त्याग की अवधारणा ही कर्मयोग :डॉ. चैतन्य

वर्तमान परिदृश्य में योग की उपादेयता विषय पर हुई राष्ट्रीय संगोष्ठी

अयोध्या। आज का समय तो महामारी के रूप में चल रहा है। पूरा विश्व बीमार है,बदली हुई दिनचर्या और तरीके से लोग अस्वस्थ हैं। स्वस्थ राष्ट्र के लिए हमें स्वस्थ मस्तिष्क का निर्माण करना होगा,तभी स्वस्थ राष्ट्र का वैश्विक स्वरूप देखा जा सकेगा। त्याग की अवधारणा ही कर्मयोग है। योग तो सभी दुखों का नाश करता है,इसलिए प्रतिदिन अभ्यास आवश्यक है । उक्त विचार प्रसिद्ध योगाचार्य डॉ. चैतन्य के हैं, जो ग्रामर्षि पंडित राम कुमार पांण्डेय ग्रामोदय आश्रम पी.जी. कॉलेज सया में आयोजित “ वर्तमान परिदृश्य में योग के उपादेयता “ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के अध्ययन केंद्र सया द्वारा आयोजित संगोष्ठी के विशिष्ट अतिथि के रूप में क्षेत्रीय समन्वयक डॉ.शशिभूषण राम त्रिपाठी ने कहा – योग जीवन की ऊर्जा को जागृत करता है,मनुष्य के जीवन का प्रारंभ योग से ही होता है। बदलती जीवन शैली में योग हम सबके लिए अनिवार्य हो चला है , ऐसे में योग के विभिन्न स्तर समस्याओं का निपटारा करने में सक्षम है। नियमित आसनों का अभ्यास हमें रोगों से दूर रखता है।
इसके पहले कार्यक्रम का प्रारंभ मुख्य अतिथि डॉ. चैतन्य और विशिष्ट अतिथि डॉ.शशिभूषण राम त्रिपाठी तथा महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ.राकेश चंद्र तिवारी जी द्वारा दीप प्रज्वलन और मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ । महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ राकेश चंद्र तिवारी ने आए हुए सभी अतिथियों को उत्तरीय और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया । इसके अनन्तर राष्ट्रीय संगोष्ठी के संयोजक डाँ.नरेंद्र कुमार पांण्डेय ने विषय प्रवर्तन किया।
योगाचार्य डॉ.ललित कुमार ने कहा कार्यकुशलता के साथ सफलता तक पहुंचाना ही योग है । योग सामाजिक संकटो को दूर करते हुए मनुष्यता का पर्याय है । प्रकृति के नियम का पालन और साहचर्य योग की अवधारणा को मजबूती प्रदान करते हैं । रवि तिवारी ने कहा योग्यता और क्षमता बढ़ाने के लिए योग का साथ आवश्यक है। डॉ.अनुपम पाण्डेय ने कहा टेक आफ एंगल को पहचानने के लिए योग आवश्यक है । किंतु बिना प्रशिक्षण के योग ठीक नहीं है ।
अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ.राकेश चंद्र तिवारी ने कहा योग अब वैश्विक हो चला है , यह सब हमारे देश की देन है,अच्छा होगा कि हम सभी जीवन को स्वस्थ और मंगल के लिए योग को नियमित दिनचर्या में शामिल करें। इसके अनंतर संगोष्ठी के संयोजक डॉ. नरेंद्र कुमार पांडे ने आए हुए सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया संगोष्ठी का संचालन समाजशास्त्र प्रवक्ता राजेश मिश्र ने किया। इस अवसर पर डॉ. विंध्यमणि त्रिपाठी डॉ.एम. पी वर्मा ,डॉ अनूप ,राजेश,विनोद, डॉ.कमलेश पांडेय केतकी सिंह, कमलेश श्रीवास्तव,अंजनी उपाध्याय आदि के साथ साथ महाविद्यालय के सभी कर्मचारी गण उपस्थित रहे।

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