अयोध्या में एरोमा उद्योग की काफी संभावनायें: प्रो. मनोज दीक्षित

    “पूर्वी उत्तर प्रदेश में एरोमा उद्योग की संभावनाओं“ पर हुई कार्यशाला

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    फैजाबाद। डाॅ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के संत कबीर सभागार में “पूर्वी उत्तर प्रदेश में एरोमा उद्योग की संभावनाओं“ पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में सुगंध एवं सरस विकास केन्द्र, कनौज के निदेशक डाॅ. शक्ति विनय शुक्ला, हर्टीकल्चर एवं खाद्य संस्करण, लखनऊ के निदेशक डाॅ0 राघवेन्द्र प्रताप सिंह, सीमैप के वरिष्ठ वैज्ञानिक डाॅ0 सुदान सिंह, पूर्व अध्यक्ष इशेंसियल आॅयल एसोसिएशन आॅफ इण्डिया के शेलेन्द्र जैन एवं वित्तीय सलाहकार एस0पी0 दीक्षित रहे। कार्यशाला की अध्यक्षता कुलपति प्रो0 मनोज दीक्षित ने किया।
    कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो0 मनोज दीक्षित ने कहा कि धार्मिक राजधानी होने के नाते अयोध्या में एरोमा उद्योग की काफी संभावनायें है क्योंकि मठ मंदिरों में बहुतायत मात्रा में इत्र, फूलों एवं अगरबत्ती की खपत होती है। इसका पूरा निर्यात कनौज व अन्य स्थानों से किया जाता है ऐसी स्थिति में इस क्षेत्र के किसानों को फूलों की खेती करने एवं इत्र एवं अगरबत्ती निर्माण हेतु संयत्रों की स्थापना का प्रशिक्षण दिया जाये तो एक तरफ उनकी आर्थिक तौर पर समृद्धि होगी और दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर बाजार विकसित होंगे। प्रो0 दीक्षित ने बताया कि सुगंध एवं सरस विकास केन्द्र द्वारा विश्वविद्यालय परिसर में इत्र उत्पादन हेतु एक संयत्र की स्थापना की जायेगी और आवश्यकता के अनुरूप इसकी मार्केटिंग की जायेगी। इसी क्रम में हनुमानगढ़ी, कनक भवन, नागेश्वरनाथ जैसे प्रमुख मंदिरों से उत्पाद खरीदने हेतु एम0ओ0यू0 किया जा रहा है। इत्र निर्माण के साथ-साथ मंदिरों में अर्पित किये जा रहे फूलों का उत्पादन स्थानीय स्तर पर होने से रोजगार के क्षेत्र में वृद्धि होगी। कार्यशाला के आमंत्रित व्याख्यानों में निदेशक डाॅ0 शक्ति विनय शुक्ला ने इस क्षेत्र में इत्र उद्योग संभावनाओं पर प्रकाश डाला और सरयू नदी के किनारे फूलों की खेती करने तथा उसका व्यावसायिक सद्उपयोग कर आर्थिक लाभ उठाने का सुझाव दिया। सीमैप के वरिष्ठ वैज्ञानिक डाॅ0 सुदान सिंह ने कहा कि इस क्षेत्र में कार्य करने से किसानों को सीधे तौर पर लाभ होगा और स्थानीय बाजार में उनके उत्पाद का अच्छा मूल्य मिलेगा। निदेशक डाॅ0 राघवेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि यह उद्योग कम लागत पर अच्छा मुनाफा प्रदान करने वाला क्षेत्र है। कम प्रशिक्षण से अधिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है। इस कार्यशाला को पूर्व अध्यक्ष इशेंसियल आॅयल एसोसिएशन आॅफ इण्डिया के शेलेन्द्र जैन एवं वित्तीय सलाहकार एस0पी0 दीक्षित ने एरोमा उद्योग के बेहतर भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। कार्यशाला के उपरांत वृक्षारोपण कार्यक्रम अभियान में प्रमुख भूमिका निभाने वाले कर्मचारियों एवं छात्र-छात्राओं को प्रमाण-पत्र दिया गया। कार्यशाला का संचालन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो0 जसवंत सिंह ने किया। इस अवसर पर प्रो0 के0 के0 वर्मा, प्रो0 हिमांशु शेखर सिंह, प्रो0 राजीव गौड़, डाॅ0 आर0के0 सिंह, डाॅ0 एस0एस0 मिश्रा, डाॅ0 विनोद चैधरी, डाॅ0 वन्दिता पाण्डेय, डाॅ0 अनुराग पाण्डेय, इं0 आर0के0 सिंह, इं0 विनीत सिंह, इं0 परितोष, इं0 रमेश मिश्रा, इं0 आशुतोष, डाॅ0 संजीत पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओं की उपस्थिति रही।