“कजरा वो ही दिन देब, जउने बिन सँइया अइहन हमार“

आकाशवाणी फैजाबाद की मनी रजत जयंती

फैजाबाद। आकाशवाणी फै़ज़ाबाद अपने प्रसारण के 25 वर्ष पूरे कर लिये। 17 जून 1993 कसे इस केन्द्र का उद्घाटन हुआ था। रजत जयन्ती के इस पावन अवसर पर आकाशवाणी फै़ज़ाबाद के पूरे परिसर को दुल्हन की तरह से सजाया गया और रात में विद्युत झालरों से प्रकाशित भी किया गया। इस अवसर पर साकेत महाविद्यालय के प्रेक्षागृह में एक लोक एवं सुगम संगीत सन्ध्या का आयोजन भी किया गया। समारोह की शुरूआत माँ सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्जवलन से हुई। दीप प्रज्जवलन किया अयोध्या नगर निगम के महापौर ऋषिकेश उपाध्याय, जिलाधिकारी डाॅ0 अनिल कुमार, आकाशवाणी फैज़ाबाद के उपनिदेषक (अभियान्त्रिकी) बी0आर0 पटेल और आकाशवाणी फै़जाबाद के कार्यक्रम प्रमुख डाॅ0 महेन्द्र पाठक ने। अतिथियों का स्वागत करते हुए डाॅ0 महेन्द्र पाठक ने आकाशवाणी फै़ज़ाबाद के 25 वर्षो की विकास यात्रा पर प्रकाष डाला।
इसके बाद रंगारंग कार्यक्रमों की शुरूआत हुई। आकाशवाणी लखनऊ के कलाकार राकेश अग्निहोत्री एवं देवेश अग्निहोत्री ने सबसे पहले गणेश वन्दना की। इसके बाद अग्निहोत्री बन्धुओं ने दो भजन और प्रस्तुत किए। जय-जय विपत्तिहरण हनुमान, सब दुख दूर करो भगवान। गाते चलो गुनगुनाते चलो, सियाराम-सियाराम, गाते चलो।। इसके बाद मंच पर आयी आकाशवाणी इलाहाबाद की कलाकार संगीता राय। गंगा गीत “देवी लोक की गंगा भवानी, कर दो मोरा उद्धार“ को बड़े ही मार्मिक ढंग से प्रस्तुत कर श्रोताओं को मन मोह लिया साथ ही समाज को एक संदेश भी दिया। “कउने रंग मंूगवा, कउने रंग मोतिया“। इस विदेशिया गीत को संगीता राय ने बड़े ही शानदार एवं आकर्शक ढंग से प्रस्तुत किया। वाह-वाह और तालियों के साथ श्रोता भी झूम रहे थे इस गाने पर। इसी क्रम में सगीता राय ने एक और प्रस्तुति दी “गोरकू-सँवरकू पंजरवा में सोहे“
आकाशवाणी लखनऊ के कलाकार पं0 रामचन्द्र दूबे ने सर्वप्रथम रामजी को समर्पित “अति पावन अयोध्या के धाम, रामलला नगरी“, इस खेमटा को प्रस्तुत किया, फिर आपने पूर्वी गीतों “कजरा वो ही दिन देब, जउने बिन सँइया अइहन हमार“ और मिलल परदेसी सैंया कटहा बबूल रे, से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम की अन्तिम प्रस्तुति थी लोकगीत कलाकार रंजुल जयन्त गौतम और साथियों की। सबसे पहले इन्होंने एक गोदना गीत प्रस्तुत किया। इनकी कहरवा की प्रस्तुति ने तो मिट्टी की संुगन्ध बिखेर दी, बोल थे “जइहा ना पिया पुरबवां के देश“ अन्त में रंजुल जयंत गौतम और साथियों ने अपने साथ-2 श्रोताओं को भी झूमने पर मजबूर कर दिया। इनकी पूर्वी लोक नृत्य की प्रस्तुति थी “ओरी हम छम-छम पायल बजा गयी तू“ इसी के साथ रंगारंग कार्यक्रम का समापन हुआ। समारोह के अन्त में आकाशवाणी परिवार की तरफ से धन्यवाद ज्ञापन किया कार्यक्रम अधिशासी डाॅ0 नगेन्द्र सिंह रघुवंशी ने। अन्य लोगों के अलावा कार्यक्रम को सफल बनाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई कार्यक्रम अधिषासी-योगेन्द्र प्रसाद, वरिश्ठ अभियान्त्रिकी सहायक-अनिल कुमार सिंह, पुस्तकालय एवं सूचना सहायक-के0बी0 यादव, वरिश्ठ तकनीषियन-देव प्रकाश द्विवेदी और प्रवर श्रेणी लिपिक-संजय कुमार गुप्ता तथा कार्यक्रम का संचालन आकाशवाणी लखनऊ की नन्दिनी मिश्रा ने किया।

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