ज़ुल्म के खिलाफ बराबरी के लिए निकाला “वुमनिया मार्च”

महिलाओं ने थाली बजाकर अपने हक़ और अधिकार के लिए संघर्ष करने को कसी कमर

अयोध्या। महिलाओं ने ज़ुल्म के खिलाफ, बराबरी के लिए “वुमनिया मार्च” निकाला। इस दौरान महिलाओं ने  समान भागीदारी, उत्तम शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य, समान रोज़गार के अवसर, एवं आधी आबादी की सुरक्षा के नारे लगाए साथ ही महिलाओं ने थाली बजाकर अपने हक़ और अधिकार के लिए संघर्ष करने को कमर कसी है। महिला अधिकार के मुद्दों पर जागरूकता एवं विभिन्न मांगो के साथ अपने आप मे एक अनूठा ‘ वुमनिया मार्च (Womaniya March) ‘ निकाला गया । पिछले दिनों देश भर में महिला अधिकार के लिए विमेंस मार्च निकाला जा रहा है | इसी क्रम उत्तर प्रदेश में वाराणसी से यह पहल गांव की महिलाओं द्वारा किया गया |वुमनिया मार्च में शामिल सभी महिलाओं ने देश के संवैधानिक आधार पर समानता, स्वतंत्रता, राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक भागीदारी, एवं सम्मान पूर्ण जीवन जीने के अधिकार की मांग की साथ ही देश में फैल रहे नफरत और भेदभाव के खिलाफ समाज के हर तबके में एक ऐसी मुहीम जगाने की आशा कि जहाँ हर व्यक्ति के साथ न्याय, समता, बंधुता एवं सम्मानजनक व्यवहार किया जाए | सभी महिलाओं की आपसी सहमति से तैयार मांगे निम्न वर्णित है:-भागीदारी-संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के एक-तिहाई प्रतिनिधित्व के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाए | सरकारी एवं प्रशासकीय, निर्णय निर्माण संरचना में 50 प्रतिशत आरक्षण हो |नौकरियों में हर वर्ग (आरक्षित / अनारक्षित) में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण |सरकार द्वारा जारी किए गए ठेके और लाइसेंस जैसे; रेहड़ी-पटरी, दुकान आदि छोटे मध्यम उद्यमिता क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाये |शिक्षा-सभी महिलाओं को बेहतर शिक्षा के द्वारा शिक्षा के हर स्तर पर लैंगिक भेदभाव ख़त्म किया जाए |शैक्षणिक संस्थाओं में भयमुक्त वातावरण हो जिससे महिलाएं समान अवसर और सुविधाओं का इस्तेमाल कर पाएं |विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों में स्थित महिला छात्रावासों में सुरक्षा के नाम पर कैद रखने वाली ‘ कर्फ्यू टाइमिंग नियम ‘ को ख़त्म किया जाए |प्राथमिक से उच्च शैक्षणिक स्तर के संस्थाओं में स्वतंत्र Gender Sensitisation Cell की स्थापना हो |शिक्षा पर जीडीपी का 10 प्रतिशत खर्च किया जाए |स्वास्थ्य-स्वास्थ्य पर जीडीपी का 6 प्रतिशत खर्च किया जाए | स्वास्थ्य सुविधाओं को नियमित और नियंत्रित किया जाए |सैनेटरी पैड्स से सभी प्रकार के टैक्स हटाए जाए |सबको मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाएँ मुहैया करायी जाएं | ज़रूरी दवाइयों के मूल्य को नियंत्रित किया जाए और मुफ़्त में जनता को मुहैया कराए जाए |सभी क्षेत्रों में महिला शौचालयों की उत्तम व्यवस्था हो |स्वच्छ धुआं रहित ईंधन (एल.पी.जी) को किफायती किया जाए |महिलाओं के स्वास्थ्य और खानपान सम्बन्धित जागरूकता अभियान चलाया जाए |रोज़गार, वेतन-संगठित और असंगठित क्षेत्रों में कामकाजी महिलाओं को स्वतंत्र आर्थिक इकाई के रूप में पहचान मिले |महिला बुनकर / किसान को निश्चित मजदूरी एवं भत्ता दिया जाए |महिलाओं को समान और 15,000 प्रतिमाह का न्यूनतम वेतन सुनिश्चित किया जाए |सभी कामकाजी महिलाओं को वैतनिक माहवारी/मातृत्व अवकाश सुनिश्चित हो|हर क्षेत्र में महिला बैंको की स्थापना हो |महिला ऐडहाक टीचर्स को नियमित कार्यरत टीचर्स के समान सभी सुविधाएँ उपलब्ध करायी जाए |सभी कार्यस्थलों पर बच्चों की देखभाल के लिए शिशुगृह बनाएं जाएं |ICDS, आशा, मिड-डे-मील और अन्य स्कीम वर्कर्स को न्यूनतम वेतन, पेंशन और अन्य सामाजिक लाभ के साथ नियमित करें |किसान, हैंडलूम वर्कर्स और खेतिहर मजदूरों की आत्महत्या से प्रभावित परिवारों की महिलाओं और बच्चों के पुनर्वास के लिए विशेष पैकेज लागू हो |हर उम्र की विकलांग महिला, विधवा और 55 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को न्यूनतम 2000 प्रतिमाह पेंशन देना सुनिश्चित हो |सुरक्षा-विशाखा गाइडलाइन को कानूनी मान्यता दे कर देश भर में लागू किया जाए।आफ़्स्पा AFSPA कानून के महिला विरोधी चेहरे को देखते हुए ,इसे तत्काल हटाया जाना चाहिए।महिला पुलिस एवं गार्डों को अधिक प्रोत्साहन दिया जाए. |वुमेन्स ट्रैफिकिंग के खिलाफ सख्त कानून बने |मेरेटियल रेप को अपराध घोषित किया जाए।ज्ञातव्य है कि इससे पूर्व गत 20 अप्रैल को BHU गेट से काफी संख्या में वुमनिया मार्च निकालकर छात्राओं महिलाओं ने अस्सी घाट पर सभा की थी। सभा मे ही तय हुआ था कि महिला मुद्दों को राजनैतिक आवाज़ बनाने के उद्देश्य से बनारस के दूसरे क्षेत्रों में ग्रामीण अंचल में और आसपास के जिलों में भी इस अलख को लेकर जाया जाएगा। अयोध्या में शोभाक्षर सेवा संस्थान के द्वारा किया गया यह आयोजन उसी क्रम का एक हिस्सा है।इस मार्च में मुख्य रूप डॉ जयंती चौधरी, शिल्पी चौधरी, श्री ओम प्रकाश सिंह, मीनाक्षी उपाध्याय,संगीता आहूजा, सुमिष्टा मित्रा,शोभा गुप्ता, स्नेहलता निषाद, सूर्यकांत पांडेय, मृगेंद्र राज पांडेय, सौरभ, साक्षी श्रीवास्तव आदि के साथ लगभग 70 महिलाएं, छात्राएं एवं युवा शामिल हुए |

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