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अबूधाबी में फंसे भारतीय को विवेक तिवारी ने सकुशल पहुंचाया घर

-नौकरी दिलाने के नाम पर एजेंट ने सुल्तानपुर के अंकित से ले लिया था 90 हजार रूपया

अयोध्या। दुबई (अबूधाबी) में रहने वाले अयोध्या निवासी सामाजिक कार्यकर्ता अंतर्राष्ट्रीय अवधी परिवार के संयोजक विवेक तिवारी और उनकी टीम ने हर भारतीय जो देश से बाहर रहता है उसकी हर संभव मदद करते रहते हैं। ताजा मामला उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के रहने वाले अंकित जो बी फामा्र किए हुए है बेरोज़गारी और पारिवारिक जिम्मेदारी की वजह से अबूधाबी में नौकरी दिलाने के नाम पर ने एक एजेंट ने 90 हज़ार रुपया लिया और मेडिकल क्षेत्र में नौकरी दिलाने का भरोसा देकर एक साल पहले अबूधाबी भेजा यहां पहुचने पर एक फैक्ट्री में मजदूरी का काम दिया गया, केवल 800 दिरहम महीने की नौकरी उसमे वीजा के नाम पर 500 दिरहम का हर महीने काट रहे थे, रहने के लिए छोटे से रूम में 6 लोग एक साथ रहने को मजबूर. अंकित ने जब घर जाने की छुट्टी मांगी और अपनी पूरी तनख्वा मागी तो नौकरी से बर्खास्त करके ट्रैवल बैन्ड कर दिया ,

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सारा समान लेकर 3 दिनों तक इधर-उधर भटकते रहे फिर इन्डिया से विवेक तिवारी का नंबर लेकर इनसे संपर्क किया वो अंकित को अपने घर ले आए अपने साथ रखा.भारतीय दूतावास की मदद से पासपोर्ट दिलाकर, यात्रा बैन हटाकर टिकट कराकर सकुशल घर भिजवा दिया। अंकित और उनकी माँ पूरा परिवार और उनके रिश्तेदार आलिंद इस नेक कार्य के लिए विवेक तिवारी को धन्यवाद दिया। विवेक तिवारी ने सभी हिंदुस्तानियों से अनुरोध किया किसी भी एजेंट के चक्कर मे ना आए टूरिस्ट वीजा पर नौकरी दिलाने वालों, झूठे सपनों को दिखाकर आपके उम्मीदे को मार देगे ये मानवता के दुश्मन लोग,

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बेहतर है घर पर ही कोई स्वरोजगार या नौकरी करे जब तक अच्छी नौकरी विदेश मे ना मिले। हर देश का नियम कानून अलग अलग है इस लिए जहां भी जाय उस देश के कानून का पालन करे। विदेश मे रहने वाले हर भारतीय के सुख दुख में हम साथ है कोई भी अपने आप को अकेला अनुभव ना करें चाहे जिस क्षेत्र जाति धर्म का हो हमारी एक ही जाति है हम सब हिन्दुस्तानी हैं हिन्दुस्तानी जो विदेश मे है उसके हर परेशानी में मैं और मेरी पूरी टीम हमेशा साथ है. विवेक तिवारी ने बिहार समाज के संस्थापक दिवाकर प्रसाद ,तमिलनाडु के शिवां समेत भारतीय दूतावास के समस्त कर्माचारियों और शुभचिंतकों का आभार व्यक्त किया जिसने एक बार फिर पूरी मदद की किसी रोती हुई माँ के चेहरे पर मुस्कान वापस लाने के लिए।

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