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बड़ी ख़बर: बहू बेगम मकबरा सम्पत्ति का अधिकार शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड से छिना

वक्फ बहू बेगम मकबरा के रिसीवर बने डीएम

नवनियुक्त रिसीवर ने शुरू की कमेटी गठन की प्रक्रिया

अयोध्या। उत्तर प्रदेश वक्फ न्यायाधिकरण ने प्रिंस एजाज बहादुर बनाम स्टेट आॅफ यूपी आदि मुकदमा में एक बड़ा फैंसला लेते हुए वक्फ बहू बेगम मकबरा का रिसीवर अयोध्या के जिलाधिकारी को बना दिया है। कोर्ट के निर्णय के बाद वक्फ कमिश्नर शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड और मुतवल्ली का कद बौना हो गया है। कोर्ट के आदेश पर नवनियुक्त रिसीवर ने कमेटी गठित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
अवध के तीसरे नवाब शुजाउद्दौला के वारिस प्रिंस एजाज बहादुर ने वाद संख्या 270 /2016 के तहत मुकदमा दायर कर वक्फ बहू बेगम मकबरा की सम्पत्तियों पर अपना मालिकाना हक का दावा किया था। मुकदमा सिविल न्यायालय फैजाबाद में दायर किया गया था। सिविल न्यायालय ने इस वाद को उत्तर प्रदेश वक्फ न्यायाधिकरण लखनऊ को स्थानांत्रित कर दिया था।
वादी प्रिंस एजाज बहादुर का कहना है कि नवाब शुजाउद्दौला की बेगम अमतुल जोहरा उर्फ बहू बेगम ने सन् 1813 में नवाब की सम्भी सम्पत्तियों को ट्रस्ट कर दिया था। अंग्रेजी शासन के दौरान ट्रस्ट की सारी व्यवस्था कमिश्नर देखा करते थे इसके लिए उन्हें प्रतिमाह 50 रूपये मेहनताना भी मिलता था। देश आजाद होने के बाद व्यवस्था में बदलाव कर यह दायित्व कलेक्टर को सौंप दिया गया।

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प्रिंस एजाज बहादुर बताते हैं कि वक्फ बहू बेगम मकबरा की सम्पत्ति कभी भी शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड की नहीं रही है। उत्तर प्रदेश में तत्कालीन मुलायम सिंह यादव सरकार के दौरान सन् 2004 में फर्जी तरीके से शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड को व्यवस्था में शामिल करते हुए मुतवल्ली नियुक्त कर दिया गया। पहले मुतवल्ली तबील अब्बास को बनाया गया। बसपा सरकार के दौरान गुलरेज आब्दी और भाजपा सरकार आने पर अशफाक हुसैन जिया मुतवल्ली बनाये गये। जिया ने मुतवल्ली का दायित्व सम्भालने के बाद फर्जी तरीके से बहू बेगम वक्फ सम्पत्ति को खुर्द बुर्द करना शुरू कर दिया। 41 लोगों को वक्फ भूमि पर बस दिया गया। यही नहीं मोती महल में प्लाटिंग कर उसे बेंचा जाने लगा। इसी दौरान मोती महल परिसर में जिला प्रशासन की मिलीभगत से सुल्तानपुर के एक मौलाना के माध्यम से मस्जिद का निर्माण शुरू करा दिया गया। मस्जिद निर्माण के लिए ईरान से 250 रियाल की पहली ग्रांड भी प्राप्त कर ली गयी परन्तु मामला जब उछला तो ईरानी संस्थान ने ग्रांड की अगली किस्त देने से मना कर दिया और जिला प्रशासन ने मस्जिद का निर्माण रूकवाया ही नहीं वरन निर्माणकर्ता व मुतवल्ली के विरूद्ध मुकदमा भी कायम करवा दिया।
इस सम्बंध में समाजवादी जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अशोक श्रीवास्तव का कहना है कि वक्फ ट्रिव्यूनल कोर्ट के चेयरमैन व सदस्य ने 14 मार्च 2019 को जो निर्णय सुनाया वह ऐतिहासिक था। उनका कहना है कि ब्रिटिश इंडिया के शासनकाल में जो व्यवस्था थी उसे पुनः कोर्ट ने लागू करते हुए अयोध्या के जिलाधिकारी को केयर टेकर नियुक्त कर दिया है। केयर टेकर नियुक्त हो जाने के बाद किसी अन्य की दखलनदाजी अब सम्भव नहीं रही। उन्होंने यह भी कहा कि कोर्ट ने अपने आदेश मे स्पष्ट कर दिया है कि मुतवल्ली अशफाक हुसैन जिया के विरूद्ध आईपीसी की धारा 376 के तहत मुकदमा कायम हुआ और उन्हें गिरफ्तार कर जेल भी भेजा गया ऐसे व्यक्ति को किसी भी महत्वपूर्ण दायित्व को सौंपा नहीं जा सकता।

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नवाब के वारिस ने नवनियुक्त रिसीवर को सौंपी कोर्ट आदेश की प्रति

नवाब शुजाउद्दौला के प्रिंस एजाज

अयेाध्या। नवाब शुजाउद्दौला के वारिस प्रिंस एजाज ने बताया कि अपने अधिवक्ता के साथ वह शनिवार को अयोध्या के जिलाधिकारी अनुज कुमार झा से मिले और वक्फ क्रिमिनल कोर्ट के आदेश की प्रति उन्हें सौंपी। जिलाधिकारी ने कोर्ट के आदेशानुसार बहू बेगम वक्फ सम्पत्ति की देखभाल करने के लिए कमेटी गठित करने का आदेश भी दे दिया है। उन्होंने बताया कि जिन लोगों को अनाधिकृत तरीके से मुतवल्ली द्वारा बसाया गया है उनके खिलाफ शीघ्र ही नामजद कार्यवाही शुरू हो जायेगी। उन्होंने यह भी बताया कि दिलकुशा महल (अफीम कोठी) को बेंचने की साजिश नारकोटिक्स विभाग रच रहा है इस सम्बन्ध में भी शीघ्र फैजाबाद के सिविल कोर्ट में मुकदमा दायर कर दिया जायेगा।

 

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