मध्यस्थता पैनल का निर्माण मात्र राम मंदिर केस को उलझाना: मनीष

1949 में गोपाल सिंह विशारद थे हिंदू महासभा फैजाबाद के जनरल सेक्रेटरी

अयोध्या। सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता पैनल मात्र इसलिए गठित किया है जिससे राम मंदिर केस को और उलझाया जा सके समय को टाला जा सके 1949 में हिंदू महासभा की तत्कालीन जनरल सेक्रेट्री गोपाल सिंह विशारद की पूर्व से डाली गई याचिका का हिंदू महासभा पूर्ण रूप से समर्थन करती है उक्त बातें हिंदू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अधिवक्ता मनीष पान्डेय ने कही है श्री पांडेय ने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट का कोई भी जज राम मंदिर बाद में फैसला करने के विचार में है ही नहीं इसीलिए वह बार-बार मध्यस्था की बातें करता है श्री पांडेय ने आगे कहा कि इतिहास गवाह रहा है जब जब सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्था की बातें की है तब-तब मध्यस्था वार्ताएं फेल सिद्ध हुई है सुप्रीम कोर्ट ने अपने इतिहास से सबक न लेते हुए जिस तरह राम जन्मभूमि बाद में मदरस्ता पैनल का गठन किया वह कई शंकाओं को जन्म देता है जो सुप्रीम कोर्ट के विरुद्ध ही जाती है ऐसा प्रतीत होता है कि सुप्रीम कोर्ट किसी बाहरी दबाव में कार्य कर रही है आओ वह बाहरी दबाव नहीं चाहती कि संपूर्ण अधिकृत क्षेत्र पर भव्य राम मंदिर का निर्माण हो जिस तरह सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत साक्ष और सबूतों को दरकिनार किया जा रहा है उससे यह स्पष्ट दृष्टिगोचर हो रहा है कि सुप्रीम कोर्ट मैं मामले की सुनवाई कर रहे जज इस मामले को पूरी तरह उलझा कर सिर्फ अपना कार्यकाल पूरा होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं हिंदू महासभा उक्त मध्यस्थता पैनल की औचित्य पर सवाल खड़ा करते हुए सुप्रीम कोर्ट से इसे तत्काल प्रभाव से समाप्त कर सिर्फ हिंदू पक्ष की ओर से सौंपे गए साक्ष्य और सबूतों के आधार पर भव्य राम मंदिर के पक्ष में फैसला देने की मांग करेगी।

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