कृषि विश्वविद्यालय बना राजनीति का केंद्र

    चाटुकारों से घिरे कुलपति, शुरू है दलालों को उपकृत करने का सिलसिला

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    (करूणाकर दूबे)
    फैजाबाद। केंद्र व प्रदेश सरकार के नेक व विकास के प्रयासों के बाद भी उनके द्वारा नियुक्त किए गए कुलपति व रजिस्ट्रार ही ग्रहण बने हुए हैं यह स्थित है नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज की जहां पर इन दिनों कुलपति की कम उनके सहपाठी रजिस्ट्रार व उनके खास कानपुर के पांडेय को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों की अनदेखी करके कार्य किए जा रहे हैं जिससे पठन पाठन सुरक्षा व शोध कार्य पूरी तरह प्रभावित है जबकि पूर्व के कुलपतियों के कार्यकाल में यह विश्वविद्यालय अपने शोध कार्यों के लिए राष्ट्रीय स्तर की ख्याति प्राप्त कर चुका है। आए दिन छात्रों की मौत से भी अधिष्ठाता छात्र कल्याण व कुलपति के खास पर प्रश्नचिन्ह लग रहा है। वर्णन योग्य है कि इस समय विश्व विद्यालय परिसर पूरी तरह राजनीति से ग्रसित है पद लोलुप लोग चाटुकारिता में लगे हैं तो कुलपति भी इन चाटुकारों को उपकृत करने के लिए हर प्रयास कर रहे हैं। जिससे शुरू हो गया है विश्वविद्यालय की प्रगति ख्याति से खिलवाड़। बताना समीचीन है कि 15 दिन पूर्व शनिवारध् रविवार की रात बिना सुरक्षा अधिकारी की जानकारी के कुलपति ने सुरक्षा का निरीक्षण किया कुछ गार्ड सोते मिले उनके विरुद्ध कार्यवाही भी हुई और बिना किसी स्पष्टीकरण के सुरक्षा अधिकारी आर के सिंह को पद सहित दो वेतन वृद्धि रोककर स्थानांतरित कर दिया गया। यहां तक तो सब ठीक था किंतु विरोध तब हुआ जब अन्य जिम्मेदार लोगों पर कोई कार्यवाही नहीं हुई इस संदर्भ में सुरक्षा अधिकारी आर के सिंह ने बताया कि कुलपति अपने एक दलाल को लाभान्वित करने के लिए विश्वविद्यालय की सुरक्षा का ठेका निजी एजेंसी को देना चाहते हैं जिससे सुरक्षा पर खर्च होने वाले 86 लाख रुपए वार्षिक की बंदरबांट हो सके। इसी कारण बिना सूचना के इन्होंने उचक निरीक्षण किया जबकि ने सुरक्षा अधिकारी अथवा स्थानीय प्रशासन के साथ निरीक्षण करना चाहिए था। यदि कोई गार्ड या अराजकतत्व इनके ऊपर हमलावर हो जाता तो यह प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती होती। सुरक्षा अधिकारी ने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय की पूरी सुरक्षा मेरे पास नहीं है। गृह विज्ञान विभाग की सुरक्षा वहां की सुरक्षा वहां की डीन, डेयरी विभाग की सुरक्षा वहां के प्रभारी, वाहन विभाग की सुरक्षा वाहन अधिकारी व इंजीनियरिंग विभाग की सुरक्षा अधिशासी अभियंता के पास है, और इन सभी के गार्ड सोते पाए गए किंतु इनके ऊपर कार्यवाही सिर्फ इसलिए नहीं की गई क्योंकि सुरक्षा अधिकारी को हटाकर ही निजी एजेंसी को विश्वविद्यालय की सुरक्षा का ठेका देकर कुलपति अपने दलाल को उपकृत करना चाहते हैं।
    सूत्रों की माने तो पूर्व कुलपति प्रो. अख्तर हसीब ने जिन लोगों को जांच के बाद हटाया था। वर्तमान समय में सभी की वापसी मलाईदार पदों पर हो चुकी है जो कतई विश्वविद्यालय के हित में नहीं है। रही बात सुरक्षा कारणों की तो यह परिसर कई मौतों का जिम्मेदार है जिसमें प्रोफेसर से लेकर अभी हाल में 2 छात्रों की मौत भी उल्लेखनीय है। इस संदर्भ में जब कुलपति प्रो. जे.एस संधू से उनके मोबाइल नंबर 9582898978 पर संपर्क किया गया तो उनका फोन नहीं उठा। इसी संदर्भ में रजिस्ट्रार डॉ पी के सिंह से उनके मोबाइल 7408836617 पर संपर्क किया गया तो सब कुछ जान कर अंजान बने और कहा कि मैं कुलपति का सहपाठी अवश्य हूं पर यह सभी निर्णय कुलपति के हैं जबकि सभी जानते हैं कि कुलपति से बड़ा दरबार इन्हीं का लगता है कोई भी कार्य हो लोग इन्हीं के माध्यम से कराते हैं। 3 माह के कार्यकाल में कुलपति ने रजिस्ट्रार की सलाह पर ही वित्त विभाग व प्रशासनिक कार्यालय के उन सभी अकर्मण्य लोगों को पुनः पदस्थापित कर दिया जिनके ऊपर गंभीर आरोप थे। फिलहाल वर्तमान समय में विश्वविद्यालय का पठन-पाठन व शोध कार्य प्रभावित है और चाटुकार व दलालों का बोलबाला है यही चाटुकार विश्वविद्यालय की जड़ों में मट्ठा डालकर सरकार की छवि को धूमिल कर रहे हैं।