता है। दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए श्री संजय श्रीनेत ने कुलाधिपति एवं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल के नेतृत्व, साहस, सेवा और कर्तव्यनिष्ठा की सराहना की। उन्होंने कहा कि उनका जीवन नारी शक्ति, संवेदनशील नेतृत्व और राष्ट्रसेवा का प्रेरक उदाहरण है। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों, कुलपति, कार्यपरिषद एवं विद्वत परिषद के सदस्यों, शिक्षकों, अभिभावकों और उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को उन्होंने शुभकामनाएं दीं। श्रीनेत ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि कुलपति के दूरदर्शी नेतृत्व में विश्वविद्यालय ने अपने 52वें वर्ष में अनेक महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं-नैक की मान्यता प्रक्रिया में प्रगति, शोध एवं पीएचडी कार्यक्रमों में गुणात्मक वृद्धि, डिजिटल शिक्षा एवं ऑनलाइन परीक्षाओं में पारदर्शिता, खेल एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में राष्ट्रीय स्तर की उपलब्धियां तथा न्यू एज इन्क्यूबेशन सेंट्रर के माध्यम से स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देना उल्लेखनीय है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप नए पाठ्यक्रमों और बहुविषयक दृष्टिकोण को भी महत्वपूर्ण बताया।
युवाओं को जीवन के सात सूत्र देते हुए उन्होंने धैर्य, निरंतर सीखने, चरित्र, विनम्रता एवं संवेदनशीलता, संबंधों के सम्मान, कठिनाइयों को अवसर में बदलने तथा उद्देश्य के प्रति समर्पण को सफलता का आधार बताया। उन्होंने कहा कि असफलता अंत नहीं, बल्कि अनुभव का विश्वविद्यालय है। प्रकृति से सीखने की प्रेरणा देते हुए उन्होंने कहा कि बीज का मिट्टी में दबना उसका अंत नहीं, बल्कि विशाल वृक्ष बनने की तैयारी है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव पर उन्होंने कहा कि आज के युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ मोरल इंटेलिजेंस और नेचुरल इंटेलिजेंस का भी विकास करना होगा। मशीनें सूचना और गणना दे सकती हैं, लेकिन करुणा, विवेक, नैतिक साहस और मानवीय संवेदना मनुष्य की विशिष्ट शक्ति हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य उन्हीं का होगा, जिनके पास उच्च तकनीकी के साथ उच्च कोटि की मानवता होगी।
श्री संजय श्रीनेत ने युवाओं से वर्ष 2047 के विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत का भविष्य केवल सरकारों और नीतियों से नहीं, बल्कि युवाओं के विचार, कर्म और चरित्र से तय होगा। शिक्षा का अंतिम लक्ष्य केवल रोजगार नहीं, बल्कि अज्ञान, भय, अहंकार, संकीर्णता और अन्याय से मुक्ति दिलाना होना चाहिए। अंत में उन्होंने युवाओं को संकल्प दिलाया कि वे ज्ञान प्राप्त करेंगे, लेकिन अहंकार नहीं, सफलता हासिल करेंगे, लेकिन संवेदना नहीं खोएंगे, ऊंचाइयों तक पहुंचेंगे, लेकिन अपनी जड़ों को नहीं भूलेंगे तथा अधिकारों के साथ कर्तव्यों का भी निष्ठापूर्वक पालन करेंगे।
शिक्षा को संस्कार, रोजगार और तकनीक से जोड़कर विकसित भारत के निर्माण में दें योगदानः योगेंद्र उपाध्याय

डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के 31वें दीक्षांत समारोह में विशिष्ट अतिथि एवं उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि उच्च शिक्षा की दिशा और दशा में व्यापक परिवर्तन आया है। आज उच्च शिक्षा का विस्तार देश के प्रत्येक प्रदेश में हो चुका है और युवाओं के लिए शिक्षा के नए अवसर उपलब्ध हुए हैं। उन्होंने उपाधि एवं पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि केवल विद्यार्थियों की नहीं, बल्कि उनके माता-पिता और गुरुजनों के त्याग, संघर्ष एवं मार्गदर्शन का भी परिणाम है।
उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि अयोध्या केवल एक शहर नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना, स्वाभिमान और अस्मिता का प्रतीक है। पांच सौ वर्षों तक चले सतत संघर्ष के बाद अयोध्या आज अपने गौरवशाली स्वरूप में विश्व के सामने है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या भारतीय संस्कृति और आस्था का केंद्र है। ऐसे ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक परिवेश में स्थापित डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय से उपाधि एवं मेडल प्राप्त करना विद्यार्थियों के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल शिक्षांत नहीं है, बल्कि यह जीवन में प्राप्त शिक्षा को समाज और राष्ट्र के हित में उपयोग करने का संकल्प लेने का अवसर भी है। विद्यार्थियों को अपने गौरवशाली इतिहास और भारतीय संस्कृति को सदैव स्मरण रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति ने सदैव पूरे देश को एक सूत्र में बांधने का कार्य किया है। भगवान श्रीराम ने उत्तर से दक्षिण तक, भगवान श्रीकृष्ण ने पश्चिम से पूर्वोत्तर तक सांस्कृतिक एकता का संदेश दिया, जबकि भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ देश की एकता एवं अखंडता के प्रतीक हैं।
श्री उपाध्याय ने कहा कि विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ संस्कार, रोजगारपरक कौशल और आधुनिक तकनीक से भी जोड़ना आवश्यक है। संस्कारविहीन शिक्षा समाज के लिए उपयोगी नहीं हो सकती। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका है। आधारभूत संरचना के विकास के साथ ज्ञान, कौशल, तकनीक और संस्कार से युक्त युवा ही भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। उन्होंने उपाधि एवं पदक प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
डिग्री के साथ जिम्मेदारी भी लेकर आगे बढ़ें युवाः राज्य मंत्री रजनी तिवारी

डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के 31वें दीक्षांत समारोह के अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार की उच्च शिक्षा राज्य मंत्री श्रीमती रजनी तिवारी ने विद्यार्थियों से शिक्षा को समाज और राष्ट्र की सेवा से जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि डिग्री विद्यार्थियों के जीवन की यात्रा का अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। डिग्री हाथ में आने के साथ अब जिम्मेदारी उनके कंधों पर है। उन्होंने विद्यार्थियों से ज्ञान, विवेक, संस्कार और जिम्मेदारी को जीवन का हिस्सा बनाकर आगे बढ़ने की अपील की। दीक्षांत उद्बोधन में श्रीमती तिवारी ने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों, उनके अभिभावकों एवं गुरुजनों को बधाई दी। स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्होंने कहा कि स्वर्ण पदक केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के परिश्रम, माता-पिता के त्याग और शिक्षकों के मार्गदर्शन का सम्मान है। उन्होंने कहा कि जिन विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक नहीं मिला है, वे निराश न हों और अपनी प्रतिभा पर विश्वास रखते हुए नए लक्ष्य निर्धारित करें।
राज्य मंत्री ने कहा कि अवध विश्वविद्यालय केवल शिक्षण संस्था नहीं, बल्कि अवध क्षेत्र की शिक्षा, संस्कृति, शोध और सामाजिक चेतना का महत्वपूर्ण केंद्र है। विश्वविद्यालय में आधुनिक अधोसंरचना, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालय, शोध एवं नवाचार, खेल सुविधाओं तथा डिजिटल व्यवस्था के विकास की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि वास्तविक विकास गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, उत्कृष्ट शोध और विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व विकास से सुनिश्चित होगा। उन्होंने विद्यार्थियों को शोध, नवाचार और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आगे बढ़ने का संदेश दिया। जल संकट, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, कृषि, स्वास्थ्य, साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आपदा प्रबंधन जैसी चुनौतियों का समाधान शोध एवं नवाचार से करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि अवध विश्वविद्यालय के विद्यार्थी केवल उपाधि धारक नहीं, बल्कि समस्या समाधानकर्ता, नवाचारी, शोधकर्ता और राष्ट्र निर्माता बनें।
श्रीमती तिवारी ने युवाओं से नशे से दूर रहने और दूसरों को भी नशामुक्त जीवन के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, जल बचत, ऊर्जा संरक्षण, स्वच्छता और वृक्षों के संरक्षण को जीवन का संस्कार बनाने की अपील की। बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा, सम्मान और समान अवसर को आवश्यक बताते हुए उन्होंने युवाओं से महिला सम्मान को संस्कार का हिस्सा बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि अयोध्या की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के अनुरूप विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के बीच सशक्त सेतु बने। उन्होंने विद्यार्थियों से ईमानदारी, अनुशासन, परिश्रम और राष्ट्रहित को जीवन का आधार बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि युवा शक्ति ही विकसित और आत्मनिर्भर भारत की सबसे बड़ी ताकत है। समारोह के अंत में उन्होंने सभी उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों एवं स्वर्ण पदक विजेताओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और कहा कि विश्वविद्यालय राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करे। उन्होंने विद्यार्थियों को “नशामुक्त युवा-सशक्त उत्तर प्रदेश-विकसित भारत” का संकल्प दिलाया।
अवध विश्वविद्यालय को विकास की नई ऊंचाई पर ले जाने का संकल्पः कुलपति

डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के 31वें दीक्षांत समारोह में कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, शोध, खेल, सामाजिक एवं आधारभूत विकास की उपलब्धियों का विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय निरंतर गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा, शोध, नवाचार और सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहा है। विश्वविद्यालय के भविष्यगामी विस्तार की दिशा में नवीन परिसर से लगे लगभग 6.5 हेक्टेयर भूमि का क्रय एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, जो संस्थान के अकादमिक एवं शोध विस्तार को नई गति प्रदान करेगा।
कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय से वर्तमान में अयोध्या, अम्बेडकरनगर, बाराबंकी, सुल्तानपुर और अमेठी जनपदों के 659 महाविद्यालय एवं संस्थान संबद्ध हैं। इनमें 02 संघटक, 08 राजकीय, 15 अनुदानित तथा 634 स्ववित्तपोषित महाविद्यालय शामिल हैं। विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालयों में लगभग छह लाख विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। वर्तमान सत्र 2026-27 में संबद्ध महाविद्यालयों में अब तक 1,88,315 विद्यार्थियों का प्रवेश हुआ है, जबकि विश्वविद्यालय परिसर में तीन हजार से अधिक प्रवेश हो चुके हैं। परिसर में इस सत्र 18 नए पाठ्यक्रम प्रारंभ किए गए हैं। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में नालंदा विश्वविद्यालय की तर्ज पर निर्मित तालाब का उद्घाटन 27 जून को किया गया। स्वतंत्र विद्युत फीडर की सुविधा शुरू की गई है। पेयजल व्यवस्था, एसटीपी, ईडीपी बेसमेंट वाटरप्रूफिंग एवं बाउंड्रीवाल सहित विभिन्न निर्माण कार्य प्रगति पर हैं। पीएम ऊषा योजना के अंतर्गत परीक्षा भवन, आठ कोर्ट वाले इंडोर गेम्स परिसर, स्किल डेवलपमेंट हब एवं इनक्यूबेशन सेल का निर्माण भी किया जा रहा है।
पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में विश्वविद्यालय ने 3200 वर्ग मीटर क्षेत्र में मियांबाकी पद्धति से लगभग 10 हजार स्थानीय फलदार, औषधीय एवं छायादार पौधों के रोपण का लक्ष्य निर्धारित किया है। सामाजिक सरोकारों के तहत नशा मुक्ति अभियान, गोद लिए गांवों में ‘पढ़े विद्यालय और बढ़े विद्यालय’, महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य जांच, टीबी रोगियों को पोषण सहायता तथा विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। कुलपति ने बताया कि सत्र 2025-26 में परीक्षा में उत्तीर्ण 1,66,055 विद्यार्थियों में छात्राओं की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत रही। दीक्षांत समारोह में प्रदान किए जाने वाले 120 स्वर्ण पदकों में 86 छात्राओं ने हासिल किए हैं। उन्होंने इसे महिला सशक्तिकरण और छात्राओं की शैक्षणिक उपलब्धि का महत्वपूर्ण प्रमाण बताया। शोध एवं अकादमिक क्षेत्र में वर्ष 2026 में अब तक 21 शोध परियोजनाएं, 20 नए एमओयू, 04 अंतरराष्ट्रीय एवं 22 राष्ट्रीय संगोष्ठियां/कार्यशालाएं आयोजित की गईं। इसी अवधि में 187 शोध पत्र, 92 बुक चैप्टर और 09 पेटेंट प्रकाशित हुए। विश्वविद्यालय ने आईआईआरएफ, एडुरैंक, यूनीरैंक, तथा नेचर इंडेक्स जैसी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में भी उल्लेखनीय स्थान प्राप्त किया है।
खेल क्षेत्र में विश्वविद्यालय के खिलाड़ियों ने सत्र 2025-26 में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में 03 स्वर्ण, 02 रजत एवं 04 कांस्य पदक हासिल किए। केंद्रीय पुस्तकालय के आधुनिकीकरण के साथ कंप्यूटर लैब, भारतीय ज्ञान परंपरा कक्ष, प्रतियोगी परीक्षा सेल, ई-बुक्स एवं ई-जर्नल्स की ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध कराई गई है। कुलपति ने कहा कि अयोध्या की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वर्ष 2025 के दीपोत्सव में विश्वविद्यालय के लगभग 30 हजार विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने 55 घाटों पर दीप प्रज्वलित कर आयोजन को वैश्विक पहचान दिलाने में योगदान दिया। दीक्षांत समारोह के अंत में कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने कुलाधिपति एवं राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल, मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष श्री संजय श्रीनेत, उच्च शिक्षा मंत्री श्री योगेंद्र उपाध्याय, राज्य मंत्री श्रीमती रजनी तिवारी सहित अतिथियों, शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं मीडिया प्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन प्रो0 नीलम पाठक ने किया। मेधावियों को स्वर्णपदक एवं उपाधियों का वितरण एवं अतिथियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव विनय कुमार सिंह द्वारा किया गया।
दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालय की प्रथम महिला श्रीमती मीना सिंह, जिलाधिकारी शंशाक त्रिपाठी, एसएसपी डाॅ. गौरव ग्रोवर, मुख्य विकास अधिकारी के.के. सिंह, वित्त अधिकारी पुर्णेन्दु शुक्ल, कार्यपरिषद, विद्यापरिषद सहित विश्वविद्यालय के आचार्य एवं उपाधिधारक मौजूद रहे।
कुलाधिपति ने गोद लिये गांवों के विजेता विद्यार्थियों को किया पुरस्कृत

अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के 31 वें दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति एवं राज्यपाल आनन्दीबेन पटेल ने विश्विद्यालय द्वारा गोद लिये गये गांवों के विद्यालयों में आयोजित प्रतियोगिताओं के तीनों विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कार प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया। इसके साथ ही कुलाधिपति ने विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ रचनात्मक एवं सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता के लिए प्रेरित किया।
कुलाधिपति ने 10 आंगनबाड़ी किट का किया वितरण

अयोध्या। 31वें दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालय की सामाजिक सहभागिता एवं सामुदायिक विकास की पहल के अंतर्गत राज्यपाल एवं कुलाधिपति ने आंगनबाड़ी किट का वितरण किया। उन्होंने आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य एवं प्रारंभिक शिक्षा को सुदृढ़ करने पर बल दिया।
तीन जनपदों के अधिकारियों को एचपीवी टीकाकरण अभियान के लिए मिला प्रशस्ति पत्र

अयोध्या। 31वें दीक्षांत समारोह में एचपीवी टीकाकरण अभियान में उल्लेखनीय योगदान के लिए अयोध्या, बाराबंकी एवं सुलतानपुर के अधिकारियों को सम्मानित किया गया। कुलाधिपति एवं राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने संबंधित जिलाधिकारियों, मुख्य विकास अधिकारियों एवं पुलिस अधिकारियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए। उन्होंने किशोरियों के स्वास्थ्य एवं सुरक्षित भविष्य के लिए एचपीवी टीकाकरण के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने अधिकारियों के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने जनजागरूकता अभियानों को निरंतर आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों को प्रदान की गईं पुस्तकें
अयोध्या। 31वें दीक्षांत समारोह में जनभवन से प्राप्त पुस्तकों का वितरण प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों को किया गया। कुलाधिपति एवं राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने प्राथमिक विद्यालय के दो शिक्षकों को पुस्तकें प्रदान कीं। उन्होंने शिक्षकों को पुस्तकों के माध्यम से विद्यार्थियों में अध्ययन एवं ज्ञान के प्रति रुचि विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शिक्षक का निरंतर अध्ययन और ज्ञानवर्धन आवश्यक है।
अयोध्या। 31वें दीक्षांत समारोह के अवसर पर कुलपति द्वारा विवि की कुलाधिपति एवं राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल को पुस्तकें भेंट की गईं। कुलपति ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, शोध एवं साहित्यिक गतिविधियों से संबंधित प्रकाशनों से उन्हें अवगत कराया। उन्होंने विश्वविद्यालय की अकादमिक उपलब्धियों एवं ज्ञान-सृजन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। कुलाधिपति महोदया ने विश्वविद्यालय के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को अध्ययन, शोध एवं नवाचार के लिए प्रोत्साहित किया।
मोलेला टेराकोटा कला को नई पहचान दिलाने वाले हल्दी घाटी के भग्गा लाल कुम्हार को ‘विद्या वाचस्पति’ की मानद उपाधि

अयोध्या। राजस्थान की प्रसिद्ध पारंपरिक मोलेला टेराकोटा कला के कुशल शिल्पकार श्री भग्गा लाल कुम्हार को भारतीय लोककला एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या द्वारा मानद उपाधि ‘विद्या वाचस्पति’ से सम्मानित किया गया। श्री भग्गा लाल कुम्हार ने मोलेला टेराकोटा कला की पारंपरिक तकनीकों को संरक्षित करने के साथ-साथ उनमें नए प्रयोग कर इस लोककला को आधुनिक स्वरूप प्रदान किया है। उनकी कलाकृतियों में राजस्थान की धार्मिक, सांस्कृतिक एवं स्थानीय परंपराओं की समृद्ध झलक देखने को मिलती है। वे पारंपरिक मिट्टी और प्राकृतिक रंगों का प्रयोग कर आकर्षक एवं विशिष्ट कलाकृतियों का निर्माण करते हैं।
उन्होंने कार्यशालाओं एवं लाइव प्रदर्शन के माध्यम से विद्यार्थियों और युवा कलाकारों को मोलेला टेराकोटा कला की बारीकियों से परिचित कराया है। उनकी कलाकृतियों को राष्ट्रीय प्रदर्शनियों तथा विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों में पहचान मिली है। कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें राजस्थान सरकार का राज्य पुरस्कार तथा वेस्ट जोन कल्चरल सेंटर का शिल्प सम्मान भी प्राप्त हो चुका है। मोलेला टेराकोटा कला को जीआई संरक्षण दिलाने में भी श्री भग्गा लाल कुम्हार की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने अपनी कला के माध्यम से न केवल राजस्थान की समृद्ध लोक परंपरा को जीवंत बनाए रखा, बल्कि नई पीढ़ी को इससे जोड़ने का भी निरंतर प्रयास किया है। भारतीय लोककला एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार में उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें ‘विद्या वाचस्पति’ की मानद उपाधि प्रदान की गई।
राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने विश्वविद्यालय की प्रदर्शनियों का किया अवलोकन
अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के 31वें दीक्षांत समारोह के अवसर पर कुलाधिपति एवं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनियों का अवलोकन किया। उन्होंने प्रौढ़ एवं सतत शिक्षा विभाग की मिलेट्स रेसिपी प्रदर्शनी का अवलोकन कर विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना की। इस प्रदर्शनी में छात्र-छात्राओं रागी की इडली, बाजरे के लड्डू, सावा की खिचड़ी, मखाना-चिया की खीर, ज्वार की कुट्टी, बाजरे की इडली एवं रागी के मोदक सहित विभिन्न व्यंजन प्रदर्शित किए गए। राज्यपाल ने विद्यार्थियों से मोटे अनाज को अपने दैनिक आहार में शामिल करने का आह्वान किया।
वहीं राज्यपाल ने फैशन डिजाइनिंग एंड गारमेंट टेक्नोलॉजी विभाग की हैंडीक्राफ्ट प्रदर्शनी का भी उन्होंने अवलोकन किया। सिविल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा प्रस्तुत सीताराम सरोवर प्रदर्शनी ने भी उनका ध्यान आकर्षित किया। ललित कला विभाग की ट्रेडिशनल पेंटिंग्स प्रदर्शनी तथा पर्यावरण विभाग की पर्यावरण प्रदर्शनी का भी राज्यपाल ने निरीक्षण किया। उन्होंने प्रदर्शनियों में विद्यार्थियों की रचनात्मकता, नवाचार और उपयोगी उत्पादों की सराहना करते हुए उन्हें प्रोत्साहित किया। प्रदर्शनी में कुलपति डाॅ. बिजेन्द्र सिंह के नेतृत्व में विभिन्न विभागों के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने राज्यपाल को प्रदर्शित सामग्री की जानकारी दी।
इस अवसर पर प्रदर्शनी के संयोजक प्रो0 अनूप कुमार, प्रो. सुरेंद्र मिश्रा, डाॅ0 विनोद चैधरी, कपिल हसानी, रत्नेश यादव, विनय शर्मा, कपिल, प्रतिभा त्रिपाठी, सरिता द्विवेदी एवं शालिनी पाण्डेय सहित शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
राज्यपाल ने चार शिक्षकों को प्रदान किया प्रशस्ति पत्र

अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के 31वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल एवं कुलाधिपति द्वारा विभिन्न शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर केएनआईपीएस, सुल्तानपुर के डॉ. अवधेश प्रताप सिंह एवं डॉ. दीपक कुमार, के.एस. साकेत पीजी कॉलेज के डॉ. ए.के. राय तथा मुख्य परिसर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के डॉ. नवीन पटेल को राज्यपाल ने प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। समारोह में शिक्षकों की शैक्षणिक एवं अकादमिक उपलब्धियों की सराहना की गई। राज्यपाल द्वारा सम्मानित किए जाने पर शिक्षकों में उत्साह का माहौल रहा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने शिक्षकों की उपलब्धियों को विश्वविद्यालय के लिए गौरवपूर्ण बताया।