चौपाल में विधायक ने अफसरों की लगाई क्लास

डिलेवरी में बख्शीश मांगने का गूंजा मुद्दा

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रूदौली-फैजाबाद। ग्राम स्वराज अभियान के तहत मवई ब्लॉक क्षेत्र के गनेशपुर में आयोजित ग्राम चैपाल में हिस्सेदारी करने आए ग्रामीणों के बैठने के लिए पर्याप्त कुर्सी की व्यवस्था न होने पर मुख्य अतिथि विधायक रामचंद्र यादव भड़क गये। उन्होंने अधिकारियों को खरी-खोटी सुनाई। लेखपाल की ओर से ग्रामीणों को चैपाल की सूचना न देने पर कड़ी नाराजगी जताई। बोले कि सरकारी बैठकों की सूचना मुनादी पिटवा कर दें। मठाधीशों को इसकी जानकारी देने वाली आदत अब कतई बर्दाश्त नहीं होगी। उन्होंने बीडीओ की क्लास लगाई। बोले कि ऐसे आधी-अधूरी तैयारी से चैपाल का क्या मतलब।
रविवार की शाम विधायक व तहसीलदार रामजनम यादव यहां चैपाल में पहुंचे तो ग्रामीणों ने जोरदार स्वागत किया। फिर मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलन कर विधायक ने चैपाल का शुभारंभ किया। इसके बाद बीडीओ मीना कुमारी को बिना प्रार्थना पत्र दिए गैरहाजिर विकास विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए संस्तुति करने के निर्देश दिए। साथ खाद्य एवं रसद, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य व पुलिस विभाग के गायब अफसरों पर भी रिपोर्ट तलब की। विधायक रामचंद्र यादव ने केंद्र व प्रदेश की जन कल्याणकारी योजनाओं का गुणगान करते हुए मोदी के बखान के पुल बांधे। महिलाओं को धुएं से राहत दिलाने वाला देश का पहला प्रधानमंत्री बताया। बोले कि यह कार्य पूर्व की सरकारों को काफी पहले कर देना चाहिए था। एक-एक करके लोगों ने अपनी बात रखी। जिसके निस्तारण के लिए विधायक ने सम्बंधित को निर्देशित किया। विधायक ने पूर्ति निरीक्षक लालमणि को हफ्तेभर में राशन कार्ड से वंचित रह गये परिवारों को शामिल करने की सख्त हिदायत दी। चैपाल में हिस्सेदारी करने आई आधी आबादी बोली कि सब बढ़िया चल रहा है बस पेंशन भी मिलती तो अच्छा रहता। उनका इशारा समाजवादी पेंशन की ओर था। इस मौके पर तहसीलदार रामजनम यादव, बीईओ अरुण वर्मा, बीडीओ मीना कुमारी, मवई एसओ नीरज कुमार राय, पूर्ति निरीक्षक लालमणि, अवनीश सिंह, मण्डल अध्यक्ष निर्मल शर्मा व प्रधान सिकंदर अली आदि मौजूद रहे।
गनेशपुर में चैपाल में अधिकांश ग्रामीणों ने मवई सीएचसी पर प्रसव कराने पर बख्शीश मांगने का मुद्दा उठाया। शेरबहादुर ने कहा कि बिना पैसे लिये एएनएम या नर्सें प्रसव को हाथ तक नहीं लगाती। गर्भवती महिलाओं व बच्चों के हक की पंजीरी बेच दी जाती है। वरासत के नाम पर लेखपाल द्वारा पैसे लिये जाते हैं।