‘‘भरी-भरी अंजुरी से मोतिया लुटईबै, सियाराम जी के आरती करईबै’’

38वें रामायण मेला के समापन पर हुई सांस्कृतिक संध्या

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अयोध्या। 38वें रामायण मेला के अवसर पर संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित अन्तिम दिवस की सांस्कृतिक संध्या का शुभारम्भ मुख्य अतिथि मणिराम दास छावनी,महन्त कमल नयन दास विशिष्ट अतिथि विजय पाल सिंह, पुलिस अधीक्षक, नगर व एस. पी. सिंह, पुलिस अधीक्षक ग्रामीण के द्वारा गोस्वामी तुलसी दास जी के चित्र पर माल्यापर्ण एवं दीप प्रज्जवलित करके किया गया। इस अवसर पर रामायण मेला समिति के महामंत्री शीतला सिंह, पुरुषोत्तमदास तथा अन्य पदाधिकारियों एवं संस्कृति विभाग के रामायण मेला के नोडल अधिकारी योगेश यादव, रमेश चन्द्र, रामतीरथ एवं कमलेश कुमार पाठक द्वारा मुख्य अतिथि का पुष्प गुच्छ भेंटकर स्वागत किया। रामायण मेला के चतुर्थ दिवस के प्रातः काल की प्रस्तुति में विसुनदेव राय, मिथलांचल अवध आदर्श रामलीला मण्डल, अयोध्या द्वारा रामलीला में धनुषयज्ञ प्रसंग की प्रस्तुति किया गया। सायं के कार्यक्रम में प्रथम प्रस्तुति भोजपुरी, अवधी के महुवा टी.वी. के प्रसिद्ध एवं अन्तर्राष्ट्रीय गायक राजेश तिवारी, सुल्तानपुर द्वारा ‘‘अयोध्या करती है आव्हान, ठाठ से कर मन्दिर निर्माण’’, ‘‘जब भक्त नहीं होंगे, भगवान कहाँ होंगे, ‘‘प्रभु से मेरा भी मिलन करवा दो’’ और अन्त में विवाह गीत ‘‘भरी-भरी अंजुरी से मोतिया लुटईबै, सियाराम जी के आरती करईबै’’ जैसे गीतों से समा बांध दिया। दूसरी प्रस्तुति लखनऊ की लोक गायिका सरला गुप्ता ने गणेश वन्दना ‘‘घर मे पधारो गजानन्द जी, मेरे घर में पधारो’’ से अपने प्रस्तुति प्रारम्भ करते हुए देवीगीत ‘‘मांगहुं रे सोहाग मैया तोहरे मन्दिरवा,’’, लोकगीत ‘‘राम लखन दोनों भईया, अवध रहवईया मुनि के संग आये हैं’’, विवाहगीत ‘‘झुक जईयो तनिक रघुबीर, सिया मोरी छोटी हैं’’ आदि सुमधुर गीतों से श्रोताओं को भक्ति भावना से सराबोर कर दिया। तृतीय प्रस्तुति में विख्यात लोक गायिका सुश्री अंशिका त्यागी, लखनऊ व दल द्वारा लोकगीत ‘‘श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन’’ पर कथक नृत्य एवं अन्त में ‘‘सईया जी मोहे लागे नजरिया’’ पर लोकनृत्य प्रस्तुत किया गया। चौथी प्रस्तुति में लखनऊ से पधारी लोकगायिका सुश्री प्रीती लाल व दल द्वारा गणेश वन्दना ‘‘घर मे पधारो गजानन्द जी, मेरे घर में पधारो’’ से प्रस्तुति का शुभारम्भ किया गया और देवी आव्हान गीत ‘‘आओ हो देवी मईया, बैठो मोरे अंगना’’, मेहंदी गीत ‘‘बन्नी के गोरे-गोरे हाथ, रचन देओ मेहंदी’’ विवाह गीत ‘‘बेदी जे पतिऔ परतरी छाई हरियर-हरियर बांस रे’’ आदि प्रस्तुत किया और अन्त में बधाई गीत ‘‘अवध में बाजे बधईया’’ से अपनी सराहनीय प्रस्तुति का समापन किया ।