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मौनी अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने सरयू में लगाई डुबकी

सुरक्षा के रहे पुख्ता इंतजाम, रूट डायवर्जन रहा लागू

अयोध्या। रामनगरी अयोध्या में मौनी अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने सरयू नदी में डुबकी लगाई। जिन श्रद्धालुओं की चाह प्रयागराज पहुंच पाने की पूरी ना हो पाई उन्होंने मोक्ष दायिनी सरयू में डुबकी लगाई। सरयू घाट पर स्नान दान के बाद राम नगरी के प्रमुख मठ-मंदिरों में मत्था टेका और फिर वापस अपने गंतव्य को रवाना हो लिये। पर्व के मद्देनजर जिला प्रशासन की ओर से रूट डायवर्जन किया गया था और मजिस्ट्रेट ओं के नेतृत्व में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी।
इस बार की मोनी अमावस्या जिसके कारण विशेष मानी जा रही है इसी तिथि में सोमवती अमावस्या भी है। वैसे तो हर श्रद्धालु की चाह प्रयागराज पहुंच संगम में डुबकी लगाने की रहती है। प्रयागराज में कुंभ चल रहा हो तो या आकांक्षा और भी प्रबल हो जाती है। हालांकि अन्य अन्य कारणों के चलते तमाम लोग प्रयागराज नहीं पहुंच पाते। ऐसे लोगों ने मोक्ष दायिनी सरयू में ही डुबकी लगाई। राम नगरी अयोध्या से लेकर श्रृंगी ऋषि आश्रम तक विभिन्न घाटों व स्थानों पर स्नान दान के लिए श्रद्धालुओं का बड़ा जमावड़ा रहा। सोमवार को भोर से ही सरयू के घाटों पर श्रद्धालुओं का जमावड़ा शुरू हो गया और स्नान दान का सिलसिला चल निकला। स्नान दान के बाद श्रद्धालुओं ने रामनगरी के प्रमुख मठ मंदिरों का दर्शन पूजन किया। भोर से ही पावन सलिला सरयू में डुबकी लगाकर नागेश्वरनाथ, रामलला, हनुमानगढ़ी व कनकभवन सहित अन्य मंदिरों में दर्शन-पूजन कर रहे हैं ।
मोनी अमावस्या पर पर सोमवती अमावस्या भी पढ़ने के चलते सुहागिनी स्त्रियों ने अपने पतियों की लंबी उम्र के लिए अनुष्ठान किया। राम नगरी से लेकर जगह जगह भोर से ही महिलाएं पवित्र वट वृक्ष की फेरी लगाती नजर आई। क्षरेश्वर नाथ, बरम बाबा, जलकल समेत तमाम शिवालय मठ मंदिरों, जहां पर भी बट वृक्ष है वहां सुहागिनों की अच्छी भीड़ नजर आई।
माघ मास की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहते हैं। शास्त्रों के अनुसार सोमवार को यह अमावस्या हो तो इसका महत्व बढ़ जाता है। सोमवार के दिन, श्रवण नक्षत्र, सिद्धि योग के चलते अमावस्या विशेष फलदायी है। इस दिन मौन रहकर स्नान-दान करने का विशेष पुण्य मिलता है। अखिल भारतीय वेद प्रचार परिषद के निदेशक आचार्य पं. शिवशंकर बाजपेयी का कहना है कि अमावस्या तिथि का संचरण रविवार को दिन में 11.12 बजे हो चुका है। लेकिन उदयातिथि के कारण मौनी अमावस्या का पर्व सोमवार को है ।उन्होंने बताया कि श्रवण नक्षत्र रविवार रात में 2.27 बजे से 4.57 बजे तक है। मौनी अमावस्या पर श्रवण नक्षत्र के साथ ही बन रहा सर्वार्थ अमृत सिद्धि योग सर्वप्रकार से अमृत तुल्य है।उन्होंने बताया कि मौनी अमावस्या पर सूर्योदय से लगभग 60 मिनट पहले से मौन रहकर स्नान शुरू करना विशेष फलदायी है। इसके अलावा ब्रह्म मुहूर्त में भी मौन स्नान करना चाहिए। सुबह नदी, घाटों या घर में स्नान करते समय काले तिल का दान श्रेयस्कर रहता है। जो घाटों पर न जा पाएं उन्हें घरों में ही जल में काले तिल डालकर मौन स्नान करना चाहिए। अमावस्या पर पितरों के निमित्त पीपल का पौधा लगाने से सुख-सौभाग्य, संतान, धन मिलता है और पारिवारिक क्लेश खत्म होता है।
एडीएम नगर विंध्यवासिनी राय व एसपी सिटी अनिल कुमार सिसोदिया ने बताया कि मेला क्षेत्र में वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित हैं । गोंडा व बस्ती की तरफ से आने वाले वाहन नयाघाट तक ही पहुंचने दिया जा रहा है । शहर में श्रीराम अस्पताल से नयाघाट तक वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित किया गया है । उन्होंने बताया कि सुरक्षा के लिए बड़ी संख्या में विभिन्न जिलों से आई फोर्स को लगाया गया है। सुरक्षा की कमान मजिस्ट्रेटों के हवाले की गई है। इसके अतिरिक्त अर्धसैनिक बल एवं पुलिस के जवानों को तैनात किया गया है।

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Written by Next Khabar Team

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