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रामायण कालीन पौधरोपण व लैंड स्केपिंग पर हुआ मंथन

-परकोटे के निर्माण में फकीरे राम मंदिर पर स्टे का अवरोध

अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के भवन निर्माण समिति की दो दिवसीय बैठक के पहले दिन शनिवार को परिसर में रामायणकालीन पौधरोपण के अलावा लैंड स्केपिंग विषय पर मंथन किया गया। इस मौके पर नोएडा की एजेंसी की ओर से प्रजेंटेशन भी दिया गया। वहीं रामलला के विग्रह पर चर्चा अधूरी ही रह गयी। यह चर्चा रविवार को भी जारी रहेगी और संभावना है कि अंतिम निष्कर्ष निकल आए। भवन निर्माण समिति की बैठक निर्धारित समय से काफी विलंब से शुरू हुई और समिति चेयरमैन की व्यक्तिगत व्यस्तता के कारण समय से पहले समाप्त भी हो गई।

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रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय ने बताया कि बैठक से पहले मंदिर निर्माण स्थल का स्वाभाविक तौर पर निरीक्षण किया जाता है, लेकिन शनिवार को परिसर के उन सभी स्थलों का निरीक्षण किया गया, जहां-जहां भी निर्माण चल रहा है। यथा रिटेनिंग वाल निर्माण, परकोटा निर्माण, विद्युत सब स्टेशन निर्माण एवं तीर्थ यात्री सुविधा केंद्र निर्माण स्थलों का भ्रमण कर समिति चेयरमैन ने गहन निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कई सवाल भी किया, जिसका उत्तर कार्यदायी संस्था एलएण्डटी के अभियंताओं ने दिया।

उधर विश्वामित्र आश्रम स्थित एलएंडटी के कार्यालय में अपराह्न दो बजे तक चली बैठक में एजंडे के अनुसार मंदिर निर्माण की प्रगति के विषय पर विमर्श किया गया। इस दौरान परकोटा के विषय पर गहनता से मंथन चला, जिसमें निर्माण के रास्ते में आ रहे अवरोध के निराकरण को आवश्यक बताया गया। विदित हो कि करीब दस एकड़ में निर्माणाधीन परकोटा के उत्तर-पूर्व में फकीरे राम मंदिर का अवरोध है। यद्यपि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की ओर से विनिमय के आधार पर प्रश्नगत स्थान को हस्तगत कर लिया गया है। फिर भी इस मंदिर के अतिरिक्त हितधारक ने सिविल कोर्ट से स्थगनादेश ले रखा है। ट्रस्ट के न्यासी अनिल मिश्र ने बताया कि इस विषय का निराकरण शीघ्र हो जाएगा।

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वहीं भवन निर्माण समिति की पहले दिन की बैठक को लेकर ट्रस्ट महासचिव चंपत राय ने बताया कि बैठक में रविवार को कई विषयों पर निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने नेपाल से भेजी जाने वाली शालिग्राम शिला के विषय पर पूछे जाने पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। उधर इस बैठक में ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देव गिरि भी शामिल हुए।

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