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मानस संस्कार सम्मान से विभूषित किये गए डॉ उपेन्द्र मणि त्रिपाठी

-श्रीरामचरित मानस और सामाजिक न्याय पर हुई संगोष्ठी

अयोध्या। केआरसी पब्लिक स्कूल सोहावल में भारत वार्ता के तत्वाधान में अयोध्या संवाद कार्यक्रम अंतर्गत “श्रीरामचरित मानस में सामाजिक न्याय“ विषयक संगोष्ठी का आयोजन हुआ । शुभारम्भ गोस्वामी तुलसीदास के चित्र पर माल्यार्पण दीपप्रज्वलन एवं सरस्वतीवन्दना से हुआ। बच्चों द्वारा रामचरित नाट्य व सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच विशेषज्ञों ने गोस्वामी तुलसीदास के तत्कालीन सामाजिक राजनैतिक स्थितियों के बीच सनातन धर्म की रक्षा में अवधी भाषा मे लिखे गए श्रीरामचरित मानस ग्रन्थ को भारतीय संस्कृति परंपराओं परिवार आदर्शों की श्रेष्ठतम संरक्षक और पोषक ग्रन्थ बताया।

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इस अवसर पर पूर्व आईपीएस अधिकारी व महावीर मंदिर न्यास सचिव आचार्य कुणाल किशोर को मानस रत्न व रामचरित मानस में सामाजिक मानसिक स्वास्थ्य के होम्योपैथिक दृष्टिकोण हेतु अयोध्या के होम्योपैथी चिकित्सक होम्योपैथी महासंघ के महासचिव डॉ उपेन्द्र मणि त्रिपाठी को मानस संस्कार सम्मान से विभूषित किया गया। भारत वार्ता के श्रीरामचरितमानस के अंतरराष्ट्रीय विमर्श विशेषांक का विमोचन भी किया गया।

उपस्थित श्रीरामजन्मभूमि तीर्थक्षेत्र के ट्रस्टी कामेश्वर चौपाल ने तुलसी का पौधरोपण कर हर हर मानस घर घर तुलसी अभियान की शुरुआत की और कहा श्रीराम ने जंगलों में रहने वाले तत्कालीन समाज के वंचितों वनवासियों, आदिवासियों को मुख्य धारा में जोडने का आदर्श प्रस्तुत किया जब उन्हें सत्ता सौंपी जानी थी, और भरत ने उसी सत्ता का संचालन बड़े भाई की खड़ाऊं को प्रतीक मानकर किया ।आचार्य कुणाल किशोर ने कहा श्रीराम के तीन दिन सविनय निवेदन के बाद अस्त्र उठाने पर समुद्र ने अपनी जड़ता और उससे जुड़ी मर्यादा की दुहाई देते हुए जो शब्द कहे उन्हें सत्ता के स्वार्थ में मनचाही व्यख्या की मानसिकता भ्रम पैदा करना चाहती है जो बिल्कुल उपेक्षा योग्य है।

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इस अवसर पर पूर्व जिलाजज बीड़ी तिवारी, अपर महाधिवक्ता कुलदीप पति त्रिपाठी, रामलला की वकील रही रंजना अग्निहोत्री, अवध बार एसोसिएशन के सचिव मनोज मिश्रा, एडवोकेट अखिलेश दुबे, वरिष्ठ पत्रकार के के उपाध्याय,प्रधान सम्पादक डॉ रवींद्रनाथ त्रिपाठी, डॉ ऋषिकेश सिंह, आदि ने अपने विचार व्यक्त किये। इस अवसर पर कई संगठनों के पदाधिकारी, विद्यालय के अभिभावक विद्यार्थी, शिक्षक, माताएं बहने आदि उपस्थित रहे।

 

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