-वेदमंत्रों से गुंजायमान हुआ गुरुकुल परिसर, सजीव हुई गुरुकुल परंपरा

अयोध्या।सनातन संस्कृति और वैदिक परंपरा के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण अध्याय उस समय जुड़ गया जब श्री गुरु वशिष्ठ सेवा न्यास, अयोध्या के तत्वावधान में 101 बटुकों का सामूहिक यज्ञोपवीत (उपनयन) संस्कार आज विधिवत रूप से सम्पन्न हुआ। यह पावन आयोजन श्री गुरु वशिष्ठ गुरुकुल विद्यापीठ वेद पाठशाला, दर्शन नगर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ संपन्न कराया गया।
इस अवसर पर संपूर्ण परिसर यज्ञ की वेदियों, धूप-दीप, स्वस्तिवाचन और वैदिक ऋचाओं से गुंजायमान रहा। आचार्यों द्वारा संपन्न कराए गए उपनयन संस्कार ने बटुकों को ब्रह्मचर्य आश्रम में प्रवेश कराते हुए उन्हें वेदाध्ययन, संयम, अनुशासन एवं धर्माचरण के पथ पर अग्रसर होने का संकल्प प्रदान किया।

गुरु वशिष्ठ गुरुकुल विद्यापीठ के निदेशक एवं श्री गुरु वशिष्ठ सेवा न्यास के मंत्री डॉ. दिलीप सिंह ने बताया कि यज्ञोपवीत संस्कार भारतीय संस्कृति का अत्यंत महत्वपूर्ण संस्कार है, जो बालक के जीवन में आध्यात्मिक एवं बौद्धिक चेतना का संचार करता है। उन्होंने कहा कि गुरुकुल परंपरा आज भी वैदिक ज्ञान, संस्कार और नैतिक मूल्यों की जीवंत प्रयोगशाला बनी हुई है। यज्ञोपवीत संस्कार में बतौर यजमान श्री गुरु वशिष्ठ सेवा न्यास के संरक्षक एवं श्री रामबल्लभा कुंज के अधिकारी राजकुमार दास उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय अधिकारी एवं ‘विमर्श’ के राष्ट्रीय संयोजक मुकुल कानितकर, न्यास के अध्यक्ष तथा महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर (राजस्थान) के कुलगुरु आचार्य मनोज दीक्षित विशिष्ट अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए। संयोजक आचार्य दुःखहरण नाथ मिश्र ने जानकारी दी कि इस सामूहिक संस्कार में बटुकों के साथ उनके माता-पिता, परिजन एवं निकट संबंधी बड़ी संख्या में सम्मिलित हुए। इसके अतिरिक्त शिक्षा जगत से जुड़े विद्वान, गुरुकुल के सहयोगी, प्रबंध समिति के सदस्य तथा नगर के अनेक संभ्रांत नागरिकों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित संत-महात्माओं एवं विद्वानों ने बटुकों को सदाचार, संयम, गुरु-शिष्य परंपरा और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध का संदेश दिया। यज्ञ के उपरांत प्रसाद वितरण किया गया तथा सभी आगंतुकों के लिए भोजन-प्रसाद की व्यवस्था भी की गई।