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मिलावट स्वास्थ्य पर असर डाल कर सकती है होली का रंग फीका: डा. उपेन्द्र

सेवा भारती की पहल : रंग संग मतदान से चटख हुआ राष्ट्रप्रेम का रंग

अयोध्या । इसबार देश मे लोकतंत्र का पर्व चुनाव, सामाजिक समरसता, प्रेम, हर्षोल्लास , प्रकृति के नव श्रृंगार ,मौसम परिवर्तन के साथ सनातन नववर्ष के आगमन का सन्देश लेकर आयी सनातन सांस्कृतिक पर्व होली देशप्रेम के रंगों में मिलकर खास हो गयी है।उत्सवों के उल्लास में स्वस्थ व्यक्ति समाज व राष्ट्रनिर्माण का रंग और चटख हो इसलिए सेवा भारती अयोध्या महानगर की टीम ने सेवा बस्ती में बच्चों के साथ रँग सँग मतदान अभियान के तहत बच्चों को अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए प्राकृतिक रंगो से होली और परिवारी जनों को शत प्रतिशत मतदान में भागीदार बन राष्ट्र पर्व मनाने का संदेश दिया।इस अवसर पर होम्योपैथी महासंघ के महासचिव डॉ उपेन्द्र मणि त्रिपाठी ने मिलावटी पकवान और रंगों से बचने की सलाह दी, इसका व्यक्ति व समाज दोनों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ता है। डॉ त्रिपाठी ने बताया सूखे गुलाल तथा गीले रंगों में माईका, लैड जैसे रसायनिक पदार्थ पाए जाते हैं । इनके कारण त्वघ्चा पर खुजली हो सकती है या एलर्जी के कारण त्वचा पर लाल-लाल दाने निकल आते हैं या फिर त्वचा पर रैशेज पड़ जाते हैं, कभी कभी तो त्वचा पर घाव हो सकते हैं, या उनमें संक्रमण हो सकता है। जिसे नजरअंदाज करने से एलर्जी बढ़ कर त्वचा कैंसर का रूप भी ले सकती है।
डा उपेन्द्र मणि के अनुसार त्योहारों में असुरक्षित , गरिष्ठ, खान पान से पाचन से सम्बंधित समस्याएं जैसे कब्ज, अपच, गैस,उल्टी, दस्त ,या अन्य लक्षण जैसे छींक, जुकाम, जकड़न, बुखार आदि भी हो सकते हैं।
होली खेलने से पहले सावधानी बरतने की सलाह देते हुए डा त्रिपाठी ने बताया शरीर के खुले अंगों , सिर एवं बालों पर भी शुद्ध नारियल तेल या मोश्चराईजर अथवा बालों में कंडीशनर एवं नाखूनों पर नेल वार्निश लगा सकते हैं। होली के बाद रंग छुड़ाने का तरीका बताते हुए डा त्रिपाठी ने कहा कि होली खेलने के बाद त्वचा तथा बालों पर जमें रंगों को हटाने के लिए चेहरे को साफ जल से धोएं । रंगो को छूड़ाने के लिए आधा कप ठण्डे दूध में तिल, जैतून, सूर्यमुखी या कोई भी वनस्पति तेल मिला कर घरेलू क्लीनजर बना सकते हैं ।इससे सूती साफ कपड़े से त्वचा को साफ कर सकते हैं।
तिल के तेल की मालिश से सूर्य की किरणों से हुए नुकसान की भरपाई में मदद मिलती है। त्वचा में खुजली होने पर एक लीटर पानी में दो चम्मच सिरका मिलाकर त्वचा पर हल्के से लगाएं जिससे खुजली खत्म हो जाएगी । यदि इसके बाद भी त्वचा में खुजली जारी रहे तो चिकत्सक से सम्पर्क करें।
होली के अगले दिन दो चम्मच शहद को आधा कप दही में मिलाकर थोड़ी सी हल्दी में मिलाए तथा इस मिश्रण को चेहरे, बाजू तथा सभी खुले अंगों पर लगा लें। इसे 20 मिनट लगा रहने दें तथा बाद में साफ ताजे पानी से धो डालें। इससे त्वचा से कालापन हट जाएगा तथा त्वचा मुलायम हो जाएगी। एक चम्मच शुद्ध नारियल तेल में एक चम्मच अरण्डी का तेल मिलाकर इसे गर्म करके अपने बालों पर लगा लीजिए। एक तौलिए को गर्म पानी में भीगों कर पानी को निचोड दीजिए तथा तौलिए को सिर पर लपेट लीजिए। फिर बाद में साफ जल से धो लें।
एलर्जी और इससे बचने के उपायों पर चर्चा करते हुए डा उपेन्द्र ने कहा एलर्जी अपने वातावरण-पर्यावरण के प्रति मनुष्घ्य की संवेदनशीलता की अभिव्घ्यक्ति है। साधारण भाषा में कह सकते हैं कि शरीर द्वारा किसी पदार्थ को नापसंद करने की अभिव्घ्यक्ति को ही एलर्जी कहते हैं। हमारे वातारण में विद्यमान किसी भी वस्घ्तु, पदार्थ, खाद्य -अंडे, कई प्रकार के नट्स बादाम, अखरोट, काजू, दूध, सोयाबीन, अनाज या दूध अथवा दूध से बनी वस्घ्तुएं यानी आइसक्रीम, बिस्घ्कुट, मिठाई आदि ,पेय , मिलावटी रंग, पराग, धुल आदि से संवेदनशील आदमी को कभी भी एलर्जी हो सकती है।
डा त्रिपाठी ने इनसे बचाव के लिए उस चीज या पदार्थ से बचने की सलाह देते हैं जिससे आपको एलर्जी है। मिलावटी अबीर गुलाल , अधिक गाढ़े रंगो से परहेज करें। अधिक पानी के प्रयोग से बचना चाहिये। अधिक अनावश्यक खान पान से बचें। इस अवसर पर बच्चों को फल व उपहार वितरित किया गये।आयोजन में हौसिला प्रसाद त्रिपाठी, डॉ प्रेमचन्द्र , डॉ आभा सिंह, दुर्गा प्रसाद, डॉ सौरभ दीक्षित,कलावती मिश्र, अनिता दुबे, अनिल अग्रवाल , टी बी सिंह आदि उपस्थित रहे।

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