चार माह के भीतर आयेगा राम मन्दिर प्रकरण का अदालती फैंसला: कोकजे

10 दिवसीय शिक्षा वर्ग प्रशिक्षण शिविर में भाग लेने पहुंचे हैं विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु सदाशिव कोकजे

अयोध्या-फैजाबाद। अयोध्या में राम मंदिर बाबरी मस्जिद मामले को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है . गुरुवार को विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु सदाशिव कोकजे राम नगरी अयोध्या पहुंचे ,जहां उन्होंने कारसेवकपुरम परिसर में चल रहे 10 दिवसीय शिक्षा वर्ग प्रशिक्षण शिविर में भाग लेने से पूर्व पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि मैं पहले भी कह चुका हूं 4 महीने के अंदर राम मंदिर मामले पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आ जाएगा, 4 महीने का इंतजार हमें करना पड़ेगा ,निर्णय आने के बाद सब कुछ तय हो जाएगा कि हमें आगे क्या करना है . श्री कोकजे ने कहा मेरा कहना है कि न्यायालय में उस जमीन के विवाद का निराकरण होना है उसके निराकरण होने से पहले हम वहां कुछ नहीं कर सकते और ना ही सरकार इस विषय में कोई कदम उठा सकती है , इसलिए हम सभी को न्यायालय के फैसले का इंतजार है फैसला आने के बाद हम तय करेंगे कि आगे क्या करना हैं।
विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु सदाशिव कोकजे ने कहा कि 90 फीसदी इस केस को हम जीत चुके हैं ,अब बस केस का फैसला आना बाकी है ,इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पहले ही सिद्ध कर दिया है कि उस जमीन के नीचे मंदिर था . वह राम जन्मभूमि है आस्था का केंद्र है हिंदुओं की कोर्ट ने सब बातें मंजूर की हैं बस उस जमीन को तीन टुकड़ों में बांट दिया . उसी का निराकरण करना है और यह 4 महीने के अंदर ही हो जाएगा . कोर्ट खुलते ही इस मुकदमे की सुनवाई शुरू हो जाएगी और 4 महीने के अंदर ही इसका फैसला भी आ जाएगा , हमें उम्मीद है कि सितंबर के अंत तक अयोध्या में इस मामले का निराकरण हो जाएगा . वही अयोध्या एक्ट के सवाल पर श्री कोकजे ने कहा कि कई बार ऐसे मामले भी सामने आए हैं कि सरकार ने राष्ट्र हित में न्यायालय के फैसले पर पुनर्विचार कर उसमें परिवर्तन किए हैं, अयोध्या एक्ट का जहां तक सवाल है तो फैसला आने दीजिए फैसला आने के बाद उस एक्ट पर भी विचार किया जाएगा, लेकिन अभी हमने कोर्ट के फैसले का इंतजार है पहले कोर्ट का फैसला आ जाए फिर इन सब बातों पर विचार करेंगे . वही एक सवाल के जवाब में विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु सदाशिव कोकजे ने कहा कि यदि फैसला हमारे पक्ष में नहीं आता तो हम फैसला पढेंगे, अगर फैसले में यह लिखा होगा कि इसका हल कोर्ट नहीं कर सकती या उसके स्थान पर केंद्र सरकार या संसद कर सकती है तो हम वहां भी दबाव डालेंगे .लेकिन जब तक फैसला ना आ जाए हम उसे ना देख ले तब तक कुछ भी कहना उचित नहीं है , जो भी परिस्थिति बनेगी हमारा सामूहिक नेतृत्व है हम देश के संतों से बात करेंगे पूरे देश के हिंदू समाज से बात करेंगे उसके बाद आगे की योजना तय करेंगे

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