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शहीद हेमू कालाणी:रन-फॉर-शहादत

शहीद मरते नहीं रहते हैं हमेशा जिन्दा : गिरधारी चावला

शहीद हेमू कालाणी का मना शहादत दिवस

अयोध्या। शहीद मरते नहीं हैं वे हमेशा जिन्दा रहते हैं। भारत को स्वतंत्र कराने में देश के नन्हें क्रान्तिकारी वीर हेमू कालाणी का नाम गौरवान्वित एवं अजर-अमर रहेगा। यह बातें सिन्धी काउंसिल ऑफ इण्डिया व सिन्धी काउंसिल ऑफ यूथ इण्डिया की ओर से आयोजित रन-फॉर-शहादत के अवसर पर यूथ इण्डिया के प्रदेश महासचिव गिरधारी चावला ने कहीं। रामनगर कालोनी से प्रारम्भ रन-फॉर-शहादत को हरी झण्डी दिखाकर ओम प्रकाश नाहर ने रवाना किया। इससे पूर्व रामनगर कालोनी के बीच मैदान पर राष्ट्रगान हुआ जिसमें बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद थे। यूथ इण्डिया के प्रदेश महासचिव श्री चावला ने कहा कि किशोर अवस्था में हेमू कालाणी अपने साथियों के साथ विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया करते थे और लोगों से स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करने का आग्रह किया करते थे। सिन्धी काउंसिल ऑफ इण्डिया के जिलाध्यक्ष डा0 महेश सुरतानी ने कहा कि 1942 में जब महात्मा गॉंधी ने भारत छोड़ो आन्दोलन चलाया तो हेमू उसमें शामिल हो गये और हाथों में तिरंगा लेकर अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। यूथ इण्डिया के जिलाध्यक्ष उमेश जीवानी ने कहा कि हेमू कालाणी मात्र सात वर्ष के थे जब उन्होंने अपने हाथ में तिरंगा लेकर अंग्रेजों की बस्ती में अपने दोस्तों के साथ क्रान्तिकारी गतिविधियों का नेतृत्व करते थे। सिन्धु महिला समिति की अध्यक्ष किरन पंजवानी ने कहा कि जब हेमू कालाणी को फॉंसी की सजा सुनाई गई तो उनका वजन आठ पौण्ड बढ़ गया। काउंसिल के प्रदेश प्रवक्ता ओम प्रकाश ओमी ने कहा कि 21 जनवरी 1943 को उन्हें फॉंसी की सजा दी गयी तब उनकी उम्र मात्र 19 वर्ष की थी। प्रवक्ता ने कहा कि 18 अक्टूबर 1983 को हेमू कालाणी के नाम से उनकी मॉं जेठीबाई की उपस्थिति में भारत सरकार ने डाक टिकट जारी किया। प्रवक्ता ने बताया कि रन-फॉर-शहादत में सुनील मंध्यान, पवन जीवानी, अशोक मदान सुखी, सुरेश पंजवानी, रमेश आहूजा, परसराम तोलानी, वेद प्रकाश राजपाल, गोविन्द चावला, संजय सावलानी, हरीश सावलानी, शालिनी राजपाल, माला खत्री, दीपक वलेशाह, सुशील मंध्यान, भरत तलरेजा, सौरभ लखमानी, कैलाश लखमानी, ओम मोटवानी, कैलाश साधवानी आदि बड़ी संख्या में हाथों में तिरंगा लेकर रामनगर कालोनी से ओवरब्रिज, पुलिस लाइन होते हुए तहसील स्थित हेमू कालाणी पार्क पर पहुॅंचकर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और हेमू कालाणी अमर रहें के उद्घोष लगाये।

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