अयोध्या। गुरुवार को अपर जिलाधिकारी नगर योगानंद पाण्डेय एवं अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) अमित कुमार भट्ट की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में अभियोजन की समीक्षा हुई। अधिकारियों ने अभियोजन कार्यों की प्रगति रिपोर्ट देखी और लंबित प्रकरणों की जानकारी हासिल कर इनके त्वरित निस्तारण के लिए निर्देश दिया।गं भीर प्रकरणों में शत-प्रतिशत गवाही कराने और गैंगेस्टर के मामले में प्रभावी पैरवी की हिदायत दी है।
‘
अभियोजन कार्यों की समीक्षा बैठक में निस्तारित,लंबित एवं नव पंजीकृत अभियोजन प्रकरणों की विस्तृत समीक्षा की गई। विशेष रूप से गैंगेस्टर अधिनियम के लंबित मामलों में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करते हुए उन्हें शीघ्र निस्तारित कराने के निर्देश दिए गए।अधिकारियों ने हिदायत दी कि न्यायालयों में लंबित मामलों की सुनवाई में तेजी लाई जाए,प्रत्येक प्रकरण में समयबद्ध एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित हो,
गंभीर प्रकरणों में गवाहों की शत-प्रतिशत उपस्थिति कराई जाए,समय से साक्ष्य प्रस्तुत कराये जाएं और केस डायरी की नियमित मॉनिटरिंग की जाए। गैंगेस्टर,पॉक्सो,एससी/एसटी अधिनियम सहित अन्य गंभीर आपराधिक प्रकरणों की समीक्षा में मिशन शक्ति के तहत महिला संबंधी अपराधों में संवेदनशीलता एवं गंभीरता के साथ प्रभावी पैरवी कराने की हिदयात दी गई।
विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव ने किया निरीक्षण,दिया निर्देश
अयोध्या। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव ने गुरुवार को राजकीय सम्प्रेक्षण गृह(किशोर) और जिला कारागार का निरीक्षण किया। कर्मचारियों की उपस्थिति पंजिका देखी और सहायक अधीक्षक को समुचित साफ-सफाई का निर्देश दिया।
निरीक्षण करने पहुंची प्राधिकरण सचिव रंजिनी शुक्ला ने राजकीय सम्प्रेक्षण गृह(किशोर) में निरूद्ध किशोर अपचारियों से उनके स्वास्थ्य एवं भोजन के बारे में जानकारी ली। अपचारियों ने बताया कि समय-समय पर स्वास्थ्य की जांच के लिए चिकित्सक आते हैं और मेन्यू के अनुसार भोजन दिया जा रहा है। सम्प्रेक्षण गृह में शिक्षा के लिए अध्यापकों की व्यवस्था की गयी है।
उन्होंने किशोर अपचारियों को निःशुल्क विधिक सहायता के बारे में जानकारी दी और बताया कि यदि किसी किशोर अपचारी को विधिक सहायता की आवश्यकता है तो जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अयोध्या के माध्यम से निःशुल्क विधिक सहायता प्राप्त कर सकते हैं। जिला कारागार के निरीक्षण में बंदियों से व्यवस्था की जानकारी ली। साफ़-सफाई और भोजन व्यवस्था दुरुस्त मिली। प्राधिकरण सचिव ने करागार अधीक्षक को बंदियों के बौद्धिक विकास हेतु मोटिवेट करने का निर्देश दिया। जिससे वह मानसिक तौर पर विकसित होकर देश विकास के मुख्य धारा में अपना योगदान कर सकें।