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डॉ. अम्बेडकर ने निरन्तर विपन्न वर्ग के आर्थिक उत्थान की बात कहींः : प्रो. एन.एम.पी. वर्मा

-अवध विवि में डॉ अम्बेडकर की जयन्ती पर संगोष्ठी का आयोजन

अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के अम्बेडकर चेयर, अर्थशास्त्र एवं ग्रामीण विकास तथा ललित कला (फाईन आर्ट्स) विभाग के संयुक्त संयोजन में बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की 132वीं जयन्ती पर भारतीय अर्थ व्यवस्था के समावेशी विकास में डॉ0 अम्बेडकर के आर्थिक विचारों की प्रासंगिकता विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

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इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर केन्द्रीय विश्वविद्यालय लखनऊ के पूर्व कुलपति प्रो0 एन0एम0पी वर्मा एवं विशिष्ट आतिथि के रूप में डॉ0 शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय लखनऊ के प्रो0 पाण्डेय राजीव नयन व बी0एच0यू0 वाराणसी के प्रो0 राजेश शाह रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कला एवं मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो0 आशुतोष सिन्हा ने की। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि पूर्व कुलपति प्रो0 एन0एम0पी वर्मा ने बताया कि डॉ0 अम्बेडकर निरन्तर समाज के विपन्न वर्ग के आर्थिक उत्थान की बता कही है। उन्होंने विभिन्न विकासात्मक आर्थिक पहलुओं के माध्यम से समाज के अन्तिम पायदान पर जीवन यापन कर रहे लोगों को जोड़ने का काम किया है। उनका मानना था कि व्यक्ति को विकास की मुख्य धारा से जोड़ना ही समावेशी विकास है।

प्रो0 वर्मा ने कहा कि डॉ0 अम्बेडकर ने आय एवं सम्पत्ति के समान वितरण के साथ सामाजिक न्याय व्यवस्था एवं रोजगार के समान अवसर उपलब्धता कराना ही सर्वसमाज का विकास हैं। यदि हमे वास्तव में समाज का सम्पूर्ण आर्थिक विकास करना है तो हमें वितरण की व्यवस्था को न्यायपूर्ण बनाना होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कला एवं मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो0 आशुतोष सिन्हा ने डॉ0 अम्बेडकर के आर्थिक विचार के विभिन्न पहलुओं का विश्लेषण करते हुए बताया कि डॉ0 अम्बेडकर की संघीय वित्त व्यवस्था एवं कृषि नीति निश्चित रूप से भारतीय अर्थव्यवस्था की आर्थिक विषमता को दूर कर सकता है। डॉ0 अम्बेडकर के इस व्यवस्था को अपनाने से देश प्रगतिशील बन सकता है। संगोष्ठी के विशिष्ट अतिथि डॉ0 शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय लखनऊ के प्रो0 पाण्डेय राजीव नयन ने डॉ0 अम्बेडकर को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा कि अम्बेडकर ने समाज में श्रमिक वर्ग के जीवन स्तर में सुधारने की बात कही थी इनके कृषि के क्षेत्र में केन्द्रीयकृत व्यवस्था को स्वीकार कर विपन्न वर्ग के स्तर को सुधारा जा सकता है। संगोष्ठी में बी0एच0यू0 वाराणसी के प्रो0 राजेश शाह ने बताया कि डॉ0 अम्बेडकर ने राजकोषीय नीति समाज के विपन्न वर्ग को प्रगतिशील बनाने का प्रयास किया हैं।

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कार्यक्रम में अर्थशास्त्र एवं ग्रामीण विकास विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो0 विनोद कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि राष्ट्रीय संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य छात्र-छात्राओं को डॉ0 अम्बेडकर के विभिन्न प्रकार के आर्थिक विचारो से अवगत कराना है। इस संगोष्ठी में तकनीकी सत्र के वक्ता इन्दौर विश्वविद्यालय मध्य प्रदेश के प्रो0 जी0एम0 दूबे, मगध विष्वविद्यालय विहार के प्रो0 एल0 एस0 सिंह, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो0 एम0ए0 वेग, एल0बी0एस0पी0जी कालेज गोण्डा के प्रो0 जी0 एल0 प्रजापति, गढ़वाल विश्वविद्यालय उत्तराखण्ड के प्रो0 आर0 एस0 नेगी, गोपेश्वर के प्रो0 एस0 के लाल के साथ शोध छात्र अनिल कुमार, रवि शंकर सहित अन्य ने शोध पत्र प्रस्तुत किया है।

इसमें कुल 18 शोध पत्र प्रस्तुत किये गये है। इस अवसर पर आयोजन सचिव डॉ0 सरिता द्विवेदी, संयोजक प्रो0 मृदुला मिश्रा, माइक्रोवायोलोजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो0 शैलेन्द्र कुमार, डॉ0 अनिल कुमार, डॉ0 सुधीर प्रकाष, डॉ0 अलका श्रीवास्तव, श्रीमती रीमा सिंह ने भी विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन प्रो0 मृदुला मिश्रा तथा धन्यवाद ज्ञापन विभाग की सह आचार्य डॉ0 प्रिया कुमारी द्वारा किया गया। संगोष्ठी के दौरान रीमा सिंह, सरिता सिंह, आशीष प्रजापति, कविता पाठक, विजय कुमार शुक्ला, कुषाग्र पाण्डेय, शिव शंकर यादव, आलोक कुमार सहित शोद्यार्थी एवं छात्र-छात्राएं मौजूद रही।

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