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आल्हा गायन में बयां हुई श्रीरामजन्मभूमि निर्माण के संघर्ष की कहानी

कार्तिक पूर्णिमा महोत्सव के 43वें वर्ष प्राण प्रतिष्ठा के दिन दृढ़ हुआ दिवाली मनाने संकल्प

अयोध्या। महावीरन देवस्थान पूरे लेदई तिवारी मवई कला मिल्कीपुर में कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाले पारंपरिक मेले में श्रीरामजन्मभूमि प्राण प्रतिष्ठा के दिन ग्रामदेवस्थान व घर घर दीवाली मनाने का संकल्प व जन्मभूमि संघर्ष की कहानी आल्हा गीतों में बयां हुई। संयोजक मनोकानिका तिवारी ने बताया सामाजिक सद्भाव लोकसांस्कृतिक संरक्षण के निहितार्थ उक्त मेला स्व. पंडित दीनदयाल तिवारी द्वारा कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर 1981 में शुरू किया गया तबसे नियमित महावीरन देवस्थान पर उनका परिवार व समस्त ग्रामवासी प्रातः से ही बजरंगबली को अपनी आस्था निवेदित करते हैं।

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प्रातः सुंदरकांड हनुमान चालीसा व आरती हवन के बाद प्रसाद वितरण एवं दोपहर बाद सर्वादीन तिवारी आल्हागायन के माध्यम से इतिहास व वर्तमान भारत की सांस्कृतिक श्रेष्ठता के गीत गाते हैं। होम्योपैथी चिकित्सा विकास महासंघ के महासचिव व आरोग्य भारती अवध प्रान्त के सहसचिव होम्योपैथी चिकित्सक डॉ उपेन्द्र मणि त्रिपाठी व डीएचओ डॉ आर वी त्रिपाठी ने दीप प्रज्वलन कर सांस्कृतिक कार्यक्रमो का शुभारम्भ किया और उपस्थित कलाकारों व बृद्धजनो को अंगवस्त्र भेंट कर स्वागत किया । सायँ को आरती से पूर्व गांव की बालिकाओं व बच्चों ने समृद्धि त्रिपाठी के संयोजन में शिवानी, ईशानवी त्रिपाठी, हिमानी, ललिता, आकांक्षा, दिव्या, आयुष, पीयूष, आन्या आदि ने दिए जलाए।

इस अवसर पर व्यवस्थापक बृजेन्द्र तिवारी, सचिन तिवारी, एडवोकेट धीरेन्द्र मणि त्रिपाठी, व सहयोगी जय नारायण यादव, राम केवल, मानिक लाल, लाले यादव, विक्रमा यादव, रंजीत यादव, बबलू यादव, मंगली प्रसाद , संजय शुक्ल, पुष्कर तिवारी, आदि उपस्थित रहे।

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