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ऑन लाइन गैम्बलिंग बढ़ा रही दीवालिया मनोरोगी : डॉ. आलोक मनदर्शन

-कम्पलसिव गैंबलिंग है मनोरोग जुआखोरी का

ब्यूरो। जुआखोरी एक मनोरोग है जिसे कम्पल्सिव गैम्बलिंग तथा इस लत से ग्रसित लोगो को कम्पल्सिव गैम्बलर कहा जाता है । ऐसे लोग जुआ खेलने के नये नये तरीके व मौके खोजते रहते है ।क्रिकेट मैच ,त्योहार विशेष या अन्य मुद्दों विशेष पर यह लत इस कदर हावी हो जाती है कि वे लगातार अपनी नींद व भूख त्यागकर सट्टेबाज़ी या जुआ खेलने में जुट जाते हैं। जुआखोरों में नशाखोरी ,अवसाद, उन्माद, हिंसा, मारपीट तथा परघाती या आत्मघाती प्रवृत्ति भी होती है। ऑनलाइन गैंबलिंग या डिजिटल गैंबलिंग तो जंगल की आग की तरह किशोर व युवाओं को मनोरोगी व दीवालियापन की तरफ ले जा रही है। यह बातें जिला चिकित्सालय में आयोजित जुआखोरी मनोरोग विषयक कार्यशाला में डॉ आलोक मनदर्शन द्वारा दी गयी।

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👉मनोगतिकीय विश्लेषणः-

जिला चिकित्सालय के किशोर व युवा मनोपरामर्शदाता डा0आलोक मनदर्शन के अनुसार कम्पल्सिव गैम्बलिंग से ग्रसित लोगों में जुआखोरी के प्रति मादक खिचाव पैदा बार बार होता है, भले ही कितनी भी आर्थिक हानि हो चुकी हो। इन लोगों के ब्रेन में डोपामिन नामक मनोरसायन की बाढ़ आ जाती है जिससे तीव्र मनोखिचाव पैदा होता है। इसलिये ऐसे लोगों को डोप हेड भी कहा जाता है। यह एक प्रोसेस अडिक्शन है और किसी अन्य नशे की लत की तरह इसकी भी मात्रा बढ़ती जाती है इसको एडिक्शन टॉलरेंस कहा जाता है।

👉उपचार व बचावः

कम्पल्सिव गैम्बलर को प्रायः यह पता नहीं होता कि वह एक मनोरोग का शिकार हो चुका है। उसको इस बात के लिए जागरूक किया जाना चाहिए तथा जुआखोरी की लत कर पूरी न हो पाने पर पैदा होने वाली बेचैनी से निपटने के लिये विड्राल बेहैबियर ट्रेनिंग काफी मददगार है। गैम्बलिंग ग्रुप से पर्याप्त दूरी बनाते हुये अन्य रचनात्मक कार्यों में खुद को व्यस्त रखे। पारिवारिक भावनात्मक सहयोग व सकारात्मक माहौल का भी बहुत योगदान होता है। काग्निटिव बिहैवियर थिरैपी व इम्पल्स कन्ट्रोल थिरैपी बहुत ही कारगर है। मोबाइल उपवास या डिजिटल फास्टिंग भी आवश्यक सलाह है।

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