ग्रामीण ऐतिहासिक धरोहरों को चिन्हित कर विकसित करने की है आवश्यकता

चार दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का हुआ शुभारम्भ

फैजाबाद। डाॅ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय में  चार दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारम्भ किया गया। संगोष्ठी के उद्धाटन सत्र में अपने सम्बोधन में कुलपति प्रो0 मनोज दीक्षित ने सभी आगुन्तकों का अयोध्या-फैजाबाद की नगरी में स्वागत करते हुए कहा कि यह हम सभी का सौभाग्य है कि एशियन कल्चरल लैण्ड स्केप ऐशोसियेशन के सौजन्य से भारत में पहली बार आयोजित होने वाली अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी की मेजबानी का अवसर प्राप्त हुआ। उन्होनें कहा कि हमारे देश में पर्यटन की असीम सम्भावनाएं हैं। पर्यटन से जुडी हुई समूचे ग्रामीण क्षेत्रों के ऐतिहासिक धरोहरों को चिन्हित कर उन्हें विकसित करने की आवश्यकता है। विविधता से भरे हमारे पर्यटन स्थल समृद्व साॅस्कृतिक विरासत देश विदेश के पर्यटकों के लिए प्रबल आर्कषण का केन्द्र हैं। पर्यटन विकास के माध्यम से हम बडी सॅख्या में रोजगार के अवसर सृजित कर सकते हैं। ऐसे अनेक देश हैं जिनकी अर्थव्यवस्था पर्यटन पर ही आधारित है। अन्त में प्रो0 दीक्षित ने कहा कि इस संगोष्ठी में होने वाले विचार विर्मश से अयोध्या तीर्थ को विश्व की विरासत में सम्मिलित किए जाने वाले तथ्यो पर तर्कपूर्ण परिणाम सामने आयेगें।
एशियन कल्चरल लैण्ड स्केप ऐशोसियेशन के अध्यक्ष प्रो0 राना पी0बी0 सिंह ने ऐशोसियेशन की तरफ से आये हुए सभी अतिथियों का स्वागत किया और इस ऐशोसियेशन की स्थापना एवं उदे्श्य के बारे मे विस्तार से बताया। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो0 आर0 बी0 सिंह ने अपने उद्बोधन में पर्यटन को पर्यवरण एवं स्वच्छता से जोडते हुए ईको पर्यटन के बारे में विस्तार से बताया। उन्होने नेद नदियों पहाडों पेड पौधों एवं प्रकिृत को पर्यटन से जोडते हुए अपना शोधपत्र प्रस्तुत किया जिसमें उन्होनें ईकों पर्यटन, ऐतिहासिक पर्यटन, साॅस्कृतिक पर्यटन एवं प्राकृतिक पर्यटन के बारे में विस्तार से अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया।
दिल्ली हेरिटेज मैनेजमेंट सॅस्थान के निदेशक प्रो0 मक्खखन लाल ने अपने सम्बोधन में कहा कि हमें अपनी साॅस्कृतिक विरासत को हमेशा याद रखना चाहिए अगर हम आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं तो हम उसकी क्षतिपूर्ति किसी न किसी माध्यम से कर लेते हैं। परन्तु अगर हम अपनी साॅस्कृतिक विरासत को भूलजाते हैं तो उसकी क्षतिपूर्ति कभी नही हो सकती। उन्होनें कहा कि हमें अपनी सभ्यता एवं सॅस्कृति को बचाने के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए। हम पर्यटन को तभी बढा सकते हैं जब हम अपनी सभ्यता और संस्कृति प्रति सजग रहेंगे।
संगोष्ठी के मुख्य अतिथि एशियन कल्चरल लैण्ड स्केप ऐशोसियेशन के सॅस्थापक अध्यक्ष कोरिया से आये हुए प्रो0 सुंग क्यून किम ने कहा कि हमें अपनी प्राकिृतिक धरोहरों को विकसित कर पर्यटन के माध्यम से जनमानस तक पहॅुचाना होगा तथा धरोहरों के परिदृश्य को सुन्दरता के लोगों के सामने प्रस्तुत करना होगा, जिससे लोंगों का प्राकृतिक धरोहरों का आकृषण बढेगा। उन्होनें कोरिया के एक छोटे से प्रान्त पूंग-सू के अनेकांे प्राकृतिक स्थलों को स्लाइड के माध्यम से विस्तार दिखाते हुए समझाया कि इन सभी छोटे-छोटे स्थलों को प्राकृतिक पर्यटन के रूप में विकसित किया गया है जिन्हें पहले कोई नही जानता था। उन्होंने बौद्व सर्किट को विकसित करने की पुरजोर वकालत करते हुए अपना शोधपत्र समाप्त किया।
कार्यक्रम का संचालन प्रो0 फारूख जमाल ने किया तथा कार्यक्रम में शोधपत्र पढने वाले प्रो0 अनीता आरिफ इण्डोनेशिया, प्रो0 अनीता सिन्हा अमेरिका, डाॅ0 न्योमैन वर्दी इटली, प्रो0 मैटियो डेरियों इटली, प्रो0 पालियो, प्रो0 बाला कृण्णन, प्रो0 देवाशाष नायक, प्रो0 गीतान्जली, प्रो0 ज्योति रोहिल्ला, प्रो0 एस0 के0 गर्ग, प्रो0 राजीव गौण, प्रो0 आर0 के0 तिवारी, प्रो0 आशुतोष सिन्हा, प्रो0 एस0 एस0 मिश्रा, प्रो0 विनोद श्रीवास्तव, प्रो0 नीलम पाठक, डाॅ0 प्रदीप खरे, डाॅ0 शैलेन्द्र कुमार, डाॅ शैलेन्द्र वर्मा, डाॅ0 संग्राम सिंह, डाॅ0 राना रोहित सिंह, डाॅ0 तुहिना वर्मा, डाॅ0 राजेश सिंह, डाॅ0 संजय चैधरी, डाॅ0 दिवाकर त्रिपाठी, डाॅ0 देव नारायण वर्मा, डाॅ0 राजकुमार सिंह, डाॅ विनोद चैधरी, डाॅ नीलम यादव, डाॅ0 अनिल कुमार, डाॅ सिन्धु सिंह, ई0 विनीत सिंह, संजीत पाण्डेय, पियूष राय, रमेश मिश्रा आदि शिक्षक के साथ विश्वविद्यालय के कर्मचारी एवं छात्र/छात्रांए उपस्थित थे।

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