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स्वस्थ मनोयुक्ति करती है परिवार जीवन कौशल में अभिवृद्धि :डॉ. आलोक

👉  युवा मनोजागरुकता से ही है परिवार प्रबन्धन कुशलता 

युवा वर्ग व नव दम्पत्तियों में आधुनिक गर्भरोधी उपायों के प्रति भावनात्मक जागरूकता  की कमी को दूर करना अत्यंत ही जरूरी है। इसी युवा मनोजड़त्व को तोड़ने तथा अभिमुखीकरण करने के उद्देश्य से राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय अयोध्या में एन एस एस वालंटियर्स को  भारत सरकार की फैमिली वेलफेयर संस्था सिफ्सा द्वारा ट्रेनिंग वर्कशॉप आयोजित हुई। युवा मनोपरामर्शदाता व वर्कशॉप के प्रमुख ट्रेनर डॉ आलोक मनदर्शन ने चिल्ड्रेन बाई चॉइस, नॉट बाई चान्स की संकल्पना पर जोर दिया । वर्कशॉप के उद्घाटन सत्र की शुरुवात मुख्य अतिथि लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ए एन सिंह ने की ।विश्वविद्यालय के पत्रिकारिता व जन संचार विभाग के डॉ विजयेन्दु् चतुर्वेदी विशिष्ट अतिथि रहे ।कार्यशाला का संयोजन समाज कार्य विभाग के डॉ दिनेश सिंह तथा अध्यक्षता डॉ विनय मिश्रा द्वारा किया गया ।कार्यशाला में डॉ पूजा सिंह व सिफ्सा स्टाफ सहित सैकड़ो एन एस एस स्वयंसेवी उपस्थित रहे।कार्यशाला समाप्ति से पूर्व पोस्ट वर्कशॉप टेस्ट में अव्वल स्थान पाने वाले स्वयंसेवकों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मनित किया गया जिसमें खुशबू द्विवेदी,दीपांशी निगम, प्रियंका सचदेवा,सविता सिंह, सौरभ श्रीवास्तव व प्रमोद पाण्डेय शामिल रहे ।

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👉क्या है स्वस्थ मनोयुक्ति : 

डॉ मनदर्शन ने बताया कि मनोयुक्तिया या मनोरक्षा युक्तियाँ वे मानसिक प्रक्रियाएं है जिनका प्रयोग हमारा अर्धचेतन मन विपरीत या चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से निपटने के लिए और त्वरित मनोशुकुन प्राप्त करने के लिए करता है।इसमे एक कैटेगरी तो सकरात्मक या स्वस्थ होती है,बाकी तीन केटेगरी रुग्ण या नकरात्मक होती है,जिसमें हम चुनौतियों से असहाय व निराश हो कर हमदर्दी के पात्र बनना पसंद करने लगते है और फिर जीवन भर हम इन्ही रुग्ण मनोयुक्तियों के चंगुल में फंस कर अपनी क्षमता का सम्यक उपयोग नही कर पाते है और असफल और नैराश्य भरा जीवन जीने लगते है।इन रुग्ण मनोरक्षा युक्तियों में इम्मेच्योर मनो रक्षा युक्ति, न्यूरोटिक मनोरक्षा युक्ति तथा सायकोटिक युक्ति शामिल है। जबकि सकरात्मक व स्वस्थ मनोरक्षा युक्ति मेच्योर युक्ति कहलाती है,इसमे मुख्य रूप से खुशमिज़ाजी,मानवीय संवेदना,सप्रेशन व सब्लीमेंशन आते है

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