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सरयू तट पर हिन्दू महासभा ने राम मंदिर निर्माण का लिया संकल्प

कहा-भव्य राम मन्दिर निर्माण से हिंदुओं को मिलेगी नई शक्ति

अयोध्या। भव्य राम मंदिर निर्माण होने से ना सिर्फ हिंदुओं को एक नई शक्ति ऊर्जा प्राप्त होगी बल्कि इससे हिंदू धर्म की ध्वजा संपूर्ण विश्व में एक बार फिर से प्रतिष्ठित होगी उक्त बातें हिंदू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अधिवक्ता मनीष पान्डेय ने सरयू तट पर आयोजित भव्य राम मंदिर निर्माण संकल्प सभा के उपरांत कही श्री पान्डेय ने आगे कहा की कार सेवा में बलिदान हुए कारसेवकों के परिवार अत्यंत दयनीय व बदहाल स्थिति में है जो राम के नाम पर सत्ता के शीर्ष तक पहुंचे वहीं इन कारसेवकों की बलिदान को भुला बैठे हैं श्री पान्डेय ने आगे कहा कि मोदी योगी पर इन परिवारों की बदहाल स्थिति को सुधारने का नैतिक दायित्व है प्रवक्ता मनीष पान्डेय ने केंद्र की मोदी सरकार व प्रदेश की योगी सरकार से यह मांग की है कि कारसेवकों के परिवारों को कम से कम 1 करोड रुपए का मुआवजा व नौकरी प्रदान की जाए इसके साथ ही साथ सिंघल व परमहंस की आदमकद प्रतिमा व कार सेवक बलिदान स्थल का निर्माण शीघ्र अतिशीघ्र भाजपा सरकार को करना चाहिए श्री पान्डेय ने सुलह समझौता करने वाले तत्वों को एक बार पुनः लताडते हुए कहा कि कुछ दलाल रूपी तत्व एक बार पुनः सुलह समझौता करवाने हेतु ढपोरशंखी राग अलाप रहे हैं वह नित नए-नए शगुफे छोड़ रहे हैं ऐसे तत्वों को अपने कुकृत्य ऊपर तत्काल रोक लगानी चाहिए अब वह समय आ गया है जब भव्य राम मंदिर निर्माण राम भक्तों के तप व बल से बन कर रहेगा हिंदू महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष महंत राम लोचन शरण शास्त्री राजन बाबा ने कहा कि 133 वर्षों के विवाद को अगर कोई सुलझा सकता है वह मोदी और योगी की सरकारें हैं अगर वह इस विवाद को सुलझाने में नाकाम सिद्ध होती हैं तो उन्हें सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं है हिंदू महासभा संत प्रकोष्ठ के नगर अध्यक्ष महंत ओमप्रकाश दास ने कहा कि भव्य राम मंदिर निर्माण मे जितनी देरी हो रही है व राष्ट्र के लिए हिंदू समाज के लिए बेहद घातक है राजनेताओं की कमजोर इच्छाशक्ति के अभाव में भव्य राम मंदिर निर्माण नहीं हो पा रहा है अतः संतों को खुद मंदिर निर्माण की पहल करनी चाहिए संकल्प लेने वाले प्रमुख लोगों ने हिंदू महासभा के जिला उपाध्यक्ष कुलदीप श्रीवास्तव चंद्रहास दीक्षित सुखदेव रिंकू तिवारी अयोध्या दास प्रमोद तिवारी वैदेही शरण तथा जानकीदास प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

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