सपोर्टिव कॉग्निटिव थेरेपी मासूम मनोआघात से निकलने में है कारगर : डॉ. आलोक 

फैजाबाद। मासूम यौन शोषण की घटनाये  सभ्य समाज को कौतुहल व हैरानी के मनोभाव से भर  देती है और मन में ये प्रश्न भी उठ उठता है कि आखिर कुछ लोग  ऐसा कृत्य क्यों करते हैं । मनदर्शन-मिशन व किशोर मित्र क्लीनिक के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित विशेष ” इन्नोसेंट सेक्सुअल एब्यूज ” विषय पर निदानात्मक शोध रिपोर्ट ने मासूम यौन शोषण करने वाले लोगों की इस रुग्ण मनोवृत्ति का खुलासा कर दिया है जिसे मनोविश्लेषण की भाषा में ‘पीडोफिलिया’ कहा जाता है और ऐसे कृत्य से आनंद की प्राप्ति करने वाले लोगो को‘पीडोफिलिक’ कहा जाता है |

डॉ. आलोक मनदर्शन
मनदर्शन हेल्पलाइन  व किशोर मित्र क्लीनिक के डाटा बेस में ऐसे बहुत से मासूमो ने गोपनीयता के आधार सेक्सुअल एब्यूज की घटना को प्रत्यक्ष या परोक्षरूप से स्वीकार किया और इन मासूमो में सेक्सुअली अब्यूज्ड ट्रॉमेटिक डिसऑर्डर के लक्षण भी पाये गये।इतना ही नही, एन एस पी सी सी के आंकङों के अनुसार सत्तर फीसदी से मासूम यौन शोषण करीबियों, दोस्तो व रिस्तेदारों द्वारा किये जाते हैं।

 मनोगतिकीय लक्षण :

जिला चिकित्सालय के किशोर मनोपरामर्शदाता डॉ. आलोक मनदर्शन के अनुसार सेक्सुअली अब्यूजड ट्रामैटिक डिसऑर्डर
 ऐसी मनोदशा होती है जिससे कि मासूम के न चाहते हुए भी भयाक्रांत व बेचैन कर देने वाली स्मृतियाँ उसके मन पर बार-बार इस तरह हावी हो जाती है कि वह चीखना-चिल्लाना, भागना व अनाप-शनाप बकना जैसी असामान्य हरकते कर सकता है तथा घटना के बारे में बात करते हुये मूर्छित भी हो सकता है |
इन मासूमो की नींद व भूख भी दुस्प्रभावित हो सकती है तथा सोते समय चौंक कर उठ सकते है तथा उनकी धड़कन व सांस तीव्र हो जाती है तथा मुंह सूखने लगता है |

बचाव व उपचार :

ऐसे मासूमो के परिजन व रिश्तेदार घटना विशेष के दौरान घटित बातों को बताने के लिए मरीज़ को हतोत्साहित करे तथा ऐसे दृश्यों व अन्य उत्प्रेरको से मरीज़ को दूर रखे जिससे उसके साथ घटी घटना की स्मृतियां पुनवर्धित हो | साथ ही मासूम का ध्यान मनोरंज़क व अन्य गतिविधियों में लगाने की कोशिस करे जिससे की उसका आवेशित मन धीरे-धीरे उदासीन हो सके | वर्चुअल एक्सपोजर थिरेपी, डीसेंसिटाईजेशन थिरेपी व मेंटल कैथार्सिस जैसी सपोर्टिव कॉग्निटिव थेरेपी ऐसे पीड़ित मासूमों के लिए बहुत ही कारगर है |
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