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स्वच्छता माइन्डसेट का विषय : जितेन्द्र बहादुर

“राष्ट्रीय स्वच्छता कार्यक्रम में सरकारीव गैर सरकारी संस्थाओं की भूमिका” विषयक राष्ट्रीय गोष्ठी सम्पन्न

संगोष्ठी में विचार व्यक्त करते अमृत वाटलर्स के कार्यकारी प्रबन्धक जितेन्द्र बहादुर सिंह

अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के समाज कार्य एवं जनस्वास्थ्य विभाग द्वारा संत कबीर सभागार में राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन दिवस पर ”राष्ट्रीय स्वच्छता कार्यक्रम में सरकारी/गैर सरकारी संस्थाओं एवं स्वयंसेवी संगठनों की भूमिका” विषय पर संगोष्ठी के समापन का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में मुख्य अतिथि अमृत वाटलर्स के कार्यकारी प्रबन्धक जितेन्द्र बहादुर सिंह ने कहा कि विदेशों में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है। स्वच्छता माइन्डसेट का विषय है यदि प्रत्येक व्यक्ति स्वच्छता पर ध्यान देगा तो पूरा देश स्वच्छ बनेगा। स्वच्छता हमारे समाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सदैव रहा है परन्तु वर्तमान परिदृश्य में बदलाव से हम काफी पिछड़ गये है।

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स्वच्छता जीवन शैली का एक महत्वपूर्ण विषय : प्रो. मनोज दीक्षित

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो0 मनोज दीक्षित ने कहा कि स्वच्छता जीवन शैली का एक महत्वपूर्ण विषय है। देश के निर्माण में सामाजिक एवं राजनैतिक और आर्थिक संगठनों का योगदान होता है। वर्तमान समय में सामाजिक संगठनों पर राजनैतिक संगठन भारी पड़ रहे है। महत्वपूर्ण विषय यह है कि कोई राजनैतिक व्यवस्था ज्ञान नही दे सकती, ज्ञान प्राप्ति सामाजिक व्यवस्था से ही सम्भव है। प्रो0 दीक्षित ने बताया कि यह विन्दु स्वच्छता के संदर्भ में भी लागू होता है। वर्तमान परिदृश्य में सामाजिक मूल्यों के कमी से ही स्वच्छता की चुनौतियां बढ़ रही है। स्वच्छता हो या गंदगी ये सामूहिक जिम्मेदारी है कई देशों में पेनाल्टी का प्राविधान है। भारत में भी नियम, परिनियम है परन्तु उनका अनुपालन समुचित न होने से समस्या उत्पन्न होती है। प्रो0 दीक्षित ने बताया कि स्वच्छता के लिए वी0आई0पी0 कल्चर भी जिम्मेदार है। किसी कार्य को शैक्षिक संस्थायें नही कर सकती तो उसे पूरी दुनियां में कोई नही कर सकता। शैक्षिक संस्थान ही शोध व नवाचार को उत्पन्न करते है। किसी भी अभियान की सफलता में शैक्षिक संस्थाओं की अहम भूमिका होती है। कुलपति ने बताया कि ेआज जरूरत है कि दक्ष लोगों का सम्मान किया जाये तभी हम अभियान को सफल बना पायेंगे। अयोध्या को स्वच्छ व सुन्दर व सुन्दर बनाने के लिए प्रतिभागियों एवं छात्र-छात्राओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे स्वच्छता का संदेश जन-जन तक पहुॅचाये।
विशिष्ट अतिथि एडिशनल कमिशनर नगर निगम अयोध्या के डॉ0 सचिदानन्द ने कहा कि वर्तमान में स्वच्छता एक ज्वलंत विषय है। स्वच्छता को प्रायः सतही तौर पर लिया जाता है जबकि इस पर गहन मंथन की जरूरत है। वैश्विक स्तर पर स्वच्छता के मामले में हमारी स्थिति दयनीय है। स्वच्छता मात्र एक संस्था एवं संगठन का दायित्व नहीं है अपितु समग्र सामाज का दायित्व है। प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के पहल से स्थिति में पहल आया है। आज नगरों में स्वच्छता को लेकर प्रतिस्पर्धा हो रही है। हमें संकल्पित होना है कि स्वच्छता अल्पकालिक न होकर दीर्घकालिक हो। प्रतिभागियों एवं छात्र-छात्राओं को आह्वान करते हुए एडिशनल कमिशनर कहा कि बदलाव के लिए चेंज एजेंट बनकर समाज में अपनी भूमिका का निर्वहन करें। स्वच्छता प्रतिनिधि के रूप में आये विजय गोयल ने बायोटायलेट को भविष्य का बिकल्प बताया। समापन सत्र के पहले तृतीय तकनीकी सत्र का आयोजन किया गया। डॉ0 अश्वनी कुमार सिंह ने अध्यक्षता की। डॉ0 रूपेश सिंह एवं डॉ0 राशिकृष्ण सिन्हा रिसोर्स पर्सन रहे। सत्र के दौरान दो दर्जन से ज्यादा शोध-पत्र पढ़े गये। पूरी संगोष्ठी के दौरान 60 शोधार्थियों ने शोध-पत्रों की प्रस्तुति की। 2 सौ से ज्यादा प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
संगोष्ठी के आयोजन सचिव डॉ0 राजेश सिंह कुशवाहा ने राष्ट्रीय संगोष्ठी की रिपोटियर प्रस्तुत की। संचालन माइक्रोबायोलॉजी विभाग एवं संगोष्ठी के कोषाध्यक्ष डॉ0 शैलैन्द्र कुमार ने किया। धन्यवाद ज्ञापन संयोजक डॉ0 विनय कुमार मिश्र द्वारा किया गया। इस अवसर पर डॉ0 अश्वनी कुमार सिंह, डॉ0 रूपेश सिंह, डॉ0 राशिकृष्ण सिन्हा, डॉ0 दिनेश कुमार सिंह, डॉ0 महेन्द्र सिंह, डॉ0 अनुराग पाण्डेय, डॉ0 बृजेश यादव, डॉ0 त्रिलोकी यादव, डॉ0 प्रज्ञा पाण्डेय, डॉ0 अनिल विश्वा, डॉ0 बृजेश भारद्धाज, के0के0 मिश्र सहित अन्य शिक्षकों, प्रतिभागियों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

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