वन सम्पदाओं को हर हाल में पोषित व संरक्षित करने की आवश्यकता: मनोज मिश्र

 विश्व पर्यावरण दिवस पर प्लास्टिक प्रदूषण को रोकें विषय पर हुई संगोष्ठी

फैजाबाद। डाॅ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के संत कबीर सभागार में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर ‘प्लास्टिक प्रदूषण को रोकेे’ विषय पर एक संगोष्ठी आयोजित की गई। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि मण्डलायुक्त मनोज मिश्र, विशिष्ट अतिथि डी0एफ0ओ0 डाॅ0 रवि कुमार सिंह थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 मनोज दीक्षित ने की।
स्ंागोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि मंडलायुक्त मनोज मिश्र ने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस के इस अवसर पर प्रकृति के इन वरदान स्वरूप वन संपदाओं को हर हाल में पोषित एवं संरक्षित करने की आवश्यकता है। वृक्ष हमारे लिए जीवनदायी आक्सीजन के साथ-साथ खाद्य श्रंखला प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। यह जीवन से जुड़ा सीधा कार्यक्रम है। हमारे धर्म ग्रंथों में भी प्रकृति से एक आध्यात्मिक जुड़ाव पाया जाता है क्यांेकि पूर्वजों का जीवनयापन मूलतः वन सम्पदाओं पर ही निर्भर हुआ करता था। उन्होंने कहा कि प्रकृति सभी की आवश्यकताओं को पूर्ण करने में सक्षम है परन्तु उसका अत्यधिक दोहन घातक भी सिद्ध हो रहा है आवश्यकता के अनुसार ही जल का प्रयोग करे क्योंकि जल ही जीवन है इसे बचायें रखना हम सभी का कर्तव्य है। विशिष्ट अतिथि डी0एफ0ओ0 डाॅ0 रवि कुमार सिंह ने कहा कि मानव सभ्यता को बचाने के लिए वृक्षारोपण को एक मिशन के तौर पर अपनाना होगा तभी हम स्वच्छ वातावरण के परिवेश का निर्माण कर सकेंगे। दुनियां में बढ़ रहे सिंगल प्लास्टिक के उपयोग के कारण एक नई चुनौती का सामना प्रकृति को करना पड़ रहा है। बढ़तें प्लास्टिक के प्रयोग से कैंसर जैसी घातक बीमारी से आम जनमानस प्रभावित हो रहा है। प्लास्टिक पर नियंत्रण हेतु विश्व समुदाय ने भारत को नोडल की भूमिका का निर्वहन करने की जिम्मेदारी सौपी है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो0 मनोज दीक्षित ने कहा कि भारत में बढ़ रहे प्लास्टिक प्रयोग आने वाली पीढ़ी के लिए घातक सिद्ध होंगे। प्लास्टिक पर निर्भरता हमें कम से कम करनी होगी क्योंकि यह पर्यावरण को पूरी तरह से संक्रमित कर रहा है। प्रो0 दीक्षित ने कहा कि यदि जल संरक्षण पर जन चेतना जागरूक नही हुई तो शीघ्र ही जल श्रोत समाप्त होने लगेंगे। इसी मुहिम के तहत विश्वविद्यालय परिसर में 21 हजार पौधों को रोपित किया जा चुका है। प्रो0 दीक्षित ने कहा कि जुलाई माह तक 1 लाख से अधिक वृक्षारोपण कराये जाने का लक्ष्य है ताकि विश्वविद्यालय परिसर को वन सम्पदा से आच्छादित किया जा सके। परिसर का क्लीन और ग्रीन करने की मुहिम के तहत पोलिथिन का प्रयोग पूर्णतया प्रतिबन्धित किया गया है। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के कुलसचिव डाॅ0 विनोद कुमार सिंह ने आम जनमानस से अपील की कि प्रकृति के संरक्षण हेतु सभी की भागीदारी आवश्यक है। इस अवसर वृक्षारोपण मुहिम से संबंधित पुस्तिका का विमोचन मंडलायुक्त एवं कुलपति द्वारा किया गया। आये हुए अतिथियों को स्मृति चिन्ह, बैम्बो स्ट्रिप एवं चंदन वृक्ष देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन पर्यावरण विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो0 जसवंत सिंह ने किया। इस अवसर पर प्रो0 एम0पी0 सिंह, प्रो0 एस0एन0 शुक्ला, प्रो0 के0 के0 वर्मा, प्रो0 हिमांशु शेखर सिंह, प्रो0 राजीव गौड़, डाॅ0 आर0के0 सिंह, डाॅ0 एस0एस0 मिश्रा, डाॅ0 विनोद श्रीवास्तव, कार्य परिषद सदस्य ओम प्रकाश सिंह, डाॅ0 सिद्धार्थ शुक्ला, डाॅ0 विनोद चैधरी, डाॅ0 नरेश चैधरी, डाॅ0 श्रीश अस्थाना, डाॅ0 अनिल यादव, डाॅ0 शैलेन्द्र वर्मा, डाॅ0 विजयेन्दु चतुर्वेदी, डाॅ0 राज नारायण पाण्डेय, डाॅ0 मुकेश वर्मा, डाॅ0 वन्दिता पाण्डेय, डाॅ0 अनुराग पाण्डेय, डाॅ0 विनय मिश्र सहित बड़ी संख्या में शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओं की उपस्थिति रही।

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