-ब्रेन रूपी हार्डवेयर का माइंड है सॉफ्टवेयर, मनोविकार का होता है नींद पर दुष्प्रभाव

अयोध्या। ब्रेन है सुपर-कम्प्यूटर तथा माइंड है अल्ट्रासेंसिटिव- सॉफ्टवेयर। ब्रेन के तीन प्रमुख हिस्से होते हैं, जिनमे पहला प्रीफ्रंटल- कार्टेक्स है जिसे डिसीजन-मेकर कहा जाता है। दूसरा एमिग्डाला जिसे थ्रेट-डिटेक्टर यानि खतरे को सूंघने वाला तथा तीसरा हिप्पोकैंपस यानि ब्रेन-लाइब्रेरी कहलाता है जिसमे अच्छी-बुरी सारी स्मृतियाँ संग्रहीत होती है।
इन्ही तीनो की सॉफ्ट- प्रोग्रामिंग बिगड़ने पर एंग्जाइटी-डिसऑर्डर,मूड- डिसऑर्डर व साइकोसिस तथा मनोशारीरिक समस्याएं उत्पन्न होती हैं। दो तिहाई मनोरोगों की शुरुवात युवा अवस्था मे होती है पर जागरूकता, संकोच व वर्जना के कारण नब्बे फीसदी से लोग वैज्ञानिक इलाज से वंचित रहते हैं। नींद ब्रेन-बैटरी चार्जर तथा स्ट्रेस-रिमूवर का कार्य करती है।
मनोतनाव बढ़ने पर स्ट्रेस हार्मोन कार्टिसाल घबराहट,चिड़चिड़ापन,क्रोध,ओवर थिंकिंग,नशे की तलब, अनिद्रा, नशाखोरी, पेट की गड़बड़ी व हृदय पर दबाव के लक्षण भी दिखते हैं। मूड स्टेबलाइज़र हार्मोन सेरोटोनिन, रिवॉर्ड हार्मोन डोपामिन,साइकिक पेन रिलीवर हार्मोन एंडोर्फिन व लव हार्मोन ऑक्सीटोसिन के समुचित संचार वाली गतिविधियों जैसे एक्सरसाइज, संगीत, हंसी ठहाका, प्राकृतिक-विचरण, सामाजीकरण व मेडिटेशन व पर्याप्त नींद से ब्रेन-सॉफ्टवेयर रिफ्रेश होता है।
राजकीय बृजकिशोर होम्योपैथिक महाविद्यालय में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 10 अक्टूबर पूर्व संध्या कार्यशाला में यह जानकारी जिला चिकित्सालय के मनोपरामर्शदाता डा आलोक मनदर्शन नें दी। प्राचार्य डा आशीष सिंह के निर्देशन तथा डा तुलिका जैन व डा करुणा आनंद के संयोजन में आयोजित सत्र में फैकल्टी व स्टूडेंट्स ने प्रतिभाग किया।