-श्रीलंका, दक्षिण अफ्रीका और लाओ पीडीआर के कलाकारों ने रामलीला के जरिए दिखाई अपनी सांस्कृतिक विरासत

अयोध्या,। रामनगरी अयोध्या में दीपोत्सव-2026 की सांस्कृतिक संध्या ने रामायण की वैश्विक सांस्कृतिक विरासत के विविध रंग बिखेरे। रामकथा पार्क में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में देश के अलग-अलग राज्यों के साथ श्रीलंका, दक्षिण अफ्रीका और लाओ पीडीआर के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कहीं रामलीला के मंचन से रामकथा जीवंत हुई तो कहीं लोकनृत्य, संगीत और शास्त्रीय कला के जरिए भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों को प्रस्तुत किया गया।
सांस्कृतिक संध्या में असम के गुवाहाटी की कीर्तन फाउंडेशन ने ‘रघुनन्दना’ और ‘राम विजय’ की प्रस्तुति दी। जम्मू-कश्मीर के ब्रज कला केंद्र के कलाकारों ने डोगरी भाषा में रामलीला का मंचन किया। वहीं केरल के कलामंडलम लीलाम्मा मेमोरियल कल्चरल ट्रस्ट ने ‘रामायण-सांस्कृतिक यात्रा’ के माध्यम से अपनी कला और परंपरा की झलक पेश की। इन प्रस्तुतियों में अलग-अलग क्षेत्रों की सांस्कृतिक विशेषताओं के साथ रामायण के प्रसंगों का सुंदर संगम देखने को मिला।
उत्तराखंड के विनीत बिष्ट और श्री लक्ष्मी भंडार की ओर से पारंपरिक रामलीला का मंचन किया गया। बंगाल के बंशी नाथ ढकुआ ने भी रामलीला की प्रस्तुति दी। इसके साथ ही श्रीलंका, दक्षिण अफ्रीका और लाओ पीडीआर से आए कलाकारों के दलों ने रामलीला के जरिए अपने देशों में प्रचलित रामायण की सांस्कृतिक परंपराओं को मंच पर उतारा। विदेशी कलाकारों की प्रस्तुतियों ने यह दिखाया कि रामकथा अलग-अलग देशों और समाजों की सांस्कृतिक पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।
कार्यक्रम में लखनऊ के भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय की ओर से कथक पर आधारित रामायण प्रस्तुति दी गई। कलाकारों ने कथक की पारंपरिक भाव-भंगिमाओं और नृत्य शैली के जरिए रामायण के प्रसंगों को जीवंत किया। शास्त्रीय नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत रामकथा ने सांस्कृतिक संध्या में भारतीय कला परंपरा का विशिष्ट रंग जोड़ा।
रामकथा पार्क में हुई इस सांस्कृतिक संध्या ने दीपोत्सव को अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक स्वरूप प्रदान किया। असम से केरल, जम्मू-कश्मीर से बंगाल और उत्तराखंड से लेकर विदेशों तक की प्रस्तुतियों ने रामायण की व्यापक सांस्कृतिक पहुंच को रेखांकित किया। कार्यक्रम में विभिन्न भाषाओं, लोककलाओं और नाट्य शैलियों के जरिए एक ही रामकथा के अनेक रूप देखने को मिले।