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वैज्ञानिक तरीके से ही करें खेती, तकनीकी जानकारी देगा कृषि विवि

 कृषि विवि में औषधीय एवं सगंध पौध में उद्यमिता पर कार्यशाला प्रारंभ

अयोध्या। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज के अंतर्गत् उद्यान एवं वानिकी महाविद्यालय द्वारा मिशन एकीकृत उद्यानिकी विकास योजना, सुपारी एवं मसाला, विकास निदेशालय द्वारा वित्त पोषित जिला स्तरीय सेमिनार औषधीय एवं सगंध पौधों में उद्यमिता विकास की संभावनाएं एवं चुनौतियां विषयक पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन विश्वविद्यालय के पशुपालन एवं पशु चिकित्सा महाविद्यालय के प्रेक्षागृह में बुधवार  से सेमिनार एवं किसानों को प्रशिक्षित किए जाने का कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।

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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ बिजेंद्र सिंह ने दीप प्रज्वलित एवं मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया।  सर्वप्रथम डॉ सिंह ने अपने उद्बोधन में सेमिनार/ प्रशिक्षण में भाग ले रहे समस्त किसानों का स्वागत करते हुए औषधीय एवं सगंध पौधों में उद्यमिता के विकास, संभावनाओं एवं चुनौतियों पर विस्तृत रूप से चर्चा करते हुए कहा कि यहां से प्रशिक्षण प्राप्त कर किसान भाई यदि इस क्षेत्र में कार्य करें तो जहां किसानों की औसत जोत निरंतर कम होती जा रही है, वहीं इसके लिए निष्प्रयोज भूमि जैसे खेत के मेड़ ,तालाब का बंधा या नाले के किनारे पर यदि किसान भाई इसकी खेती करते हैं तो अतिरिक्त लाभ अर्जित कर अपनी आमदनी दोगुनी कर सकते हैं। खेती वैज्ञानिक तरीके से ही करें, आवश्यकतानुसार विश्वविद्यालय द्वारा आपको समय-समय पर तकनीकी जानकारी एवं सुविधा प्रदान की जाएगी ।

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि द्वारा मसाला एवं सौगंध पौध में उद्यमिता विकास की संभावनाएं एवं चुनौतियां पर  परियोजना के मुख्य अन्वेषक डॉ मिश्रा द्वारा रचित पुस्तक का भी विमोचन किया गया।  इस अवसर पर उद्यान महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ ओ पी राव द्वारा मुख्य अतिथि एवं किसानों का स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए सेमिनार विषयक पर चर्चा की एवं मसाला एवं सगंध उत्पादों की बिक्री हेतु स्थानों की जानकारी एवं किसानों की समस्याओं के निराकरण के समाधान किए जाने की बात कही। साथ ही किसानों को छोटे-छोटे कुटीर उद्योग जैसे लोशन, क्रीम, जूस ,  अगरबत्ती इत्यादि बनाने का उद्योग स्थापित कर अपने आय में वृद्धि कर सकने की सलाह दी। परियोजना के मुख्य अन्वेषक द्वारा किसानों का पारंपरिक खेती के साथ-साथ मसाला एवं सगंध पौधों की जैविक खेती किए जाने हेतु प्रोत्साहित करते हुए विस्तृत जानकारी दी । प्रशिक्षण के प्रथम तकनीकी सत्र में सीएसआईआर (सीमैप) के अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक डॉ राकेश पांडे एवं डॉ रमेश कुमार श्रीवास्तव द्वारा उद्यमिता विकास की संभावनाएं एवं चुनौतियां पर विशेष रूप से चर्चा की गई एवं उनके द्वारा किसान भाइयों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का जवाब देकर संतुष्ट किया गया। कार्यक्रम के द्वितीय तकनीकी सत्र में विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ संजय पाठक द्वारा किसानों के लिए आय का उत्तम स्रोत, डॉ साधना सिंह ने मसाला व्यवसाय  से लाभ कमाने के गुण एवं डॉ संजय कुमार वर्मा द्वारा सिट्रोनेला से आय अर्जन करने के तरीकों से अवगत कराते हुए जानकारी दी।

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विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ अखिलेश कुमार सिंह ने बताया कि कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के समस्त अधिष्ठाता, कुलसचिव एवं वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक,कुलपति के सचिव,कर्मचारी एवं छात्र उपस्थित थे। कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं फैजाबाद, सुल्तानपुर,अमेठी एवं बाराबंकी के 115 किसानों का निःशुल्क पंजीकरण कर , संबंधित कार्यक्रम विषयक पर प्रकाशित पुस्तक आदि अभिलेखों का वितरण किया गया।  तकनीकी सत्र के उपरांत सायंकाल विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ चंद्र मोहन ओझा, टी पी सिंह एवं शेषमणि श्रीवास्तव द्वारा प्रशिक्षु किसानों को विश्वविद्यालय के कृषि प्रक्षेत्रों का भ्रमण कराया गया एवं तकनीकी जानकारी दी गई।

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