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तिलोद्गकी गंगा की खुदाई का मुख्य विकास अधिकारी ने किया निरीक्षण

-निरीक्षण के दौरान सम्बन्धित ग्राम प्रधानों व अधिकारियों कर्मचारियों को दिया आवश्यक दिशा निर्देश

सोहावल-अयोध्या। लगभग साल भर के भगीरथ प्रयास के बाद जिले में लुप्त हो चुकी पौराणिक नदी त्रिलोदकी गंगा की खुदाई का काम सोहावल से शुरू हो गया है। इसका निरीक्षण करने पहुँची मुख्य विकास अधिकारी अनीता यादव ने सम्बन्धित ग्राम पंचायत के प्रधानों के साथ साथ जे ई को मय टीम के साथ कार्य स्थल का निरीक्षण करते रहें।व कर्मचारियों को इसकी देख रेख व प्रधानों से मौसम अनुकूल होने की बात कहकर मज़दूरो की संख्या बढ़ाने का निर्देश दिया।वही इसकी चपेट में आ रहे किसानों में हाहाकार मचने के साथ लोगो मे खुशी भी दिखाई पड़ रही है।

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लगभग वर्ष भर पहले इस नदी को वर्तमान में धरती पर लाने के लिए भगीरथ बने पत्रकार राजेन्द्र पाण्डेय की पहल को पूर्व जिला अधिकारी और सांसद लल्लू सिंह ने जब गंभीरता से लिया और अनुश्रवण समिति का गठन हो गया तो तिलैया नाला बन चुकी इस गंगा नदी के अच्छे दिन आने की उम्मीद बढ़ गयी ।


गठित अनुश्रवण समिति के माध्यम से डीएम के साथ पूर्व सीडीओ प्रथमेश कुमार ने इसकी खोज शुरू करवाई और सोहावल और सदर तहसील प्रशासन के साथ इसके मार्ग के संभावित गांवों के लेखपालों को एक साथ बैठाया गया तो नदी का मार्ग एक-एक करके आगे के गांवों से जुड़ता चला गया सर्वे करने वालों की मानें तो इसके मार्ग में कई बड़ी झीलें और तालाब इसके अस्तित्व की गवाही दे रहे हैं। सोहावल तहसील के पंडितपुर में आज भी यह नदी की शक्ल में मौजूद है।हालांकि लोग इसे तिलैया नाला कह कर पुकारते आ रहे है जो समदा झील से होते हुए आगे बढ़ती है।

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पौराणिक तिलोद्गकी गंगा (तिलैया) नदी दो तहसील सदर व सोहावल और तीन ब्लॉकों सोहावल, मसौधा और पूराबाजार से होते हुए अपनी लगभग 47 किमी. की यात्रा पूरी करती है। इसके बाद यह सरयू में मिल जाती हैं। सूत्रों के मुताबिक तिलोदकी गंगा नदी सोहावल ब्लॉक के गौरा ब्रह्मनान, अरथर, पंडितपुर, भिखारीपुर, मोइयाकपूरपुर ग्राम पंचायतपुर से, मसौधा ब्लॉक के हूंसेपुर, मानापुर, रायपुर, बल्लीपुर, सरियावां, गोपालपुर, बिछिया, मउयदुवंशपुर और टोनिया, पूराबाजार ब्लॉक के गंजा, जनौरा, भीखापुर, रानोपाली, आशापुर, मक्खापुर, तकपुरा, जियनपुर, हैबतपुर, बाग बिजेसर, काजीपुर, जयसिंहपुर, आशिफ बाग माझा, शाहनेवाजपुर, तिहुरा माझा, माझा रामपुर हलवारा, से होते हुए सरायरासी और राजेपुर मांझा के आसपास से होते हुए आगे बढ़ती है


पिछले दो दिनों से शुरू हुई इस नदी की खुदाई में कई गांव के पास सैकड़ो की संख्या में मनरेगा मजदूर लगाए गए है। इसके चलते अब जिन किसानों की भूमि नदी के अगले बगल आने से खुदाई में जा रही है इनमे हड़कंप मचा हुआ है कोई अपनी भूमि मुफ्त में चले जाने की बात कर विरोध जता रहे है तो कोई न्यायालय जाने की तैयारी में है। ग्रामीण अलगू राम फेर शत्रोहन सुकई जैसे किसानों का कहना है।नदी के बनने से खुसी है लेकिन खेत या तो सरकार पूरा करे कंही और जमीन दे या मुआबजा दें। तब भूमि लेकर नदी की खुदाई करायें।

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