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दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को आत्मसात करने की जरूरत: प्रो. मनोज अग्रवाल

‘पंडित दीनदयाल उपाध्यायः जीवन एवं चिंतन’ विषय पर हुई संगोष्ठी


अयोध्या। डाॅ0 राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कौटिल्य प्रशासनिक भवन के सभागार में पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोध पीठ एवं अर्थशास्त्र एवं ग्रामीण विकास विभाग के शैक्षणिक सहयोग से “पंडित दीनदयाल उपाध्यायः जीवन एवं चिंतन“ विषय पर एक दिवसीय विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया। विचार संगोष्ठी के उद्घाटन में मुख्य अतिथि निदेशक डॉ0 शंकर दयाल शर्मा इंस्टीट्यूट आफ डेमोक्रेसी लखनऊ विश्वविद्यालय लखनऊ के प्रो0 मनोज अग्रवाल एवं विशिष्ट अतिथि प्रो0 ए0 पी0 तिवारी पूर्व अधिष्ठाता एवं विभागाध्यक्ष अर्थशास्त्र विभाग, डॉ0 शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय लखनऊ रहे। संगोष्ठी की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति प्रो0 एस0एन0 शुक्ला ने की।
गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए मुख्य अतिथि प्रो0 मनोज अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान समय में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को आत्मसात करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि गांधी, लोहिया, एवं दीनदयाल अलग-अलग महापुरुष भले ही थे लेकिन उनका राष्ट्र के लिए चिंतन एक था। प्रो0 अग्रवाल ने कहा कि गांधी पर भारत के अलावा विदेशों में काॅफी शोध हुए हैं परंतु दीनदयाल पर कम हुए जो चिंता का विषय है। दीनदयाल जी हमेशा भारतीय सामाजिक परिवेश की बात किया करते थे और विषमताओं को खत्म करने की बात कहते थे। उन्होंने कहा कि आर्थिक परिदृश्य में आज हमारे पास खाद्य उत्पाद काफी मात्रा में है उन्हें रख नहीं पा रहे हैं। इसके लिए उपाय करने की जरूरत है। प्रो0 अग्रवाल ने बताया कि देश के आर्थिक विषमताओं के कारण महिलाओं की संख्या कम हो रही है यह भी देश के समक्ष चिंता का विषय है। हमारे सामाजिक परिवेश में सामाजिक पूंजी है कभी भोजन के अभाव में कोई कमी नहीं रहा है 25 से 30 साल पहले सामाजिक विचारधारा के संदर्भ में दीनदयाल जी का विचार था कि उन्नति का आधार अकेले नहीं हो सकता है यह सभी समाज का है। समाज के अंतिम पायदान पर बैठा व्यक्ति को लाभ न मिले तो इसे विकास नहीं कहा जा सकता। प्रो0 अग्रवाल ने कहा कि हमारा आर्थिक विकास टिकाऊ नहीं है पंडित दीनदयाल ने आर्थिक मॉडल को एक माना सामाजिक, आर्थिक एवं कृषि को लेकर सभी को एक साथ चलने की बात कहीं थी उपाध्याय जी के विचार सामाजिक परिदृश्यता में गरीबी को खत्म करने की बात सर्वोपरि रही है।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो0 ए0 पी0 तिवारी ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय देश के पुरोधा रहे हैं। उनका जीवन सादगी भरा रहा है। दीनदयाल, नेहरू एवं लोहिया जैसे महापुरूषों में अंतर नहीं किया जा सकता। प्रो0 तिवारी ने कहा कि पूंजीवादी व्यवस्था आज की तारीख में एकात्मवाद में ध्वस्त हो चुकी है। पंडित दीनदयाल ने भौतिकवादी एवं आध्यात्मिक के मध्य सामंजस्य स्थापित करने की प्रयास किया है उनका मानना था कि देश का विकास का आधार अपनी संस्कृति हो पश्चिमी विचारधारा नही। वे हमेशा निर्धनों के बारें में सोचते थे और उनके जीवन स्तर को उठाने बात करते रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति प्रो0 एस0एन0 शुक्ला ने कहा कि डाॅ0 लोहिया एवं पं0 दीनदयाल जी दोनों ही विभूतियों ने कम आयु में देश छोड़ कर चले गये लेकिन आज भी उनके विचार हम सभी को प्रभावित करते रहते हैं। आज हम एकात्मवाद एवं मानतावाद के अलग अलग तरीके से परिभाषित करते रहते हैं लेकिन लोहिया जी और दीनदयाल जी समतामूलक समाज के पक्षधर थे उनका मानना था कि भारत कहीं और है उनका राष्ट्र सर्वोपरि है। प्रो0 शुक्ला ने बताया कि पं0 दीनदयाल ने हमेशा भारतीय संस्कृति को अपनाने बात किया करते थे जिसमें बड़ों सम्मान करना अस्पृश्यता खत्म करना रहा है। आज उनके विचारों से हम सभी को प्रेरणा मिलती है।
कार्यक्रम के संयोजक एवं अधिष्ठात छात्र कल्याण प्रो0 आशुतोष सिन्हा ने अपने स्वागत उद्बोधन में संगोष्ठी के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पं0 दीन दयाल उपाध्याय एकात्म मानववाद के रूप में जाने जाते थे। वे कभी समाज को विभाजित करके देखने के पक्षधर नहीं थे। आज उनके विचार हम सभी को प्रभवित करते रहते है।
संगोष्ठी का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा एवं पंडित दीनदयाल उपाध्याय की चित्र पर माल्यार्पण करके किया गया। अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंट कर किया गया। कार्यक्रम का संचालन करते हुए प्रो0 विनोद श्रीवास्तव ने संगोष्ठी की रूपरेखा पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर मुख्य नियंता प्रो0 आर0 एन0 राय, प्रो0 मृदुला मिश्रा, प्रो0 अशोक शुक्ला डाॅ0 अनिल कुमार, डॉ0 प्रिया कुमारी, डॉ0 अलका श्रीवास्तव, डॉ0 विनय मिश्र, डॉ0 विजयेन्दु चतुर्वेदी, डॉ0 दिनेश कुमार सिंह, डॉ0 सरिता द्विवेदी डॉ0 पल्लवी सोनी, डॉ0 प्रदीप त्रिपाठी, डाॅ0 दिव्यांशु विक्रम सिंह. डॉ0 रितेश जायसवाल डॉ0 अनुर्जेन्द्र तिवारी सहित अन्य प्रतिभागी उपस्थित रहे।

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