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भारतीय गणितज्ञों के मेधा अन्य देशो के मुकाबले कही अधिक : प्रो. सुरेश चन्द्र रस्तोगी

-अवध विश्वविद्यालय में दो दिवसीय अन्तरराष्ट्रीय संगोष्ठी का हुआ समापन

अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के गणित एवं सांख्यिकी विभाग व इंटरनेशनल एकेडमी ऑफ फिजीकल सांइसेज प्रयागराज के संयुक्त तत्वाधान में ‘रीसेन्ट एडवान्सेज इन मैथेमेटिकल एण्ड फिजीकल सांइसेज‘ विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन रविवार को किया गया। समापन सत्र के मुख्य अतिथि नाइजीरिया विश्वविद्यालय प्रो0 सुरेश चन्द्र रस्तोगी ने ज्यामितीय विकास के बारे में बताते हुए एरियल स्पेस एवं उसके अनुप्रयोग पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बताया कि फिन्सलेरियन ज्यामिति का उपयोग कनाडा, रोमानिया, जापान, अमेरिकन गणितज्ञों द्वारा अर्थशास्त्र, भौतिकी एवं बायोसांइसेज के क्षेत्र में किया जा रहा है।

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उन्होंने बताया कि विश्व के जाने माने गणितज्ञ प्रो0 एच0 रुण्ड, प्रो0 कावागुची, प्रो0 कार्टन सहित अन्य के सहयोग से डिफरेन्सिल ज्येमेटरी की विभिन्न शाखाओं में विश्व स्तरीय गणितज्ञो द्वारा कुछ माडिफिकेशन्स भी किया गया है। इनके इनके शोध-पत्र अन्तरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हुए। जो इस क्षेत्र के लिए बहुत उपयोगी है। संगोष्ठी में प्रो0 रस्तोगी ने बताया कि भारतीय गणित की मेधा अन्य देशो के मुकाबले कही अधिक है। समुचित वातावरण के अभाव में इनकी उपादेयता प्रदर्शित नही हो पा रही है।

विश्व प्रसिद्ध गणितज्ञों प्रो0 रुण्ड, प्रो0 कावागुची एवं प्रो0 कार्टन के सिद्धान्तो को भारतीय गणितज्ञों ने नये स्वरुप में प्रस्तुत किया जो महत्व की दृष्टि से ज्यादा मान्य पाये गये। कार्यक्रम की अध्यक्षता विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संकायाध्यक्ष प्रो0 सी0 के0 मिश्र ने गणित के अनुप्रयोगों पर चर्चा करते हुए बताया कि इसकी उपयोगिता हर क्षेत्र में महसूस की जा रही है। अनुसंधान के सहारे और उपयोगी बनाया जा सकता है। संगोष्ठी के दूसरे दिन प्रथम तकनीकी सत्र में गणित के विभिन्न विधाओं और उनके अनुप्रयोगो पर चर्चा की गई। इसमें मान्टपेलियर विश्वविद्यालय फ्रांस के प्रो0 एम0 एन0 बोयम ने डायनेमिक्स इन कटगरी ऑफ गेज स्ट्रक्चर और न्यू ज्येमेट्रिक इनवैरियण्ट विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि ज्यामितीय मॉडल का प्रयोग भौतिकी के विभिन्न विधाओं में किस तरह किया जा सकता है। इसका समाज पर कितना सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

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उन्होने बताया कि गणित एक इन्स्टूमेन्ट है जिसका प्रयोग प्रयुक्त विज्ञान के अनेक विधाओं में किया जाता है। प्रो0 राकेश कुमार, डिपार्टमेन्ट ऑफ मैथेमेटिक्स स्टेटिसटिक्स एण्ड एक्चूरिल साइन्स, नामीबिया यूनीवर्सिटी ऑफ साइन्स एण्ड टेक्लोनोजी, नामीबिया ने आपरेशन रिसर्च की प्रसिद्ध शाखा क्चीइगं थीयरी एवं अप्लीकेशन्स पर व्याख्यान दिया। उन्होने क्चीइगं थीयरी के विभिन्न मॉडलो पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसका उपयोग दैनिक जीवन में, अस्पताल, रेलवे स्टेशन इत्यादि जगहो पर कर सकते है।

द्वितीय तकनीकी सत्र में प्रो0 एस0 एस0 मिश्र, विभागाध्यक्ष गणित एवं सांख्यिकी अवध विश्वविद्यालय ने आपरेशन्स रिसर्च एवं उसके अप्लीकेशन पर व्याख्यान दिया। इसी क्रम डॉ0 अनूप कुमार, भौतिकी विभाग आई0ई0टी0 व डॉ0 पी0 के0 द्विवेदी ने अपने व्याख्यान प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के संयोजक प्रो0 एसएस मिश्र ने बताया कि दो दिवसीय अंतराष्ट्रीय समागम में 125 से अधिक शोध शोधार्थी, शिक्षकों ने अपना पंजीकरण कराया एवं 50 से अधिक शोधार्थी शिक्षको ने शोध-पत्र पढ़ा। इसमें 10 शोध-पत्र इथोपिया, ओमान, नाईजीरिया, फ्रान्स, नामीबिया के शोधार्थियों ने आनलाइन व आफलाइन माध्यम से प्रस्तुत किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में विभाग के समस्त शिक्षकों की विशेष भूमिका रही। इस अवसर पर प्रो0 नीलम पाठक, प्रो0 आर0 के0 तिवारी, प्रो0 शैलेन्द्र कुमार, डॉ0 गीतिका श्रीवास्तव, डॉ0 अनिल कुमार, प्रो0 विनय सक्सेना, प्रो0 जैसनाथ मिश्र एवं प्रो0 एस0 के0 तिवारी सहित अन्य शोधार्थी उपस्थित रहे।

 

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