रासायनिक खाद के स्थान पर करें जैविक खाद का प्रयोग

बागवानी मिशन के तहत लगा किसान मेला, हुई संगोष्ठी

अयोध्या। अधीक्षक राजकीय उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग अयोध्या द्वारा एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजनान्तर्गत दो दिवसीय कृषि संगोष्ठी/मेला गांधी सभागार आयुक्त परिषद में आयोजित की गई। जिसके मुख्य अतिथि अयोध्या विधायक वेद प्रकाश गुप्ता थे। आयोजित कृषि संगोष्ठी/मेला 22 जून तक चलेगा। संगोष्ठी मेले में पशुपालन विभाग, खुशहाली कृषि केंद्र एवं उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा विभागीय प्रदर्शनी भी लगाई गई है। जिसमें कृषकों उनके खेती एवं बागवानी संबंधी पूर्ण जानकारी मिल सके और उनके समस्याओं का निराकरण किया जा सके।
कृषि संगोष्ठी के दौरान के कृषकों को बागवानी तथा खेती की देखरेख, अच्छी फसल के पैदावार हेतु जैविक खाद एवं बागवानी प्रबंधन के विषय में विस्तार से बताते हुए कहा कि खेतों में रासायनिक खाद के स्थान पर जैविक खाद का प्रयोग करें क्योंकि रसायनिक उर्वरकों के अनियमित व असंतुलित मात्रा में प्रयोग से मिट्टी की भौतिक दशा बराबर बिगड़ती जा रही है और उर्वरकों की मात्रा संस्तुत मात्रा से अधिक बढ़ाने पर भी पैदावार में आशातीत वृद्धि नहीं हो पा रही है। बराबर अधिक उपज देने वाली प्रजातियों के प्रचलन से यह समस्या अधिक गंभीर हो गई है। रसायनिक उर्वरकों के अधिक प्रयोग से मृदा प्रदूषण, जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण बढ़ रहा है जिसका सीधा प्रभाव हमारे स्वास्थ्य पर पड़ रहा है और आए दिन तरह-तरह की जानलेवा बीमारियां पैदा हो रही तथा आज सामान्य पैदावार लेना दुरूहकार्य है। हमारे पूर्वज खेती में कार्बनिक खाद का प्रयोग ज्यादा करते थे परंतु आधुनिक युग की कृषि में मशीनीकरण की अधिकता से लोग पशुपालन कम कर दिए है। जिसके परिणाम स्वरूप लोग अपने खेतों में कार्बनिक खाद का प्रयोग कर रहे हैं। कार्बनिक खाद से न केवल पोषक तत्वों की पूर्ति होती है बल्कि इनके प्रयोग से मिट्टी की भौतिक रासायनिक गुणों में वांछित सुधार भी होता है अतः केंचुए की खाद, नेपड कम्पोस्ट, हरी खाद, गोबर की खाद, खलीयों, कृषि अपशिष्ट खाद, जैविक खाद इत्यादि द्वारा तत्वों की पूर्ति को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। मृदा उर्वरता का संतुलन इस प्रकार बनाया जाए की फसल के भूख के अनुसार उन्हें आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध होते रहे और सब्जियों का वांछित उत्पादन भी प्राप्त होता रहे, ताकि जो सूक्ष्म तत्वों की कमी का अनुभव किया जा रहा है उसकी पूर्ति हो सके क्योंकि नाइट्रोजन, फास्फोरस व पोटाश की तरह अन्य आवश्यक एव सूक्ष्मतत्वों का प्रयोग अलग अलग करने में परेशानी होती है। जैविक खाद का प्रयोग करने के लिए कृषकों को जैविक खाद को बनाने की विधि को भी विस्तार से बताया गया इसी के साथ कृषकों को आम की सघन बागवानी एवं प्रबंधन, आम के बागों का जीर्णाेद्वार, अमरूद उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीकी, अमरूद की बागों का जीर्णोद्वार, केले की खेती, हल्दी की उन्नती खेती एवं प्रसंस्करण विधि, लहसुन की उन्नत, लहसुन बीज का उत्पादन, मिर्चा की वैज्ञानिक खेती, प्याज की व्यवसायिक खेती, ग्लैर्डयोलस की व्यवसायिक खेती, सब्जियों की कार्बनिक खेती, सब्जियों में एकीकृत पोषक तत्व का प्रबंधन, सब्जियों में एकीकृत कीट प्रबंधन तथा प्रमुख रोग और कीड़ो से बचाव आदि के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई। संगोष्ठी/मेले में केले की, आम की, टमाटर की तथा सब्जी की सबसे अच्छी खेती करने वाले कृषकों को अयोध्या के विधायक वेद प्रकाश गुप्ता द्वारा अंग वस्त्र एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

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