पूर्णिमा को श्रावण नक्षत्र होने से इस मास का नाम पड़ा श्रावण : आचार्य श्रवण तिवारी

रुदौली  क्षेत्र में जगह जगह भगवान भोलेनाथ का पूजन अर्चन व आरधना का अनवरत जारी

रुदौली। भगवान भोलेनाथ का सबसे पवित्र माह सावन की शुरुवात से ही रुदौली तहसील क्षेत्र में जगह जगह भगवान भूत भावन भोलेनाथ का पूजन अर्चन व आरधना का कार्यक्रम अनवरत जारी है ।शिव मन्दिरो में हर हर महादेव के नारो से पूरा वातावरण गुजायमान हो रहा है ।श्रद्धालु अपने अपने तरह से शिव जी की आरधना कर पुण्य का लाभ कमाते है।इसी कड़ी में में गनौली स्थित सरजू प्रसाद विद्यालय में संगीतमयी कथावाचक आचार्य श्रवण तिवारी द्वारा रुद्राभिषेक की विधवत पूजा कराकर श्रावण मास की महत्ता के बारे में श्रद्धालुओं को बताते हुए कहा कि श्रावण मास की पूर्णिमा को श्रावण नक्षत्र योग होने से इस मास का नाम श्रावण मास पड़ा। माता पार्वती जी ने शिव जी को प्राप्त करने के लिये इसी श्रावण मास में ही विशिष्ट आराधना की थी इसीलिए श्रावण मास को सर्वोत्तम मास कहा जाता है ।उन्होंने बताया कि इसीलिए भगवान शिव को श्रावण मास बहुत ही प्रिय है ।इसी माह में लोग विभिन्न दूरदराज स्थित शिवलिंग पर जलाभिषेक कर पूजन अर्चन भी करते है ।भक्त गण पैदल कन्धे पर काँवड़ रखकर बाबा बैजनाथ धाम पर जलाभिषेक करते है । आचार्य ने लोगो को बाबा बैजनाथ धाम से सम्बंधित प्रचलित कथा को बताते हुए कहा कि एक बार लंका का राजा रावण शिवलिंग को उठाकर ले जा रहा था कि उसे अचानक लघु शंका हुई तो वह इसी स्थान पर एक बैजनाथ नाम के चरवाहा को शिवलिंग थमाकर रावण लघुशंका को चला गया । कहा जाता है कि भगवन शिव के वजन को चरवाहा थाम नही सका और वही रख दिया । उसके बाद दुबारा रावण शिवलिंग को हिला तक नही सका तभी से यह स्थान वही प्रसिद्ध है जहाँ देश के कोने कोने से लोग जलाभिषेक करने के लिए आस्था के साथ पहुचते है और मनोकामना की कामना करते है ।इस अवसर पर सपा नेता अनूप सिंह विद्यालय के प्रबन्धक बलभद्र यादव ,जितेंद्र पाण्डेय ,राजेश यादवयउदय चन्द्र मिश्रा ,सहित दर्जनों लोग मौजूद रहे ।

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