14 कोसी परिक्रमा मार्ग चौड़ीकरण, देर रात 18 घरों पर चला बुलडोजर

by Next Khabar Team
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-पीड़ित परिवारों के समर्थन में उतरीं भाजपा महिला मोर्चा, अचानक हुए एक्शन से प्रभावित परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल

अयोध्या। रामनगरी अयोध्या के 14 कोसी परिक्रमा’ की तैयारियों के बीच अयोध्या में प्रशासन के चौड़ीकरण अभियान ने एक नया प्रशासनिक और राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। शहर के जनौरा नाका क्षेत्र में जिला प्रशासन के बुलडोजर ने चौड़ीकरण की राह में आ रहे निर्माणों को ध्वस्त कर दिया, जिसके बाद प्रभावित परिवारों में कोहराम मच गया। हालांकि, इस बार कार्रवाई का विरोध केवल स्थानीय निवासियों तक सीमित नहीं रहा; सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी की महिला मोर्चा की शीर्ष स्थानीय नेता भी पीड़ित परिवारों के पक्ष में खुलकर मैदान में उतर आई हैं।

​देर रात की कार्रवाई से हड़कंप, कुल 18 मकान ध्वस्त

​अयोध्या को भव्य और सुगम बनाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन 14 कोसी परिक्रमा मार्ग का तेजी से चौड़ीकरण कर रहा है। इसी अभियान के तहत जनौरा नाका क्षेत्र में प्रशासन की टीम भारी पुलिस बल और बुलडोजर लेकर पहुंची।​शुरुआती कार्रवाई मे प्रशासन ने अभियान की शुरुआत करते हुए मार्ग में बाधा बन रहे 11 आवासीय मकानों को ताश के पत्तों की तरह ढहा दिया।​देर रात का एक्शन, कार्रवाई यहीं नहीं रुकी; प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में देर रात अभियान आगे बढ़ाते हुए 7 अन्य घरों को भी ध्वस्त कर दिया गया।​बेघर हुए परिवार, इस पूरी कार्रवाई से कुल 18 परिवार बेघर हो चुके हैं। कड़कड़ाती व्यवस्था और अचानक हुए इस एक्शन से प्रभावित परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है।

​”एकतरफा कार्रवाई क्यों?”-भाजपा महिला मोर्चा ने उठाए सवाल

​स्थानीय लोगों के आंसुओं और प्रशासनिक कार्रवाई की सूचना मिलते ही भाजपा महिला मोर्चा का एक प्रतिनिधिमंडल तुरंत जनौरा नाका पहुंचा। मौके पर पहुंचीं महिला मोर्चा की वरिष्ठ नेता अशोका द्विवेदी, बूथ अध्यक्ष अनीता शर्मा और मंडल उपाध्यक्ष पूजा रावत ने प्रशासनिक रवैये पर कड़ा एतराज जताया।​

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अपनी ही सरकार के प्रशासनिक अमले पर सवाल उठाते हुए महिला मोर्चा की नेताओं ने गंभीर आरोप लगाए

​”जब सड़क चौड़ीकरण की योजना का नियम यह है कि सड़क के मध्य बिंदु (Center Point) को चिन्हित कर दोनों दिशाओं में बराबर-बराबर जमीन अधिग्रहित की जाए, तो फिर एक तरफ ही बने मकानों को निशाना क्यों बनाया गया? यह कार्रवाई पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण और संदेहास्पद है।”
​नेताओं ने प्रशासन से इस कार्रवाई को तुरंत रोकने और पूरे मामले में पारदर्शिता व निष्पक्षता बरतने की मांग की। भाजपा नेताओं के खुद विरोध में उतरने से इस पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है और क्षेत्र में राजनीतिक पारा गरमा गया है।

​हाईकोर्ट का रुख और जिला प्रशासन का तर्क

​विवाद बढ़ने के बाद जिला प्रशासन ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए पूरी कार्रवाई को कानून के दायरे में बताया है।​मुआवजे का दावा, प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित भवन स्वामियों को काफी समय पहले ही नियमानुसार नोटिस जारी कर दिए गए थे। इसके साथ ही कई भवन स्वामियों को उचित मुआवजे की प्रक्रिया से भी जोड़ा जा चुका है।

​हाईकोर्ट का स्टे हटते ही एक्शन

प्रशासन के मुताबिक, कुछ स्थानीय लोग इस कार्रवाई के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट की शरण में गए थे, जिसके चलते कुछ समय के लिए ध्वस्तीकरण रोक दिया गया था। अब हाईकोर्ट से स्पष्ट निर्देश मिलने और कानूनी अड़चनें दूर होने के बाद ही यह कार्रवाई पुनः शुरू की गई है।

​समय कम, चुनौतियां ज्यादा

​नवंबर महीने में होने वाली 14 कोसी परिक्रमा में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के अयोध्या पहुंचने की संभावना है। श्रद्धालुओं को सुगम और सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन के ऊपर चौड़ीकरण कार्य जल्द से जल्द पूरा करने का दबाव है।
​लेकिन एक तरफ परिक्रमा मार्ग को समय पर पूरा करने की जल्दी और दूसरी तरफ स्थानीय निवासियों का दर्द व अपनी ही पार्टी की महिला मोर्चा के नेताओं का कड़ा रुख—इन दोनों के बीच जिला प्रशासन अब भारी धर्मसंकट में फंस गया है।

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