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शरीर मन और चेतना की एकरूपता है योग : डॉ उपेन्द्र मणि त्रिपठी

सेवा भारती,आरोग्य भारती व होम्योपैथी चिकित्सा विकास महासंघ ने कराया योग

अयोध्या। नौवें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर सेवा भारती, आरोग्य भारती व होम्योपैथी चिकित्सा विकास महासंघ ने अलग अलग जगहों पर योग कराया। सेवा भारती द्वारा सदर बाजार सेवा केंद्र पर प्रशिक्षु महिलाओं बच्चों के साथ योग किया जहां सचिव डॉ प्रेमचन्द्र पांडेय ने योग कराया।

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ट्रांसपोर्ट नगर में आरोग्य भारती व होम्योपैथी महासंघ द्वारा डॉ उपेन्द्र मणि त्रिपाठी के संयोजन में योग प्रोटोकाल के अनुसार योग कराया गया। इस अवसर पर डॉ उपेन्द्र मणि त्रिपाठी ने कहा मनुष्य के मन में लालसाएं वासनाएं होती है उनकी पूर्ति न होने पर मन क्षुब्ध होता है, मन के क्षुब्ध होने से प्राण और क्षुब्धप्राण के नाड़ी तन्त्र में प्रवाहित होने से स्नायु मण्डल अव्यवस्थित हो जाता है और शरीर में कुजीर्णत्व अजीर्णत्व होता है इसी कारण कालान्तर में शरीर में खराबी आ जाती है इसे ही व्याधि कहते है। योग द्वारा शरीर मन और चेतना तीनों में सन्तुलन स्थापित होता है।

और इस प्रकार किसी असाध्य रोग से ग्रस्त हैं और उसका इलाज किसी पद्धति से करवा रहे हैं तो योग शरीर मन और चेतना में एकरूपता ला कर जीवन में ऊर्जा के संचार को नियंत्रित कर मानसिक और शारीरिक रूप से शीघ्र स्वास्थ्य लाभ में सहायक सिद्ध होता है और आप दुगुनी तीव्रता से ठीक हो सकते हैं। इस अवसर पर प्रो डॉ ज्ञानेंद्र मणि त्रिपाठी, डॉ प्रेमचन्द्र पांडेय, विजयशंकर पांडेय, शिशिर मिश्र, हरिश्चंद्र शर्मा, शिव प्रसाद पांडेय, सौरभ त्रिपाठी, धीरेन्द्र मणि त्रिपाठी, समृद्धि त्रिपाठी, ईशानवी, परी , आदि लोग उपस्थित रहे।

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