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बेटे ने ही सुपारी दे कराया बाप का कत्ल

  • पिता को मारने के लिए दी थी 50 हजार रूपये की सुपारी

  • तीन हत्यारोपी गिरफ्तार, एक फरार

अयोध्या। छोटे भाई की बहू पर पिता की मेहरबानी का खामियाजा पिता को जान देकर भुगतना पड़ा। मामला बीकापुर कोतवाली क्षेत्र के ग्राम भरहू खाता चौरेबाजार का है। जहां पुत्र और पोते ने ही पिता को मारने की योजना बना डाली और 50 हजार रूपये की सुपारी देकर उस समय मौत के घाट उतरवा दिया जब खेत में लगे नलकूप के कमरे में पिता सो रहा था।
पुलिस लाइन सभागार मे पुलिस अधीक्षक ग्रामीण संजय कुमार ने हत्याकाण्ड का खुलासा करते हुए बताया कि अभियुक्तों से पूंछताछ के बाद पता चला कि नरेन्द्र प्रसाद तिवारी पिता विजय बहादुर से इसलिए नाराज था कि वह छोटे भाई राजमणि तिवारी की पत्नी प्रीति तिवारी को चौरे बाजार की बाग और जमीन बेंचकर उसके नाम एक बीघा जमीन खरीद दिया था तथा भूमि विक्रम से मिला धन भी प्रीति तिवारी के हवाले कर दिया था। इसी बात से नाराज नरेन्द्र प्रसाद तिवारी व उसके पुत्र शिवम तिवारी निवासीगण ग्राम भरहू खाता ने विजय बहादुर तिवारी को मौत के घाट उतरवा देने का निर्णय कर लिया। इस काम के लिए अपने मित्र विजय यादव पुत्र राम कुमार निवासी ग्राम कुटियावां रामपुर जोहन को पूरी बात बताया तो वह विजय बहादुर को मौत के घाट उतरवा देने के लिए तैयार हुए। इस काम के लिए 50 हजार रूपया विजय यादव को दिया गया। विजय यादव ने अपने साथी विक्रम यादव पुत्र स्व. हौसिला प्रसाद यादव निवासी ग्राम खेतपलिया जोहन को भी तैयार कर लिया। आरोपियों ने पुलिस को यह भी बताया कि 24 नवम्बर की रात्रि जब विजय बहादुर तिवारी ट्यूबेल पर सो रहे थे तो चारो वहां पहुंचे, शिवम तिवारी ने आवाज देकर बाबा से दरवाजा खुलवाया, क्योंकि रात्रि में विजय बहादुर तभी दरवाजा खोलते थे जब घर का कोई सदस्य उन्हें पुकारता था। जैसे ही ट्यूबेल का दरवाजा खुला विजय यादव ने विजय बहादुर तिवारी के सिर में लोहे का राड घोप दिया और मुंह पर राड से प्रहार कर मौत के घाट उतार दिया। मृतक का पोता शिवम तिवारी गेट पर खड़ा होकर निगरानी का कार्य कर रहा था। विक्रम यादव ने विजय बहादुर को पीछे से पकड़ रखा था जिसके कारण वह विरोध नहीं कर पाये। इसके बाद शव को वहीं पर छोड़कर सबलोग चले गये। सुबह पता चला कि विजय बहादुर तिवारी ट्यूबेल में मृत पड़े हुए हैं। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया और हत्यारोपियों को पकड़ने के लिए जाल बिछा दिया। पुलिस को जब यह पता चला कि विजय बहादुर तिवारी की हत्या उसके बड़े पुत्र नरेन्द्र प्रसाद तिवारी उर्फ मुन्ना व उसके बेटे शिवम तिवारी ने करवाया था तो इन लोगों को हिरासत में लेकर कड़ी पूंछतांछ शुरू की गयी दोनों ने हत्या में शामिल विजय यादव, व विक्रम यादव का नाम भी उगल दिया। पुलिस ने बिना देरी किये विजय यादव को धर दबोचा परन्तु विक्रम यादव हाथ नहीं आया। एसपीआरए ने बताया कि विक्रम यादव का अपराधिक इतिहास रहा है और वह किसी अन्य मामले में सुल्तापुर में गिरफ्तार किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि विजय यादव की जब जामा तलाशी ली गयी तो उसकी जेब से सुपारी के 960 रूपये बरामद हुए। विजय यादव ने बताया कि विक्रम यादव ने 44 हजार रूपया खुद रख लिया था तथा उसे 6 हजार रूपया ही दिया था जिसमें से 960 रूपया ही बचा है। विजय यादव की निशानदेही पर ग्राम पहली उपाध्याय का पुरवा मजरे सेंधू तारा के आशाराम के खेत के बगल सड़क के किनारे झाड़ी से आला कत्ल लोहे का राड बरामद कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि अभियुक्त विजय यादव एक दैनिक अखबार में पहले मोतीगंज बाजार से लिखा करता था परन्तु वह वहां से हटा दिया गया है। अब वह केडी न्यूज यूट्यूब चैनल पर कार्य कर रहा था। पुलिस ने कोतवाली बीकापुर में मु.अ.सं. 504/18 आईपीसी की धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज कर तीनो हत्यारोपियों को जेल भेज दिया। हत्यारोपियों को गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम को एसएसपी ने 25 हजार रूपये नकद पुरस्कार देने की घोषणा किया है।

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