कायदा कानून ताख पर, डीएम ने शुरू की बाउंड्रीवाल निर्माण की कवायद

    • बहू बेगम सम्पत्ति से बेदखली व निर्माण कार्य कोर्ट की अवमानना
    • बाउंड्रीवाल के नाम पर डीएम के खाते में आया साढ़े तीन करोड़, वारिस प्रिंस एजाज ने दर्ज करायी आपत्ति
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    फैजाबाद। मुगल कालीन धरोहरों के सुरक्षा की जिम्मेदारी जिन हाथों में है वही उसे नष्ट करने पर उतारू हैं। फैजाबाद के मौजूदा जिलाधिकारी ने कायदा कानून को ताख पर रख बहू बेगम मकबरा सम्पत्ति के किरायेदारों को बेदखल करने की जहां नोटिस जारी कर दिया है वहीं बेदखल की गयी जमीन के चारो ओर बाउंड्रीवाल निर्माण की कवायद भी की जा रही है इस सम्बन्ध में नवाब शुजाउद्दौला के वारिस प्रिंस एजाज बहादुर ने जिलाधिकारी को लिखित दरखास्त दर्ज कर आपत्ति दर्ज कराया है।
    बहू बेगम मकबरा ट्रस्ट से जुड़े व नबाब शुजाउद्दौला के वारिस प्रिंस एजाज का कहना है कि बहू बेगम की सम्पत्ति पर यथा स्थिति बरकरार रखने के लिए कोर्ट ने उसकी याचिका पर स्टे जारी कर रखा है। ऐसी दशा में फैजाबाद के जिलाधिकारी डा. अनिल कुमार पाठक द्वारा सरकार को गुमराह कर बाउंड्रीवाल के नाम पर साढ़े तीन करोड़ रूपया निर्गत करा अपने खाते में करवा लेना एक बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है। चूंकि जिलाधिकारी अदालत में चल रहे मुकदमें के फरीक भी है इसलिए यह नहीं माना जा सकता कि बहू बेगम ट्रस्ट की सम्पत्ति के पुराने व नये किरायेदारों को बेदखली नोटिस व बाउंड्रीवाल के नाम पर साढ़े तीन करोड़ रूपया स्वीकृत करा लेना उनकी अज्ञानता होगी। चुपचाप ढंग से जिला प्रशासन द्वारा यह खेल किया गया है जिसका खुलासा उस समय हुआ जब किरायेदारों को बेदखली की नोटिस प्रशासन द्वारा जारी की गयी।
    नवाब के वारिस प्रिंस एजाज बहादुर ने गुरूवार को जिलाधिकारी के प्रतिनिधि नगर मजिस्ट्रेट को जो आपत्ति दरखास्त दी है उसमें साफ कहा गया है कि बहूबेगम मकबरा सम्पत्ति के बाबत एक वाद सिविल जज सीनियर डिवीजन फैजाबाद में दाखिल किया गया है जो कि मूल वाद संख्यज्ञ 165/2002 रूप में दर्ज हो गया है। उक्त वाद में 19 जून 2006 को न्यायालय का अन्तरिम आदेश जो हुआ वह प्रार्थी के हक में व विपक्षीगणों के विरूद्ध है। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि प्रस्तुत प्रार्थना पत्र अस्थाई निषेधाज्ञा 11 ग 2 स्वीकार्य किया जाता है तथा प्रतिवादीगण को जरिये अस्थायी निषेधाज्ञा दौरान वाद निषेधित किया जाता है। प्रतिवादीगण दौरान वाद विवादित सम्पत्ति के बावज कोई ऐसा कार्य न करें जिससे विवादित सम्पत्ति की मूल संरचना क्षतिग्रस्त या परिवर्तित हो। इसी आदेश मे यह भी कहा गया है कि विवादित मकबरा, गुलाबबाड़ी, मोती महल व उससे सम्बन्धित परिसर का उपयोग राजनीतिक, व्यवसायिक गतिविधियों व अन्य रिहायस हेतु न करें।
    प्रिंस एजाज बहादुर का यह भी कहना है कि उच्च न्यायालय में दायर रिट याचिका में भी उनके पक्ष में निर्णय हुआ है। उन्होंने जिलाधिकारी को दी गयी दर्खास्त में स्पष्ट कहा है कि मकबरा सम्पत्ति में बसे पुराने किरायेदार हटाने की कवायद की जा रही है तथा बाउंड्रीवाल व अन्य निर्माण कराने की शुरूआत जिला प्रशासन द्वारा की जा रही है जिसे तत्काल रोंका जाय। दूसरी ओर इस सम्बन्ध में समाजवादी जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अशोक श्रीवास्तव का कहना है कि मुगल कालीन धरोहरों पर अवैध कब्जों की पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की है। प्रशासन को गुमराह करके पहले अवैध निर्माण कराया गया अब सुरक्षा के नाम पर गुमराह कर बाउंड्रीवाल के नाम पर डीएम द्वारा धन आवंटित करा लिया गया है। इस विवाद में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, वक्फ कमिश्नर, जिलाधिकारी, पुरातत्व विभाग भी पक्षकार है। यदि सरकार ने फौरी कार्यवाही नहीं की तो मुगलकालीन धरोहरों की सुरक्षा खतरे में पड़ जायेगी।

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    रामतीर्थ विकल