दहेज उत्पीड़कों के विरूद्ध कार्यवाही नहीं कर रही पुलिस

अयोध्या। घरेलू हिंसा व दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज हुए दो माह से अधिक बीत गया परन्तु पूराकलन्दर थाना पुलिस उत्पीड़कों के विरूद्ध कोई कार्यवाही नहीं कर रही है।
पीड़िता रूबी बानो ने 4 नवम्बर 2018 को थाना पूराकलन्दर में आईपीसी की धारा 498 ए, 323, 504, 452, 376, 511, 506 और दहेज उत्पीड़न की धारा 3 व 4 के तहत पति इरशाद अहमद, सास शायदा बानो, जेठ दिलशाद अहमद, ननद शहनाज बानो, मौसा मेराज अहमद, मौसी नूरजहां बानो निवासीगण अरूवावां के विरूद्ध मुकदमा दर्ज कराया था।
पीड़िता ने दर्ज मुकदमें में कहा है कि बालिग होने के कारण उसने अपना निकाह रजामंदी से इरशाद अहमद पुत्र स्व. सरफराज अहमद निवासी अरूवावां मोतीनगर से 10 सितम्बर 2016 को मुस्लिम रीति रिवाज से पुरानी सब्जी मण्डी फतेहगंज से कर लिया था और पति के घर चली आयी थी। निकाह के कुछ माह बाद पति का व्यवहार बदला और वह दहेज न मिलने का ताना देने लगे। सास, जेठ, ननद भी पति का साथ देने लगीं और उसका खाना पानी बंद कर मारने पीटने लगे। इरशाद के मौसा मौसी निवासी सब्जी मण्डी फतेहगंज का भी आनाजाना शुरू हुआ और वह भी उत्पीडन करने लगे। पीड़िता का यह भी आरोप है कि उसे नशे का इंजेक्शन लगाकर सादे कागजों पर हस्ताक्षर करवा लिया गया। मार्च 2017 की रात में जेठ उसे कमरे में घुस गया था और दुराचार का प्रयास किया था। किसी तरह उसने जान बचाई तो उसकी ससुरालीजनों ने पिटाई कर दी और पहने गये गहनों को निकलवा लिया और घर से निकाल दिया किसी तरह वह सुबह अपने मायके पहुंची और अपना दुखड़ा घर वालों को बताया। घरवालों ने जब सुलह समझौते का प्रयास किया तो कहा गया कि या तो दो लाख रूपये दो या मकान लिख दो। थक हारकर अन्त में पूराकलन्दर में रिर्पोट दर्ज कराया परन्तु थाना पुलिस कोई कार्यवाही नहीं कर रही है जिससे पीड़िता को न्याय नहीं मिल पा रहा है।

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