प्रतिमाओं के निर्माण में प्रकृति के अनुकूल सामग्रियों व रंगों का हो प्रयोग

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दुर्गापूजा समिति पदाधिकारियों ने बन रही मूर्तियों का किया निरीक्षण

फैजाबाद। केन्द्रीय दुर्गापूजा एवं रामलीला समन्वय समिति साकेत के पदाधिकारियों की एक टीम ने आज नगर में भ्रमण करके जिन स्थानों पर माँ दुर्गा की मूर्तियां बन रही है उनका निरीक्षण किया एवं मूर्तिकारों को निर्देशित किया कि प्रतिमाओं के निर्माण में प्रकृति के अनुकूल सामग्रियों व रंगों का ही प्रयोग किया जाय। प्रवक्ता डाॅ0 शैलेन्द्र विक्रम सिंह ने बताया कि अध्यक्ष मनोज जायसवाल एवं पदाधिकारियोें ने मूर्तिकारों को निर्देशित किया कि मूर्तियों में ऐसी सामग्रियों का प्रयोग न किया जाय जिससे विसर्जन के पश्चात् जल प्रदूषित हो और मछलियां एवं कछुयें आदि समस्त जलचर अस्वस्थ हो जाये। बल्कि मूर्ति निर्माण में पर्यावरण के अनुकूल सामग्रियों जैसे फिटकरी, नीम के बीज, नारियल के छिलके, शुद्ध मिट्टी (क्ले), चाक पाउडर, खड़िया मिट्टी एवं पेपर आदि का प्रयोग किया जाय क्योंकि फिटकरी और नीम जल को शुद्ध करते है तथा खड़िया मिट्टी एवं चाक पाउडर चूने से बनते हैं यह भी जल को शुद्ध करते हैं। पेपर का इस्तेमाल करने से यह फायदा होगा कि पेपर पेड़ों से बनते है ये सभी प्रकृति के अनुकूल है और जल में जल्दी घुलनशील हैं। प्लास्टर आॅफ पेरिस जल में न तो जल्दी घुलता है और यह उस जगह की आक्सीजन को भी खत्म कर देता है इसलिए प्लास्टर आॅफ पेरिस की जगह क्ले मिट्टी का प्रयोग करने का निर्देश दिया गया। माता जी के वस्त्रों में केवल सूती वस्त्रों का ही प्रयोग किया जाय एवं मूर्तियों को रंगने में प्राकृतिक रंगों वाटर कलर का ही प्रयोग किया जाय। समिति के पदाधिकारियों में प्रमुख रूप से प्रेमनाथ राय, जे0एन0 चतुर्वेदी, गगन जायसवाल, सुप्रीत कपूर, राजेश गौड़, बजरंगी साहू, अखिलेश पाठक, रोहिताश्वचन्द्र राजू एवं सुनील मौर्या आदि मौजूद रहे।

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