नहीं रहे पदमभूषण महाकवि गोपालदास ‘नीरज’

    Lucknow: Samajwadi Party President Mulayam Singh Yadav along with Uttar Pradesh Chief Minister Akhilesh Yadav honouring noted Hindi poet Gopaldas Neeraj during Hindi Divas function in Lucknow on Saturday. PTI Photo by Nand Kumar (PTI9_14_2013_000093A)
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    लखनऊ। अमर गीतों से धरा पर अपनी छाप छोड़ने वाले पदमभूषण महाकवि गोपालदास नीरज का गुरूवार की शाम निधन हो गया। उनकी हालत बिगड़ने के कारण बुधवार को आगरा से एम्स लाया गया था। चार डॉक्टरों की टीम उनके स्व्स्थ्य की निगरानी करने में लगी थी। उनका ब्लड प्रेशर नियंत्रित नहीं हो रहा था। उनके फेफड़ों में पस था। उसे निकाला जा चुका था। उल्लेखनीय है कि नीरज के गीत लोगों के लिए ऑक्सीजन की तरह रहे हैं। यही ऑक्सीजन उनके काम आने पर बुधवार को वह होश में आकर मुस्कुराने लगे थे। उनके फेफड़ों के संक्रमण को देखते आगे की जांच के लिए उन्हें एम्स दिल्ली के पल्मोनरी डिपार्टमेंट में बुधवार रात भर्ती कराया गया था।
    कवि नीरज का जन्म उत्तर प्रदेश के इटावा जिला के गांव पुरावली में 4 जनवरी 1924 को हुआ। उनकी काव्य पुस्तकों में दर्द दिया है, आसावरी, बादलों से सलाम लेता हूँ, गीत जो गाए नहीं, नीरज की पाती, नीरज दोहावली, गीत-अगीत, कारवां गुजर गया, पुष्प पारिजात के, काव्यांजलि, नीरज संचयन, नीरज के संग-कविता के सात रंग, बादर बरस गयो, मुक्तकी, दो गीत, नदी किनारे, लहर पुकारे, प्राण-गीत, फिर दीप जलेगा, तुम्हारे लिये, वंशीवट सूना है और नीरज की गीतिकाएँ शामिल हैं। गोपाल दास नीरज ने कई प्रसिद्ध फिल्मों के गीतों की रचना भी की है।
    गुरुवार को उनकी हालत ठीक नहीं थी। इसके अलावा उन्हें सांस संबंधी दिक्कत थी। उनके फेफड़ों में पस होने और ऑक्सीजन की कमी से दिमाग के डैमेज होने का खतरा होने की आशंका से डॉक्टर भी चिंतित दिख रहे थे। एम्स के डॉक्टरों से ऑनलाइन परामर्श लेने के बाद फेफड़े से पस निकाल दिया था। इसके बाद भी उनके स्वास्थ्य में सुधारने और बिगड़ने का क्रम जारी था।
    बताया जाता है कि बुधवार सुबह वह अपने बेड पर बैठ गए थे। कुछ कहने के बजाय कागज पर लिखकर बताया था-मैं ठीक हूं, अब घर चलो। गुरूवार को फिर हालत बिगड़ी तो उसके बाद सुधर नहीं सकी और शाम उन्होंने अंतिम सांस ली।