अयोध्या। जिला अस्पताल में प्राइवेट मेडिकोलीगल के नाम पर अवैध वसूली का खेल जोरों पर है। पूर्व प्रभारी मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एके सिन्हा ने आदेश जारी किया था कि प्राइवेट मेडिकोलीगल केवल नोडल अधिकारी डॉ. आशीष श्रीवास्तव द्वारा पीड़ित के प्रार्थना पत्र को फॉरवर्ड करने के बाद ही किया जाएगा। हालांकि इस आदेश की खुलेआम अवहेलना हो रही है।
फार्मासिस्ट पीड़ितों को नोडल अधिकारी के पास भेजने के बजाय स्वयं एक कागज पर हस्ताक्षर कर प्राइवेट मेडिकोलीगल कर रहे हैं और इसके लिए दो से तीन हजार रुपये की वसूली की जा रही है। कुछ मामलों में फार्मासिस्ट अपने निजी व्यक्तियों के माध्यम से प्रार्थना पत्र फॉरवर्ड करवा लेते हैं, जिससे नियमों का उल्लंघन और स्पष्ट हो जाता है।
एक चिकित्सक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जब चोटों का निरीक्षण वे स्वयं करते हैं, तो प्रार्थना पत्र फॉरवर्ड कराने की आवश्यकता क्यों पड़ती है? यह प्रक्रिया केवल दलाली को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई प्रतीत होती है। हाल ही में हैदरगंज थाना क्षेत्र के संतोष कुमार और एक महिला का प्राइवेट मेडिकोलीगल बिना उचित प्रक्रिया के किया गया। यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है, जब नए सीएमएस डॉ. अजय गौतम इस अनियमितता पर आँखें मूंदे हुए हैं।
हाल ही में रौनाही थाना क्षेत्र में हुए एक विवाद में मरणासन्न व्यक्ति को सामान्य चोट दिखाने का मामला सामने आया था। इस पर जिलाधिकारी निखिल टीकाराम के निर्देश पर सीएमओ डॉ. सुशील कुमार बनियान ने जांच के आदेश दिए थे। इसके बावजूद अस्पताल में दलाली और अनियमितताओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। सूत्रों का कहना है कि फार्मासिस्टों और कुछ कर्मचारियों के बीच इस धंधे में सांठगांठ है, जिसके कारण मरीजों और पीड़ितों का शोषण हो रहा है।
जिलाधिकारी से इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है, ताकि अस्पताल में पारदर्शिता और नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके। जनता के बीच आक्रोश बढ़ रहा है, क्योंकि यहाँ गरीब और जरूरतमंद लोग इलाज के लिए आते हैं, लेकिन उन्हें लूट का शिकार होना पड़ रहा है।