नोटा से हारे प्रत्याशी का 6 वर्ष तक चुनाव न लड़ने का बने कानून

संतो ने चौपाल लगा पारित किया प्रस्ताव

अयोध्या। संतो ने श्रीराम बल्लभाकुंज जानकीघाट पर मतदाता जागरूकता चौपाल आयोजित किया जिसमें नोटा से हारे प्रत्याशी का 6 वर्ष तक चुनाव न लड़ने का कानून बनाने की मांग सरकार से की गयी। चौपाल का आयोजन एडीआर यूपी इलेक्टशन वॉच द्वारा किया गयां
एडीआर यूपी इलेक्शन वॉच के प्रदेश समन्वयक अनिल शर्मा ने चौपाल में कहा कि 24 साल के संघर्ष के बाद चुनाव आयोग ने वर्ष 2014 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नोटा का अधिकार तो मतदाताओं को दे दिया है परन्तु विधायिका में नोटा के पक्ष में कोई कानूनी अधिकार नहीं दिया गया है। मतदाता यदि नोटा को जिताते हैं तो हारे हुए सभी प्रत्याशियों को 6 वर्ष तक चुनाव न लड़ने का कानून बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकारी बजट के अभाव में वर्ष 2005 में सरकारी नौकरी में नियुक्ति पाने वालों को पेंशन न देने का कानून बनाया गया। बिडम्बना यह है कि लाखों सरकारी कर्मचारियों व अधिकारियों को 30 से 35 वर्ष तक नौकरी करने के बाद भी पेंशन नहीं मिलेगी जबकि सांसद और विधायक आज चुनाव जीतें कल पद की शपथ ग्रहण करें तो यदि परसों संसद और विधान सभा भंग होती है तो भी आजीवन पेंशन मिलती रहेगी। इस राय का संतो ने हाथ उठाकर स्वागत किया और कहा कि नैतिका के आधार पर सांसद और विधायकों की भी पेंशन बन्द होनी चाहिए। मतदाता जागरूकता सम्मेलन में सांसद व विधायक निधियों के लिए जिला व विधान सभा में निगरानी समिति बनाने और आगामी लोकसभा चुनाव में अयोध्या क्षेत्र की दो प्रमुख समस्याओं का मांग पत्र बनाने और प्रत्याशियों को देकर उनसे लिखित आश्वासन लेने का निर्णय लिया गया। इस अवसर पर संत भोला दास, राजेश शास्त्री, संत गंगा सागर महाराज, एडीआर के जिला संयोजक प्रदीप श्रीवास्तव, नित्यानन्द त्रिपाठी, राघवेन्द्र तिवारी, कुलदीप मिश्रा, शंकर शुक्ला, अंकित मिश्रा, राम वचन पाण्डेय, दीपेश शुक्ला आदि ने भी विचार व्यक्त किये। मतदाता जागरूकता चौपाल का संचालन राजेश शास्त्री ने किया।

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